ओबीसी आरक्षण के लिए 'क्रीमी लेयर' की सीमा मौजूदा सालाना 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी गयी है। एक आधिकारिक आदेश में यह बताया गया है। इसका मतलब है कि ऐसे व्यक्ति जिनकी सकल वार्षिक आय लगातार तीन साल तक आठ लाख रुपये या अधिक होगी उनके बच्चे क्रीमी लेयर श्रेणी में आएंगे और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए उपलब्ध आरक्षण का फायदा लेने के हकदार नहीं होंगे।
लगभग हर पांच साल में हुआ है बदलाव
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अब अन्य पिछड़ी जातियों के बीच क्रीमी लेयर के निर्धारण के लिए आय सीमा छह लाख रुपये से बढ़ाकर आठ लाख रुपये करने का फैसला किया गया है। वर्ष 1993 में इसकी सीमा एक लाख रुपये थी, इसे तीन बार बढ़ाया गया है। वर्ष 2004 में आय सीमा बढाकर 2.5 लाख रुपये, 2008 में 4.5 लाख रुपये और 2013 में छह लाख रुपये की गयी।
OBC आरक्षण की आखिरी समीक्षा 2013 में की गई थी
आपको बता दें कि अब तक 6 लाख रुपए या इससे अधिक सालाना आय वाले ओबीसी परिवार को लाभ पाने वालों की सूची से हटाकर क्रीमी लेयर में रखा गया था। इस आय वर्ग के ओबीसी को किसी तरह का फायदा नहीं दिया जाता है। केंद्र सरकार ने क्रीमी लेयर को फिर से परिभाषित करने की मंशा जाहिर की थी, ताकि इसका फायदा जरुरतमंद और समाज के निचले तबके तक पहुंचाया जा सके। ओबीसी आरक्षण के लिए आखिरी समीक्षा 2013 में की गई थी।
क्रीमी लेयर में आने वाले लोग आरक्षण से हो जाते हैं बाहर
क्रीमी लेयर में आने वाले पिछड़ा वर्ग के लोग आरक्षण के दायरे से बाहर हो जाते हैं। सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण है, बशर्ते परिवार की वार्षिक आय क्रीमी लेयर के दायरे में न आती हो। अभी तक वार्षिक आय छह लाख रुपये तक तक थी, अब यह 8 लाख रुपये हो गई है। जिनकी आय अधिक होती है उन्हें क्रीमी लेयर कहा जाता है और वे आरक्षण के लिए पात्र नहीं होते।
इन राज्यों में पहले से ही वर्गीकरण किया जा चुका है।
देश के नौ राज्यों आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, पुदुचेरी, कर्नाटक, हरियाणा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में पहले ही अन्य पिछड़ा वर्ग का उप वर्गीकरण किया जा चुका है।


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