इस हफ्ते कई IPO के रिफंड लोगों के बैंक खातों में आने वाले हैं। ऐसे में, बहुत से निवेशक अपने पैसे को 2 से 4 दिनों के लिए किसी सुरक्षित जगह पर 'पार्क' (जमा) करना चाहते हैं। सेबी (SEBI) के T+3 लिस्टिंग नियम के तहत, जिन लोगों को शेयर अलॉट नहीं हुए हैं, उनके पैसे T+2 दिन (आमतौर पर शाम 4 बजे तक) अनब्लॉक हो जाते हैं। इससे रिटेल निवेशकों के पास दोबारा निवेश करने के लिए समय काफी कम बचता है। इसलिए, सिर्फ ज्यादा रिटर्न के चक्कर में न पड़ें, बल्कि इस बात पर ध्यान दें कि पैसा कितनी जल्दी काम पर लग सकता है।
अब UPI ASBA (Application Supported by Blocked Amount) के जरिए 5 लाख रुपये तक के मैंडेट की मंजूरी है। सेविंग्स अकाउंट में पैसा जमा होते ही उसी दिन से ब्याज मिलना शुरू हो जाता है। वहीं, डेट म्यूचुअल फंड (Debt Mutual Funds) में ब्याज या रिटर्न तभी से मिलना शुरू होता है, जब कट-ऑफ टाइम से पहले पैसा फंड हाउस के पास पहुंच जाए और आपको उस दिन की NAV मिल जाए। इसलिए, सही समय पर निवेश करना बेहद जरूरी है।

ओवरनाइट फंड्स बनाम लिक्विड फंड्स बनाम स्वीप FD बनाम सेविंग्स अकाउंट
ओवरनाइट फंड्स बहुत कम क्रेडिट रिस्क के साथ शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों के हिसाब से रिटर्न देते हैं। हाल ही में इनके एक महीने का रिटर्न करीब 0.4% रहा है, जो सालाना आधार पर लगभग 4.8% बैठता है। वहीं, लिक्विड फंड्स ने एक महीने में औसतन 0.5% का रिटर्न दिया है, लेकिन अगर आप 7 दिनों के भीतर पैसा निकालते हैं, तो इस पर ग्रेडेड एग्जिट लोड (निकासी शुल्क) लगता है। हालांकि, कई लिक्विड स्कीम्स में हर दिन 50,000 रुपये या कुल रकम का 90% तक तुरंत निकालने (इंस्टेंट रिडेम्पशन) की सुविधा मिलती है।
| विकल्प | अनुमानित दर | पैसे तक पहुंच | जरूरी बात |
|---|---|---|---|
| सेविंग्स अकाउंट | ~2.5%–6.5% | T+0 | हर बैंक की दरें अलग-अलग |
| ओवरनाइट फंड | ~4.5%–5% | T+1 दिन में निकासी | अलॉटमेंट कट-ऑफ टाइम पर निर्भर |
| लिक्विड फंड | ~6% | T+1; 50 हजार तक तुरंत | 1 से 6 दिनों के भीतर एग्जिट लोड |
| स्वीप FD | बैंक स्लैब के अनुसार | T+0 स्वीप-इन | 7 दिन से कम पर कोई ब्याज नहीं |
2 से 4 दिनों के लिए निवेश करने का सही तरीका: लिक्विड या ओवरनाइट फंड के कट-ऑफ टाइम से पहले निवेश करें ताकि पैसा एएमसी (AMC) के पास पहुंच जाए और आपको उसी दिन की NAV मिल सके। पैसा निकालते समय ध्यान रखें कि फंड T+1 दिन में खाते में आएगा। तुरंत निकासी (इंस्टेंट रिडेम्पशन) का इस्तेमाल सिर्फ छोटी और जरूरी जरूरतों के लिए ही करें। अगर आप स्वीप या ऑटो-FD का विकल्प चुन रहे हैं, तो इसे छोटे-छोटे हिस्सों में सेट करें ताकि जरूरत पड़ने पर पूरी FD तोड़ने का नुकसान न हो। कई बैंक समय से पहले FD तोड़ने पर 0.5% से 1% तक का जुर्माना वसूलते हैं।
| क्विक कैलकुलेटर (₹1,00,000 पर, टैक्स से पहले) | 2 दिन | 3 दिन | 5 दिन |
|---|---|---|---|
| सेविंग्स अकाउंट (2.5%) | ₹14 | ₹21 | ₹34 |
| ओवरनाइट फंड (4.8%) | ₹26 | ₹39 | ₹66 |
| लिक्विड फंड (6% नेट ऑफ लोड) | ₹27 | ₹43 | ₹77 |
| स्वीप FD | ₹0 | ₹0 | ₹0 |
जोखिम और टैक्स का गणित: ओवरनाइट और लिक्विड फंड्स 91 दिनों तक की मैच्योरिटी वाले बेहतरीन क्वालिटी के इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं, लेकिन मार्क-टू-मार्केट के कारण इनकी NAV में थोड़ा उतार-चढ़ाव हो सकता है। 1 अप्रैल, 2023 या उसके बाद खरीदे गए म्यूचुअल फंड यूनिट्स से होने वाले मुनाफे को शॉर्ट-टर्म गेन माना जाता है और इस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। बैंक से मिलने वाले ब्याज पर भी आपके स्लैब के अनुसार ही टैक्स और टीडीएस (TDS) के नियम लागू होते हैं। आखिरी समय की भागदौड़ और कट-ऑफ छूटने से बचने के लिए अपने जरूरी दस्तावेज मोबाइल ऐप्स पर तैयार रखें।


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