कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से आज सेंसेक्स में आई भारी गिरावट ने भारतीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, बाजार का यह उतार-चढ़ाव डराता जरूर है, लेकिन यह अपने पोर्टफोलियो को सही करने का एक शानदार मौका भी है। अपनी जरूरतों को समझें और जल्द से जल्द तय करें कि आपके लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) सही है या म्यूचुअल फंड।
अगर आपको एक साल के भीतर पैसों की जरूरत है, तो सुरक्षा आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। बैंक FD में गारंटीड रिटर्न मिलता है, लेकिन इमरजेंसी के लिए लिक्विड फंड्स (Liquid Funds) ज्यादा बेहतर हैं क्योंकि इनसे पैसा निकालना आसान है। वहीं, आर्बिट्राज फंड्स (Arbitrage Funds) और भी अच्छे विकल्प हैं क्योंकि इनमें जोखिम बहुत कम है और टैक्स का फायदा इक्विटी जैसा मिलता है। बाजार की इस उठापटक के बीच ये विकल्प आपकी जमा पूंजी को सुरक्षित रखने में मदद करेंगे।

सेंसेक्स में गिरावट: FD, डेट फंड या SIP, निवेश के लिए क्या है बेस्ट?
एक से तीन साल के निवेश के लिए ग्रोथ और टैक्स बचत के बीच तालमेल बिठाना जरूरी है। ऊंचे टैक्स स्लैब में आने वाले निवेशकों के लिए शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फंड अक्सर बैंक FD से बेहतर साबित होते हैं। हालांकि, टैक्स नियमों में बदलाव के बाद अब डेट फंड से होने वाली कमाई पर आपके रेगुलर इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इसलिए, हर समझदार निवेशक के लिए टैक्स कटने के बाद मिलने वाले असल मुनाफे (post-tax return) का हिसाब लगाना बेहद जरूरी है।
| एसेट क्लास | सही समय सीमा | जोखिम का स्तर |
|---|---|---|
| बैंक FD | 6 महीने से 3 साल | कम जोखिम |
| लिक्विड फंड्स | 1 दिन से 3 महीने | कम जोखिम |
| शॉर्ट-टर्म डेट | 1 से 3 साल | मध्यम जोखिम |
| इक्विटी SIP | 5 साल से ज्यादा | ज्यादा जोखिम |
लंबी अवधि के निवेशकों को बाजार की इस गिरावट का इस्तेमाल अपनी SIP को और मजबूत करने के लिए करना चाहिए। गिरावट के समय अनुशासन बनाए रखने से आपको कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स खरीदने का मौका मिलता है। एकमुश्त (Lumpsum) निवेश में सही समय का अंदाजा लगाना जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन लगातार चलने वाली SIP सालों तक आपकी निवेश लागत को औसत (average) कर देती है। बाजार के शोर को नजरअंदाज कर अपने भविष्य के लक्ष्यों पर ध्यान देना ही बड़ी वेल्थ बनाने का सही तरीका है।
आखिर में, आपका फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि आपको पैसों की जरूरत कब है और आप कितना जोखिम उठा सकते हैं। बाजार की लाल स्क्रीन देखकर घबराएं नहीं और जल्दबाजी में बिकवाली का फैसला न लें। फिलहाल ऊंची ब्याज दरों की वजह से FD आकर्षक है, लेकिन महंगाई को मात देने के लिए इक्विटी ही सबसे अच्छा जरिया है। अभी अपने एसेट एलोकेशन की समीक्षा करें ताकि आपका फाइनेंशियल प्लान ग्लोबल मार्केट के झटकों को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार रहे।
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