सोना खरीदने से पहले कुछ चीजें जानना बहुत ज़रूरी है, शुद्धता और होलमार्क से लेकर कीमत और खराबी तक। हम आपको बताते हैं कि होलमार्क गोल्ड और केडीएम गोल्ड में क्या अंतर है
सोना खरीदने से पहले कुछ चीजें जानना बहुत ज़रूरी है, शुद्धता और होलमार्क से लेकर कीमत और खराबी तक। हम आपको बताते हैं कि होलमार्क गोल्ड और केडीएम गोल्ड में क्या अंतर है...
क्या है केडीएम गोल्ड
केडीएम गोल्ड के बारे में जानने के लिए हमें ज्वेलरी बनाने की क्रिया जाननी होगी। ज्वेलरी बनाते समय सोने की झिलाई या टंकाई की जाती है क्यों कि सोना मुलायम धातु है। टंकाई सोने को मिश्रित करना है इसमें अन्य धातु को सोने से कम पॉइंट पर पिघलाकर इसे सोने में मिश्रित किया जाता है और दोनों को मिलाकर सोने के भाव तय होते हैं।
पहले और अब क्या है अनुपात
एक लंबे समय से सोने और तांबे का अनुपात क्रमशः 60% से 40% रखा जाता रहा है जो कि मजबूत रहता है। फिर भी, इसकी शुद्धता केवल 60% ही रहती है, जब ज्वेलरी को पिघलाया जाता है तो शुद्धता का स्तर कम ही पाया जाता है। तो यदि इस तकनीक के साथ यदि 22 कैरेट की ज्वेलरी बनाई जाती है तो उसमें शुद्धता केवल 20 कैरेट ही रहती है।
कैडमियम का मिश्रण
इससे निपटने के लिए तांबे की बजाय इसमें कैडमियम मिलाया जाने लगा जिसे कम पॉइंट पर पिघलाया और तरल किया जाता है। इसका फायदा यह है कि इसमें सोने और कैडमियम को क्रमशः 92% व 8% मिलाया जा सकता है, जिससे शुद्धता भी 92% रहती है। कैडमियम का इस्तेमाल कर बनाया गया सोना केडीएम गोल्ड कहलाता है, इसे कई जगह केडियम भी कहा जाता है। इसे पिघलाने पर शुद्धता उतनी ही रहती है।
केडीएम गोल्ड स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है
स्वास्थ्य के लिए नुकसानकारी होने के कारण यह ज्वेलरी बनाने वाले और पहनने वाले दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए भारतीय मानक ब्यूरो या बीआईएस ने इसे प्रतिबंधित कर दिया है। इसलिए अब ज़िंक और अन्य धातुओं के साथ झिलाई की जाती है। इससे स्वास्थ्य को नुकसान नहीं होता है। इससे भी स्किन एलर्जी जैसी चीजें होती हैं इसलिए इस पर भी प्रतिबंध हो रहा है।
होलमार्क गोल्ड
सोने पर होलमार्क भारतीय मानक ब्यूरो या बीआईएस का एक सर्टिफिकेट है। यह सर्टिफिकेशन इस बात का है कि बेचने वाले ने जो क्वालिटी बताई है यह उस क्वालिटी का है। बीआईएस अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस बात की जांच करता है कि सोना राष्ट्रीय प्यूरिटी और फिटनेस मानकों पर खरा उतर रहा है या नहीं। इस जांच देश भर में फैले बीआईएस के परख केन्द्रों पर की जाती है। साफ तौर पर, केडीएम और होलमार्क में पिघलाने के लिए अंतर इस्तेमाल की गई धातु और शुद्धता का है।
होलमार्क सोने में क्या देखें?
होलमार्क सोने पर कई जानकारियां गढ़ी होती है जैसे बीआईएस का लोगो, रिटेलर का लोगो, परख केंद्र का लोगो और सेर्टिफिकेट का वर्ष आदि। होलमार्क गोल्ड 23 कैरेट, 22 कैरेट, 21 कैरेट और 18 कैरेट में मिलता है। इसकी शुद्धता धातु में मिली सोने की मात्रा है। 24 कैरेट गोल्ड 100% शुद्ध होता है। इसलिए जब भी सोना खरीदें बीआईएस सर्टिफिकेट होलमार्क गोल्ड ही खरीदें।
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