गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी है। इस दिन बाजार में बिड-आस्क स्प्रेड चौड़ा हो जाता है और उतार-चढ़ाव काफी तेज हो जाता है। ट्रेडिंग के आखिरी एक घंटे में हेजिंग एडजस्टमेंट और लिक्विडिटी में बदलाव के कारण अक्सर अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है। नए ट्रेडर्स को इस दिन किसी भविष्यवाणी के भरोसे रहने के बजाय सही प्रोसेस और नियम फॉलो करने की जरूरत है। आइए जानते हैं ऐसे 5 ट्रैप्स (गलतियों) के बारे में जो एक्सपायरी के दिन अक्सर आपका पैसा डुबो देते हैं, और साथ ही जानें वे आसान स्टेप्स जिन्हें आप दोपहर 2:30 बजे से पहले अपना सकते हैं।
पहला ट्रैप है - मार्जिन का गलत अंदाजा लगाना। पीक-मार्जिन फ्रेमवर्क लागू होने के बाद अब ब्रोकर्स के लिए F&O का पूरा 100% मार्जिन वसूलना अनिवार्य है, यानी पुराना इंट्राडे लेवरेज अब खत्म हो चुका है। इसलिए किसी उम्मीद के बजाय फुल कैरी-फॉरवर्ड मार्जिन को ध्यान में रखकर ही ट्रेड प्लान करें। दूसरा ट्रैप है - बहुत दूर की आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) ऑप्शंस को शॉर्ट करना। एक्सचेंज ऐसी डीप OTM शॉर्ट पोजीशंस पर एक्स्ट्रा सर्विलांस मार्जिन लगा देते हैं, जिससे आपका कैपिटल अचानक ब्लॉक हो सकता है।

निफ्टी वीकली एक्सपायरी: सेटलमेंट, STT और डिलीवरी से जुड़े खतरे
तीसरा ट्रैप है - अनजाने में स्टॉक F&O पोजीशन को एक्सपायरी के दिन तक होल्ड करना। याद रखें कि स्टॉक डेरिवेटिव्स का सेटलमेंट अनिवार्य रूप से फिजिकल डिलीवरी के जरिए होता है, जबकि इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस कैश में सेटल किए जाते हैं। 1 अप्रैल 2026 से, यदि कोई ऑप्शन एक्सरसाइज होता है तो बायर्स के लिए इंट्रिंसिक वैल्यू पर STT लागू होगा। इसके अलावा, फिजिकल सेटलमेंट वाले स्टॉक डेरिवेटिव्स पर कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू के हिसाब से इक्विटी-डिलीवरी STT भी लगता है।
निफ्टी वीकली एक्सपायरी: ब्रोकर कट-ऑफ और ऑर्डर हाइजीन
चौथा ट्रैप है - ऑटो स्क्वायर-ऑफ विंडो की अनदेखी करना। ब्रोकर्स दोपहर लगभग 3:15 बजे से 3:26 बजे के बीच MIS F&O पोजीशंस को खुद बंद (स्क्वायर-ऑफ) करना शुरू कर देते हैं और इसके लिए प्रति ऑर्डर फीस भी ले सकते हैं। इससे बचने के लिए स्टॉप-लॉस ऑर्डर पहले ही लगा लें, बाजार बंद होने के वक्त जल्दबाजी में एग्जिट करने से बचें और आज ही अपने ऐप का कट-ऑफ टाइम चेक कर लें। इससे आप स्लिपेज और अचानक पोजीशन कैरी-फॉरवर्ड होने जैसी मुश्किलों से बच जाएंगे।
| उदाहरण: ₹1 लाख पर कंपाउंडिंग का असर | FD 7% | मार्केट-लिंक्ड 10% |
|---|---|---|
| 5 साल | ₹1,40,255 | ₹1,61,051 |
| 10 साल | ₹1,96,715 | ₹2,59,374 |
| 15 साल | ₹2,75,800 | ₹4,17,725 |
पांचवां ट्रैप है - सही रिकॉर्ड या डॉक्यूमेंटेशन न रखना। रोज कॉन्ट्रैक्ट नोट्स, मार्जिन स्टेटमेंट्स और P&L डाउनलोड करें, और अपनी ट्रेड्स को उनके कारणों व लगने वाले टैक्स के साथ टैग करें। हर ऑर्डर के लिए एक सिंपल चेकलिस्ट रखें: एंट्री पॉइंट, स्टॉप-लॉस का प्रकार, एग्जिट का समय और ज्यादा से ज्यादा होने वाला संभावित नुकसान। एक्सपायरी के दिन ब्रोकर के कट-ऑफ टाइम से काफी पहले ही अपना एग्जिट प्लान तय कर लें। सबसे पहले अपनी पूंजी बचाएं; किसी मौके के हाथ से छूट जाने का मलाल, सेटलमेंट में मिलने वाले अनचाहे झटकों से कहीं बेहतर है।
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