नयी दिल्ली। शुक्रवार को जारी किये गये सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों में (अप्रैल-जनवरी की अवधि में) भारत का राजकोषीय घाटा 9.85 लाख करोड़ रुपये (137.05 बिलियन डॉलर) या चालू वित्त वर्ष के संशोधित बजट लक्ष्य के 128.5 फीसदी पर पहुंच गया। अप्रैल-जनवरी के दौरान सरकार की शुद्ध टैक्स प्राप्तियां 9.98 लाख करोड़ रुपये रहीं, जबकि कुल खर्च 22.68 लाख करोड़ रुपये रहा। राजकोषीय घाटा किसी सरकार की आय में उसके खर्च की तुलना में कमी को दर्शाता है। इसका साफ मतलब है कि सरकार अपनी आय से अधिक खर्च कर रही है। सरकार का लक्ष्य राजकोषीय घाटे को मार्च 2020 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद के 3.3 प्रतिशत या 7,03,760 करोड़ रुपये तक रोकना है।

कितना है टार्गेट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए जीडीपी का 3.5% राजकोषीय घाटा लक्ष्य निर्धारित किया है। सीतारमण लगातार तीसरे वर्ष राजकोषीय घाटे में लक्ष्य से चूक गईं, जो चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के 3.8 प्रतिशत तक पहुँच गया, जबकि पहले 3.3 प्रतिशत का अनुमान था। आगामी एक अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा लक्ष्य 3.5 प्रतिशत तय किया गया है। सरकार का पूर्वानुमान है कि अगले वित्त वर्ष में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 6.0% से 6.5% तक बढ़ सकती है। हालांकि चेतावनी भी दी है कि इससे राजकोषीय घाटा हाई हो सकता है।
विकास दर घटी
जुलाई-सितंबर की तिमाही में भारत की आर्थिक वृद्धि 4.5% तक गिर गई जिससे मांग में तेज गिरावट से कारोबार में गिरावट आई है और कंपनियों को निवेश और नौकरियों में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि सरकार के लिए राहत की खबर ये है कि जीएसटी संग्रह पिछले तीन महीनों में बढ़ा है और जनवरी में लगातार तीसरे महीने में 1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है। राजकोषीय घाटे को कम करने में मदद के लिए सरकार टेलीकॉम कंपनियों द्वारा एजीआर बकाया के भुगतान की भी उम्मीद कर रही है।
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