आज 6 अगस्त है और आपके फोन पर भी 'प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन' के धड़ाधड़ नोटिफिकेशन आ रहे होंगे। लेकिन 'Accept' बटन दबाने से पहले, सिर्फ ऊपर-ऊपर दिखने वाले ब्याज को न देखें, बल्कि असली सालाना ब्याज दर यानी 'एनुअल परसेंटेज रेट' (True APR) की तुलना करें। इस असली APR में प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी (GST) और लोन के साथ मिलने वाला इंश्योरेंस भी शामिल होता है। रेगुलेटर्स ने भी अब बैंकों और लोन कंपनियों के लिए यह जरूरी कर दिया है कि वे ग्राहकों को 'की फैक्ट स्टेटमेंट' (KFS) दिखाएं, जिसमें सारी फीस मिलाकर बनने वाला असली APR साफ-साफ लिखा हो।
आइए इसका गणित आसान भाषा में समझते हैं। लोन प्रोसेसिंग चार्ज पर जीएसटी लगता है, यानी अगर प्रोसेसिंग फीस "2%" बताई गई है, तो असल में वह 2% फीस + 18% जीएसटी होगी। आरबीआई (RBI) के डिजिटल लेंडिंग नियमों के मुताबिक, सभी बैंकों और ऐप्स के लिए एक जैसा 'की फैक्ट स्टेटमेंट' (KFS) देना जरूरी है, जिसमें APR लिखा होता है। इससे आप अलग-अलग बैंकों के लोन की सही तुलना कर सकते हैं। आगे बढ़ने से पहले अपने बैंक के ऑफिशियल ऐप में जाकर इस डॉक्यूमेंट को जरूर चेक करें और किसी भी प्रमोशनल एसएमएस (SMS) में आए लिंक पर क्लिक करने से बचें।

प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन: असली APR और फीस की तुलना कैसे करें?
इसे एक उदाहरण से समझते हैं: मान लीजिए आपने 14% सालाना ब्याज दर पर 24 महीने के लिए ₹2,00,000 का लोन लिया। इसकी सामान्य ईएमआई (EMI) करीब ₹9,610 बनेगी, यानी पूरे 2 साल में आप कुल ₹2,30,645 चुकाएंगे। अब इसमें 2% प्रोसेसिंग फीस और उस पर 18% जीएसटी (कुल ₹4,720) और ₹1,000 का इंश्योरेंस जोड़ लें। ऐसे में आपके खाते में सिर्फ ₹1,94,280 ही आएंगे, लेकिन आपको ब्याज पूरे ₹2,00,000 पर देना होगा। इस तरह आपका असली सालाना खर्च (All-in APR) 14% से बढ़कर करीब 17.7% हो जाता है। फीस जितनी ज्यादा होगी, यह अंतर उतना ही बढ़ता जाएगा।
| पैमाना | वैल्यू (उदाहरण) |
|---|---|
| लोन की रकम | ₹2,00,000 |
| अवधि | 24 महीने |
| सालाना ब्याज दर (Nominal) | 14% |
| प्रोसेसिंग फीस | 2% = ₹4,000 |
| फीस पर जीएसटी (GST) | 18% = ₹720 |
| इंश्योरेंस (यदि साथ में है) | ₹1,000 |
| खाते में आई रकम (Net Disbursed) | ₹1,94,280 |
| अनुमानित ईएमआई (EMI) | ₹9,610 |
| कुल भुगतान | ₹2,30,645 |
| कुल सालाना खर्च (All-in APR) | ~17.7% |
फोरक्लोजर नियम, क्रेडिट स्कोर पर असर और EMI की लिमिट
पर्सनल लोन में अक्सर फोरक्लोजर (समय से पहले लोन बंद करना) या पार्ट-पेमेंट चार्ज और लॉक-इन पीरियड होता है। बैंक आमतौर पर बकाया मूलधन (outstanding principal) पर 2 से 4% या 3% तक का चार्ज वसूलते हैं, इसलिए KFS को ध्यान से पढ़ना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, आजकल 'बाय नाउ पे लेटर' (BNPL) स्कीम्स की जानकारी भी क्रेडिट ब्यूरो को दी जाती है। अगर आप इनकी पेमेंट में चूक करते हैं, तो आम लोन की तरह ही आपका क्रेडिट स्कोर भी खराब हो सकता है। बैंक लोन देते समय आपके FOIR (फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो) पर भी नजर रखते हैं, ताकि आपकी कुल ईएमआई आपकी नेट इनकम के 50-55% से ज्यादा न हो।
फर्जीवाड़े से बचने के लिए सेफ्टी चेकलिस्ट: ऐसे करें प्री-अप्रूव्ड ऑफर्स की जांच
हमेशा अपने बैंक के ऑफिशियल ऐप को खोलकर ही ऑफर, KFS और APR की पुष्टि करें। यह जरूर जांच लें कि लोन देने वाली संस्था आरबीआई (RBI) से रजिस्टर्ड है या नहीं। अगर कोई शक हो, तो संदिग्ध ऐप्स या लिंक्स की शिकायत 'सचेत' (Sachet) पोर्टल पर करें। कभी भी अपना ओटीपी (OTP) किसी के साथ शेयर न करें और मैसेज में आए पेमेंट-रिक्वेस्ट लिंक पर क्लिक न करें। आरबीआई और सरकारी एडवायजरी में लोन स्कैम से बचने के लिए बार-बार इन बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
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