31 जुलाई आने में अब बस 6 दिन बचे हैं और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की डेडलाइन में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। 25 जुलाई तक की स्थिति के मुताबिक, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने तारीख बढ़ाने का कोई ऐलान नहीं किया है। टैक्सपेयर्स की मदद के लिए विभाग का हेल्पडेस्क आज सुबह 8:00 बजे से 31 जुलाई की रात 11:59 बजे तक 24x7 काम करेगा। अगर आप अभी रिटर्न फाइल कर रहे हैं, तो याद रखें कि 30 दिनों के भीतर इसे ई-वेरिफाई (e-verify) करना जरूरी है।
31 जुलाई की डेडलाइन किसके लिए है? यह उन सैलरीड क्लास और नॉन-बिजनेस इंडिविजुअल्स के लिए है जो ITR-1 या ITR-2 भरते हैं। हालांकि, फ्रीलांसरों, प्रोपराइटरों और नॉन-ऑडिट वाले पार्टनर्स के साथ-साथ ज्यादातर ट्रस्टों के पास इस साल 31 अगस्त तक का समय है। वहीं, टैक्स ऑडिट की जरूरत वाले टैक्सपेयर्स के लिए पुरानी लंबी समयसीमा ही लागू रहेगी। इसलिए अफवाहों पर ध्यान न दें और अपनी तय तारीख तक रिटर्न फाइल करने की प्लानिंग करें।

ITR डेडलाइन: 30 दिनों के भीतर करें ई-वेरिफिकेशन
आपका रिटर्न तभी वैलिड माना जाएगा जब आप उसे वेरिफाई करेंगे। फाइल करने की तारीख के अगले दिन से लेकर 30 दिनों के भीतर वेरिफिकेशन पूरा हो जाना चाहिए। आप आधार OTP, नेट बैंकिंग, बैंक अकाउंट इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC), डीमैट या डिजिटल सिग्नेचर के जरिए इसे तुरंत वेरिफाई कर सकते हैं। अगर आप यह डेडलाइन चूक जाते हैं, तो समय पर भरा गया आपका रिटर्न भी 'बिलेटेड' (देरी से भरा हुआ) माना जाएगा।
सही ITR फॉर्म का चुनाव और AIS/TIS का मिलान
रिटर्न भरने से पहले सही फॉर्म चुनना बहुत जरूरी है। ITR-1 उन रेजिडेंट्स के लिए है जिनकी आय सैलरी, एक घर और ब्याज से होती है। अगर आपको कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति से आय है या आप NRI हैं, तो ITR-2 चुनें। बिजनेस या प्रोफेशन से जुड़ी आय के लिए ITR-3 या ITR-4 फॉर्म भरना होगा। फाइलिंग से पहले अपनी डिटेल्स को एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) से जरूर मिला लें और कोई गलती होने पर फीडबैक दें।
e-Pay टैक्स, बैंक प्री-वैलिडेशन और रिफंड की रफ्तार
अगर आपका टैक्स बकाया है, तो e-Pay Tax का इस्तेमाल करें। इसके लिए नेट बैंकिंग, कार्ड, UPI, ओवर-द-काउंटर और RTGS/NEFT जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। ध्यान रहे कि चालान की वैलिडिटी खत्म होने से पहले पैसा बेनेफिशियरी अकाउंट में पहुंच जाना चाहिए। जल्दी रिफंड पाने और EVC की सुविधा के लिए पोर्टल पर अपने बैंक अकाउंट को प्री-वैलिडेट और नॉमिनेट जरूर करें।
| स्थिति | जुर्माना या मतलब |
|---|---|
| डेडलाइन के बाद फाइलिंग | धारा 234F के तहत लेट फीस: ₹5,000; अगर आय ₹5 लाख से कम है तो ₹1,000। |
| बिलेटेड रिटर्न की विंडो | 31 दिसंबर, 2026 तक फाइल कर सकते हैं; बकाया टैक्स पर ब्याज लग सकता है। |
क्या आप वीकेंड पर रिटर्न फाइल करने की सोच रहे हैं? कोशिश करें कि ट्रैफिक कम होने वाले समय (ऑफ-पीक आवर्स) में काम करें, आधार तैयार रखें और रसीद डाउनलोड करना न भूलें। अगर डिजिटल सिग्नेचर (DSC) काम न करे, तो लेटेस्ट emBridge वर्जन इंस्टॉल करें। चालान एक्सपायर होने पर तुरंत नया जेनरेट कर पेमेंट करें। 234F की लेट फीस और 31 दिसंबर की आखिरी तारीख को ध्यान में रखें; डेडलाइन बढ़ने के भरोसे बिल्कुल न बैठें।
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