भारत के जुलाई CPI यानी खुदरा महंगाई के आंकड़े आज, 12 अगस्त 2026 को शाम 4 बजे जारी होंगे। पहले ये आंकड़े शाम 5:30 बजे आते थे, लेकिन MoSPI ने 2024 में समय बदलकर 4 बजे कर दिया था।
इन आंकड़ों पर बाजार की खास नजर रहेगी, क्योंकि Headline और Core Inflation के साथ Food और Fuel Inflation भी ब्याज दरों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। RBI का CPI लक्ष्य 4% है, जिसकी सीमा 2-6% है। महंगाई में नरमी आती है तो Rate Cut की उम्मीद बढ़ सकती है, जबकि महंगाई बढ़ने पर कटौती टल सकती है।

India CPI: कैसे समझें महंगाई के इन आंकड़ों को?
हेडलाइन महंगाई में पूरी बास्केट (सभी चीजें) शामिल होती है, जबकि कोर महंगाई में खाने-पीने की चीजों (फूड) और ईंधन (फ्यूल) को शामिल नहीं किया जाता। महंगाई के आंकड़ों में फूड का वेटेज (हिस्सा) काफी ज्यादा होता है, इसलिए बारिश या सप्लाई में रुकावट आने पर हेडलाइन महंगाई तेजी से ऊपर-नीचे होती है। वहीं, फ्यूल और ट्रांसपोर्ट पर कच्चे तेल की कीमतों और टैक्स का सीधा असर पड़ता है, जिससे इसमें उतार-चढ़ाव बना रहता है। अगर कोर महंगाई स्थिर है, तो इसका मतलब है कि बाजार में मांग का दबाव कम हो रहा है। महंगाई की सही रफ्तार को समझने के लिए महीने-दर-महीने (MoM) के सीजनली एडजस्टेड आंकड़ों को देखना बेहतर होता है।
EMI, FD रेट्स, SIP और स्मॉल सेविंग्स पर क्या होगा असर?
रेपो रेट से जुड़े होम लोन और MSME लोन की दरें हर तीन महीने में कम से कम एक बार रीसेट होती हैं। वहीं, MCLR से जुड़े लोन की दरें केवल कॉन्ट्रैक्ट रीसेट की तारीख पर ही बदलती हैं, जो आमतौर पर सालाना होती है। इन तारीखों पर पॉलिसी बदलावों का असर दिखने के बाद ही आपकी EMI बदलती है। बचत करने वालों के लिए, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरें और ट्रेजरी बिल (T-Bill) की यील्ड सीधे तौर पर आरबीआई के फैसलों पर निर्भर करती हैं। स्मॉल सेविंग्स (छोटी बचत योजनाओं) की ब्याज दरों की हर तिमाही समीक्षा की जाती है, जो सरकारी बॉन्ड (G-Sec) की यील्ड से जुड़ी होती हैं। ध्यान रहे कि सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) तय करने के लिए CPI-IW (इंडस्ट्रियल वर्कर्स) के आंकड़ों का इस्तेमाल होता है, न कि हेडलाइन CPI-कंबाइंड का।
| सिनेरियो (Scenario) | 5 साल | 10 साल | 15 साल |
|---|---|---|---|
| 7% ब्याज पर FD (₹1,00,000, टैक्स से पहले) | ₹1,40,255 | ₹1,96,715 | ₹2,75,903 |
| 5% CPI पर वास्तविक फंड (लगभग) | ₹1,09,894 | ₹1,20,766 | ₹1,32,714 |
शेयर बाजार की बात करें तो निवेशकों के लिए नॉमिनल रिटर्न से ज्यादा 'रियल रिटर्न' (महंगाई घटाकर मिलने वाला फायदा) मायने रखता है, खासकर SIP के मामले में। कोर महंगाई में नरमी आने से बैंक, ऑटो और रियल एस्टेट जैसे सेक्टर्स पर दबाव कम होता है। आंकड़े जारी होने से ठीक पहले जल्दबाजी में कोई ट्रेड करने या लोन रीफाइनेंस कराने का फैसला न लें। अपने लोन के रीसेट क्लॉज को ध्यान से पढ़ें और रीसेट की सही तारीख नोट कर लें। बचत करने वालों के लिए सलाह है कि वे अलग-अलग अवधि की FD (FD लैडरिंग) कराएं, लिक्विड फंड्स में कुछ पैसा रखें और सही समय का इंतजार करें। दोपहर 4:00 बजे आधिकारिक आंकड़े आने के बाद ही अपनी निवेश रणनीति की समीक्षा करें।
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