15 जून को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से निवेशकों का उत्साह बढ़ गया है। सुबह के सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों ही इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में कई रिटेल निवेशक इस उलझन में हैं कि अपनी नई पूंजी को आज कहां और कैसे लगाएं। आपको SIP चुनना चाहिए या एकमुश्त (Lumpsum) निवेश, यह पूरी तरह आपके रिस्क प्रोफाइल पर निर्भर करता है।
ट्रेडिंग स्क्रीन पर भले ही आज हरियाली दिख रही हो, लेकिन बाजार का उतार-चढ़ाव (volatility) अभी भी चिंता का विषय है। इक्विटी में पैसा लगाने से पहले निवेशकों को अपनी निवेश राशि (ticket size) पर गौर करना चाहिए। अगर रकम छोटी है, तो रेगुलर SIP सबसे अच्छा विकल्प है क्योंकि यह खरीद की लागत को औसत (average) करने में मदद करती है। वहीं, बड़ी रकम के लिए सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) एक बेहतर और संतुलित तरीका है। इससे आप बाजार के बिल्कुल ऊपरी स्तर (peak) पर खरीदारी करने के जोखिम से बच जाते हैं।

भारतीय निवेशकों के लिए SIP और STP में से क्या है बेहतर?
STP के जरिए आप अपनी पूंजी को पहले लिक्विड फंड में रख सकते हैं। इसके बाद, यह पैसा कई महीनों तक छोटी-छोटी किस्तों में इक्विटी फंड में ट्रांसफर होता रहता है। इस तरीके से आपको सेविंग्स अकाउंट के मुकाबले बेहतर ब्याज भी मिलता है। भारत में लिक्विड फंड्स आमतौर पर रिडेम्पशन के लिए T+1 सेटलमेंट साइकिल का पालन करते हैं। यह रणनीति आपको शॉर्ट टर्म में बाजार की अचानक गिरावट से बचाने में मदद करती है।
| निवेश की खासियत | SIP तरीका | STP तरीका | एकमुश्त (Lumpsum) निवेश |
|---|---|---|---|
| सही पूंजी | छोटी मासिक बचत | बड़ी खाली पड़ी रकम | बाजार की बड़ी गिरावट |
| जोखिम कम करना | ज्यादा | ज्यादा | कम |
| मार्केट टाइमिंग | जरूरत नहीं | जरूरत नहीं | बहुत जरूरी |
बाजार की इस तेजी में FOMO और टैक्स का ऐसे रखें ख्याल
अक्सर बाजार की तेज रैली को देखकर निवेशकों में 'पीछे छूट जाने का डर' (FOMO) पैदा हो जाता है, जिससे वे जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। निवेश करते समय टैक्स को ध्यान में रखते हुए इक्विटी रिटर्न की तुलना फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जरूर करें। इक्विटी से होने वाले मुनाफे पर शॉर्ट टर्म (STCG) या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं, FD से मिलने वाला ब्याज आपकी कुल आय में जुड़ता है और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स लगता है। पोर्टफोलियो में डेट और इक्विटी का सही तालमेल इसे स्थिर बनाए रखता है।
निवेश की शुरुआत करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके पास कम से कम छह महीने का इमरजेंसी फंड हो। जब बाजार अपने हाई लेवल पर हो, तो सिर्फ रिटर्न के पीछे भागने के बजाय अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करें। अनुशासन बनाए रखने से आप बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान भावनाओं में बहकर गलतियां करने से बचेंगे। लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए निरंतरता (consistency) ही सबसे बड़ी कुंजी है। यही फोकस आपको बाजार की रोजमर्रा की हलचल के बीच शांत रहने में मदद करेगा।


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