आज यानी 16 जून को सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2020–21 सीरीज III के निवेशकों के लिए बाहर निकलने (एग्जिट) का एक अहम मौका है। निवेश के पांच साल पूरे होने पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समय से पहले पैसे निकालने यानी प्री-मैच्योर रिडेम्पशन की सुविधा दे रहा है। अब निवेशकों को यह तय करना होगा कि वे अभी मुनाफा लेकर निकलें या मैच्योरिटी तक इंतजार करें। आपका यह फैसला सोने की मौजूदा कीमतों और पैसों की तात्कालिक जरूरत पर निर्भर करता है।
अगर आप इस स्कीम से बाहर निकलना चाहते हैं, तो इसके लिए तुरंत अपने बैंक, पोस्ट ऑफिस या ब्रोकर से संपर्क करें। आमतौर पर ब्याज की तारीख के तीन वर्किंग डेज के भीतर पैसा आपके खाते में आ जाता है। ध्यान रखें कि सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के रिकॉर्ड में आपकी बैंक डिटेल्स अपडेटेड हों। अक्सर बैंक अकाउंट नंबर में गलती या इनएक्टिव मैंडेट की वजह से कई रिटेल निवेशकों के पेमेंट में देरी हो जाती है।

SGB 2020–21 सीरीज III पर टैक्स का गणित
बजट 2026 में हुए हालिया बदलावों ने गोल्ड इन्वेस्टमेंट पर टैक्स के नियमों को बदल दिया है। हालांकि, मैच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा अब भी टैक्स-फ्री है, लेकिन समय से पहले बाहर निकलने पर अब नए कैपिटल गेन्स नियमों का पालन करना होगा। टैक्स के लिहाज से 8 साल की पूरी अवधि तक निवेश बनाए रखना ही सबसे फायदेमंद है। अगर आप जल्दी पैसा निकाल रहे हैं, तो टैक्स काटने के बाद मिलने वाले नेट रिटर्न का हिसाब जरूर लगा लें।
| निवेश का प्रकार | 5 साल का रिटर्न (अनुमानित) | 10 साल का रिटर्न (अनुमानित) | 15 साल का रिटर्न (अनुमानित) |
|---|---|---|---|
| सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) | 11.5% | 12.2% | 12.8% |
| फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) | 7.1% | 7.4% | 7.2% |
SGB से मिले पैसों को कहां करें दोबारा निवेश?
अगर आप बॉन्ड से बाहर निकल रहे हैं, तो बेहतर लिक्विडिटी के लिए गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) भी स्टॉक एक्सचेंज के जरिए सोना रखने का एक आधुनिक तरीका है। वहीं, जो लोग स्थिर आय चाहते हैं, उनके लिए डेट म्यूचुअल फंड (MF) एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। आप अपने रिस्क और निवेश के लक्ष्य के हिसाब से इनमें से कोई भी विकल्प चुन सकते हैं।
अपने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को 2028 तक बनाए रखने में ही सबसे ज्यादा फायदा है, क्योंकि तब तक सोने की कीमतों में अच्छी बढ़त का लाभ मिल सकता है। साथ ही, हर साल मिलने वाला 2.5% का अतिरिक्त ब्याज इसे फिजिकल गोल्ड से बेहतर बनाता है। निवेशकों को तभी बाहर निकलना चाहिए जब उन्हें पैसों की सख्त जरूरत हो या वे अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना चाहते हों। भारतीय परिवारों के लिए लंबी अवधि का निवेश ही वेल्थ क्रिएशन का सबसे अच्छा जरिया साबित होता है।
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