पिछले कई महीनों से देश में आर्थिक मंदी का दौर है। आर्थिक मोर्चे से फिर निराश करने वाली खबर सामने आयी है।
नई दिल्ली: पिछले कई महीनों से देश में आर्थिक मंदी का दौर है। आर्थिक मोर्चे से फिर निराश करने वाली खबर सामने आयी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने हाल ही में पेश किए बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत का मौजूदा आर्थिक माहौल उनके पूर्व अनुमान से भी कमजोर है। आईएमएफ ने कहा कि भारत को जल्द ही महत्वाकांक्षी संरचनात्मक और वित्तीय सुधार करने की जरूरत है, जिससे कि मध्यावधि में राजकोष बढ़े। इसके लिए भारत को एक रणनीति के तहत काम करना होगा।

मालूम हो कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को लोकसभा में बजट पेश किया था। केंद्र सरकार ने इस बजट को बढ़िया बताते हुए निकट भविष्य में बड़े सुधार की आशा व्यक्त की थी। बता दें कि वहीं अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रवक्ता गेरी राइस ने कहा कि भारत का मौजूदा आर्थिक माहौल हमारे पूर्वानुमान की तुलना में कमजोर है। राइस ने कहा, कि भारत की अर्थव्यवस्था हमारे पुर्वानुमान की तुलना में कमजोर है। भारत को जल्द ही महत्वाकांक्षी संरचनात्मक और वित्तीय सुधार करने की जरूरत है, जिससे कि मध्यावधि में राजकोष बढ़े। इसके लिए भारत को एक रणनीति के तहत काम करना होगा। SBI : चोरी होने पर ऐसे ब्लॉक कराएं ATM कार्ड, आसान है तरीका ये भी पढ़ें
जैसा कि सरकार टैक्स के जरिए राजस्व कमाती है। इसके साथ ही खर्च भी करती है। जब सरकार का खर्च, राजस्व से बढ़ जाता है, तो उसे बाजार से अतिरिक्त राशि उधार लेना पड़ता है। सरकार की कुल कमाई और खर्च के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। यानी कि सरकार जो राशि उधार लेगी उसे ही राजकोषीय घाटा कहेंगे। ऐसे में जाहिर है आईएमएफ ने जनवरी महीने में भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़त के अनुमान को काफी घटा दिया है। आईएमएफ ने कहा है कि वित्त वर्ष 2019-20 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बढ़त दर महज 4.8 फीसदी रहेगी। बता दें कि आईएमएफ ने कहा कि भारत और इसके जैसे अन्य उभरते देशों में सुस्ती की वजह दुनिया के ग्रोथ अनुमान को उसे घटाना पड़ा है।


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