नयी दिल्ली। एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की बदौलत अब बैंक खाता खोलना और भी आसान हो गया है। बैंकिंग प्रोसेस में और अधिक डिजिटलीकरण के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक या आरबीआई ने अपने हालिया निर्देश में बैंकों को वीडियो कॉल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और चेहरे की पहचान तकनीक का इस्तेमाल करके कस्टमर आइडेंटिटी वेरिफाइ करने की अनुमति दे दी। इसका मतलब है कि अगर आप ऑनलाइन बैंक खाता खोलना चाहते हैं, तो आपको केवाईसी (नो योर कस्टमर) प्रक्रिया के लिए किसी बैंक ब्रांच में नहीं जाना पड़ेगा। 9 जनवरी 2020 को जारी की गयी अधिसूचना में आरबीआई ने कहा था कि रेगुलेटेड इंस्टिट्यूशंस द्वारा ग्राहक पहचान प्रक्रिया के लिए डिजिटल चैनलों से फायदा उठाने के लिए ग्राहक की पहचान सत्यापित करने के लिए वीडियो आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम
आसान शब्दों में बैंक वीडियो आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया में ग्राहक के चेहरे और बाकी डॉक्यूमेंट्स को रिकॉर्डेड वीडियो कॉल पर सत्यापित कर सकते हैं। ग्राहक ऑडियो विजुअल इंटरैक्शन में दस्तावेज दिखा सकते हैं, जिसे आमने-सामने साक्षात्कार माना जाएगा। प्रोसेस के लिए बैंकों को पहचान करने और ऑनबोर्डिंग के लिए ग्राहक से सहमति लेनी होगी। ग्राहकों को वीडियो कॉल के दौरान पैन या आधार दिखाना होगा। अगर आपके पास ई-पैन जैसा ई-डॉक्यूमेंट हो तो आपको फिजिकल कागज दिखाने की जरूरत नहीं होगी। इस दौरान आपके लाइव फोटो लिये जायेंगे।
ऐसे होगा आधार और पैन का वेरिफिकेशन
बैंक पहचान के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी प्रमाणीकरण या आधार के ऑफ़लाइन सत्यापन का उपयोग कर सकते हैं। बैंक वी-सीआईपी की सहायता के लिए बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट्स (बीसी) की सेवाओं का भी उपयोग कर सकते हैं। हालांकि बैंकों के अलावा अन्य संस्थाएं आधार का केवल ऑफलाइन सत्यापन ही कर सकती हैं। वहीं पैन के मामले में अगर आप वीडियो के दौरान पैन कार्ड दिखायें तो बैंक अधिकारी उसकी क्लियर फोटो ले लेगा। Geotagging से आपकी लोकेशन जांच ली जायेगी। ताकि यह कंफर्म हो कि आप भारत में ही हैं। साक्षात्कार अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि यह पूरा प्रोसेस रियल टाइम में ही हो।
कौन सी ऐप का होगा इस्तेमाल
आरबीआई ने अभी यह नहीं बताया है कि वीडियो चैट के लिए किस ऐप का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए Google Duo या Apple FaceTime जैसे थर्ड पार्टी ऐप का इस्तेमाल होने की संभावना नहीं है, क्योंकि डेटा सुरक्षा बिल कंपनियों को ग्राहक का डेटा संग्रह करने की अनुमति नहीं देता। वैसे वीडियो केवाईसी से अन्य ई-केवाईसी प्रक्रियाओं के मुकाबले बैंकों और वित्तीय संस्थानों की लागत कम होने की उम्मीद है। यह भी उम्मीद है कि वेरिफिकेशन प्रक्रिया 5 दिन के बजाय 1 दिन या उससे कम में ही पूरी हो जाएगी।
यह भी पढ़ें - एटीएम के बाद अब शुरू हुए केवाईसी फ्रॉड, यहां जानें बचने का तरीका
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