बड़ी खबर : अप्रैल-जून में 13.5 फीसदी रही भारत की GDP ग्रोथ रेट

नई दिल्ली, अगस्त 31। अप्रैल-जून तिमाही में भारत की जीडीपी दहाई अंक में 13.5 फीसदी की दर से बढ़ी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने बुधवार को अप्रैल-जून तिमाही के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े पेश किए। इनमें देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 13.5 फीसदी रही है। बता दें कि विश्लेषकों ने भारत की जीडीपी में 13 से 16.2 प्रतिशत तक की वृद्धि का अनुमान लगाया था। इनमें रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने 13 प्रतिशत और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने 15.7 प्रतिशत का अनुमान लगाया था, जबकि आरबीआई का अनुमान 16.2 प्रतिशत की वृद्धि का था। इस बीच जुलाई, 2022 में जुलाई, 2021 की तुलना में उर्वरक उत्पादन में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

आरबीआई के अनुमान से कम रही विकास दर

आरबीआई के अनुमान से कम रही विकास दर

30 जून, 2022 तक के तीन महीनों में जीडीपी 13.5% रही। हालांकि, यह भारतीय रिजर्व बैंक के 16.2% जीडीपी वृद्धि के अनुमान से कम है। इससे पहले पिछले साल समान तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 20.1% थी। वहीं इसी साल जनवरी-मार्च में जीडीपी ग्रोथ रेट 4.1% रही थी।

वास्तविक जीडीपी के आंकड़े
वास्तविक जीडीपी या सकल घरेलू उत्पाद कॉन्सटैंट (2011-12) कीमतों पर 2022-23 की पहली तिमाही में 36.85 लाख करोड़ रुपये के स्तर को प्राप्त करने का अनुमान है, जबकि 2021-22 की पहली तिमाही में यह 32.46 लाख करोड़ रुपये थी। ये अप्रैल-जून तिमाही में साल दर आधार पर 13.5 फीसदी की वृद्धि दिखा रहा है।

नॉमिनल जीडीपी के आंकड़े

नॉमिनल जीडीपी के आंकड़े

2022-23 की पहली तिमाही में मौजूदा कीमतों पर नॉमिनल जीडीपी या जीडीपी 64.95 ट्रिलियन रुपये होने का अनुमान है, जबकि 2021-22 की पहली तिमाही में यह 51.27 ट्रिलियन रुपये रही। इस तरह ये 2021-22 की पहली तिमाही में 32.4% की तुलना में 26.7% की वृद्धि दिखा रहा है।

कितनी है भारत की उच्चतम विकास दर
पिछली बार भारत का जीडीपी अपना उच्चतम स्तर हासिल करने में कामयाब रहा था। पिछले साल की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी ने उच्च वार्षिक वृद्धि हासिल की थी। 2021 की अप्रैल-जून तिमाही यह 20.1% रही थी।

आगे कैसी रह सकती है विकास दर

आगे कैसी रह सकती है विकास दर

अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि अगली कुछ तिमाहियों में भारत के आर्थिक विकास की गति तेजी से धीमी होगी क्योंकि उच्च ब्याज दरों ने आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित किया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने मई के बाद से अपनी बेंचमार्क रेपो दर में 140 आधार अंकों की वृद्धि की है, जिसमें इस महीने 50 आधार अंक शामिल हैं, जबकि घरेलू विकास संभावनाओं पर वैश्विक मंदी के प्रभाव के बारे में चेतावनी दी गई है। कई अर्थशास्त्री अगले महीने लगभग 50 आधार अंकों की एक और वृद्धि की उम्मीद करते हैं। इसके बाद 25 आधार अंकों की एक और वृद्धि की उम्मीद की जा रही है।

ग्रॉस वैल्यू एडेड

ग्रॉस वैल्यू एडेड

अप्रैल-जून में ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) ग्रोथ 12.7% पर रही। 2021-22 में जीवीए ग्रोथ 18.1% दर्ज की गई थी। जीवीए, जो सब्सिडी और अप्रत्यक्ष करों के प्रभाव को दूर करता है, इसी साल जनवरी-मार्च में 3.9 फीसदी रहा था।

कितना रहा राजकोषीय घाटा
आज राजकोषीय घाटे को लेकर भी सरकारी आंकड़े जारी किए गए, जिनके मुताबिक अप्रैल से जुलाई के दौरान भारत का राजकोषीय घाटा 3.41 लाख करोड़ रुपये रहा। यह साल भर के लक्ष्य का 20.5 फीसदी है। बता दें कि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान राजकोषीय घाटा लक्ष्य का 21.3 फीसदी था। यानी इस साल जुलाई तक की अवधि में राजकोषीय घाटा घटा है।

कोर सेक्टर आउटपुट
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों का उत्पादन जुलाई में घटकर 4.5 प्रतिशत रह गया, जो छह महीने में सबसे कम है। पिछले साल जुलाई में यह 9.9 फीसदी था। इस साल जून में कोर सेक्टर का उत्पादन 12.7% था। इन क्षेत्रों का उत्पादन जून में 13.2 प्रतिशत, मई में 19.3 प्रतिशत, अप्रैल में 9.5 प्रतिशत, मार्च में 4.8 प्रतिशत, फरवरी में 5.9 प्रतिशत और जनवरी में 4 प्रतिशत बढ़ा।

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