
Fiscal Deficit : आज तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों सहित फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) और 8 कोर सेक्टरों के उत्पादन के आंकड़े जारी किये गये। पहले बात करते हैं राजकोषीय घाटे की। वित्त वर्ष 2022-23 के पहले 10 महीनों के लिए केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़ कर 11.91 लाख करोड़ रुपये हो गया। ये आंकड़े लेखा महानियंत्रक (कंट्रोलर जनरल) ने आज 28 फरवरी को जारी किए हैं। बता दें कि पिछले वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों में राजकोषीय घाटा उस वित्त वर्ष के लक्ष्य का 58.9 फीसदी रहा था।
2022-23 के लिए संशोधन
केंद्र सरकार ने 2023 के बजट में 2022-23 के लिए अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को 16.61 लाख करोड़ रुपये से बढ़ा कर 17.55 लाख करोड़ रुपये कर दिया था। हालांकि इस साल भारत की अर्थव्यवस्था के साइज के बजट अनुमान से अधिक हो सकती है, जिससे जीडीपी के प्रतिशत के रूप में राजकोषीय घाटा शुरुआती लक्ष्य 6.4 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहा।
टोटल रेवेन्यू कितना रहा
अप्रैल-जनवरी की अवधि में सरकार की कुल राजस्व प्राप्तियां (टोटल रेवेन्यू रिसीट) 19.76 लाख करोड़ रुपये रही, जो कि वित्त वर्ष 2022-23 के संशोधित बजट अनुमान 24.32 लाख करोड़ रुपये का 81.3 प्रतिशत है।
8 कोर सेक्टरों का उत्पादन बढ़ा
जनवरी 2023 में आठ कोर सेक्टरों का उत्पादन चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। ये जनवरी में 7.8 फीसदी रहा, जो दिसंबर 2022 में 7 फीसदी था। बता दें कि उर्वरक उत्पादन में 18% की तेज वृद्धि रही और कोयला खनन और बिजली उत्पादन में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की गयी। कोर सेक्टर्स का आउटपुट जनवरी 2022 में 4 फीसदी और दिसंबर 2022 में 7 फीसदी बढ़ा था।
कच्चे तेल का उत्पादन घटा
लगातार दूसरे महीने कच्चे तेल को छोड़कर सभी कोर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों के उत्पादन में एक साल पहले के पहले के उत्पादन के मुकाबले वृद्धि दर्ज की गयी। कच्चे तेल का उत्पादन 1.1% गिर गया, जो लगातार आठवें महीने में इसके उत्पादन में साल-दर-साल की गिरावट है। जनवरी 2023 में स्टील और सीमेंट उत्पादन क्रमशः 6.2% और 4.6% की तेजी आई, लेकिन तीन महीनों में इन दोनों क्षेत्रों में सबसे धीमी विकास दर दर्ज की गई।


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