New and old income tax regimes: इस साल इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने का दबाव थोड़ा कम होगा। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए आईटीआर दाखिल करने की लास्ट डेट 31 जुलाई, 2025 से बढ़ाकर 15 सितंबर, 2025 कर दी है। इससे टैक्सपेयर को बिना किसी विलंब शुल्क के अपना रिटर्न तैयार करने और जमा करने के लिए अतिरिक्त 45 दिन मिलेंगे।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने यह कदम अधिसूचित आईटीआर फॉर्म में किए गए महत्वपूर्ण अपडेट और आकलन वर्ष 2025-26 के लिए फाइलिंग सिस्टम तैयार करने और लागू करने में लगने वाले समय के कारण उठाया है।
सभी के लिए डिफॉल्ट होगी न्यू इनकम टैक्स
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए, नई टैक्स व्यवस्था करदाताओं पर ऑटोमैटिक लागू हो जाएगी। वेतनभोगी व्यक्ति अभी भी अपना रिटर्न दाखिल करते समय पुरानी व्यवस्था चुन सकते हैं। लेकिन अगर आप नियत डेट से चूक जाते हैं और विलंबित आईटीआर दाखिल करते हैं, तो ऐसा केवल नई व्यवस्था के तहत ही किया जा सकता है।
नई व्यवस्था के तहत, 3 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री है, और लग-अलग आय वर्गों पर बढ़ती दरों पर कर लगाया जाता है, जो 15 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत तक हो जाता है। यह वेतनभोगी लोगों और पेंशनभोगियों के लिए 75,000 रुपये की मानक कटौती भी देता है।
इसके अलावा 7 लाख रुपये तक की कर योग्य आय वाले लोग धारा 87A के तहत 25,000 रुपये तक की छूट का दावा कर सकते हैं, जिसका मतलब है कि उन्हें कोई कर नहीं देना होगा। नियोक्ता राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में योगदान करने पर भी आपको अपने मूल वेतन के 14 प्रतिशत तक की कटौती मिल सकती है।
यह याद रखना जरूरी है कि हाल ही में सरकार ने 12 लाख रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं की घोषणा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए है। और यह इस वर्ष आपके दाखिल किए जा रहे आईटीआर पर लागू नहीं होती है।
अभी भी एक विकल्प है पुरानी कर व्यवस्था
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पुरानी कर व्यवस्था में बदलाव नहीं होगी और समय सीमा से पहले रिटर्न दाखिल करते समय इसे चुना जा सकता है। इसमें कटौतियां और छूट मिलती रहेंगी, लेकिन उम्र के आधार पर अलग-अलग स्लैब दरें लागू होंगी।
60 वर्ष से कम आयु के करदाताओं के लिए, मूल छूट सीमा 2.5 लाख रुपये है, 60 से 79 वर्ष की आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह 3 लाख रुपये है, और 80 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए यह 5 लाख रुपये है। इन सीमाओं से परे, आय पर ब्रैकेट के आधार पर 5 प्रतिशत, 20 प्रतिशत या 30 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जाता है।
आपको कौन सी व्यवस्था चुननी चाहिए?
नई और पुरानी व्यवस्थाओं के बीच का फैसला आपकी इनकम स्ट्रक्चर और आपके दावा की जा सकने वाली कटौतियों पर निर्भर करता है। अगर आपको ज्यादा कटौतियां नहीं मिलतीं, तो नई व्यवस्था की कम कर दरें आपके लिए फायदेमंद हो सकती हैं। अगर आपको होम लोन ब्याज, HRA या निवेश जैसी बड़ी कटौतियां मिलती हैं, तो पुरानी व्यवस्था बेहतर काम कर सकती है।
अब समय सीमा 15 सितंबर, 2025 तक बढ़ा दी गई है। इसलिए करदाताओं के पास दोनों विकल्पों की समीक्षा करने और दाखिल करने से पहले सोच-समझकर चुनने के लिए ज्यादा समय है।
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