5 जून को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। इस फैसले का सीधा मतलब है कि करोड़ों भारतीय कर्जदारों के लिए लोन की दरें फिलहाल ऊंची ही बनी रहेंगी। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो होम, ऑटो या पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) भर रहे हैं। अपने कर्ज को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए इन बदलावों की जानकारी रखना बेहद जरूरी है।
एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) से जुड़े मौजूदा लोन पर इसका सीधा असर पड़ता है। रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) स्कीम्स भी बाजार की इन गतिविधियों के हिसाब से तुरंत बदलती हैं। चूंकि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए आपकी मंथली ईएमआई अभी कम नहीं होगी। लंबे समय से ऊंची ब्याज दरों की वजह से कई कर्जदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

5.25% रेपो रेट: आपकी लोन EMI पर क्या होगा असर?
मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) से जुड़े लोन पर बदलाव थोड़ा धीरे दिखता है। ये दरें बैंकों की अपनी आंतरिक लागत पर निर्भर करती हैं। जिन ग्राहकों के लोन पुराने हैं, उन्हें ब्याज चक्र में बदलाव देखने में थोड़ा समय लग सकता है। अपने बैंक की मंथली रेट रिसेट डेट पर नजर रखें, ताकि आप बदलावों को ट्रैक कर सकें।
| लोन का प्रकार | ब्याज दर की रेंज | EMI प्रति 10 लाख (20 साल के लिए) |
|---|---|---|
| होम लोन | 8.50% - 9.50% | 8,678 - 9,321 |
| ऑटो लोन (7 साल) | 9.00% - 11.00% | 16,089 - 17,122 |
| पर्सनल लोन (5 साल) | 11.00% - 15.00% | 21,742 - 23,790 |
रेपो लिंक्ड विकल्प और बैंक चार्ज: स्विच करने से पहले ये जरूर जानें
यह देखें कि क्या बैलेंस ट्रांसफर या टॉप-अप लोन आपकी जरूरतों के लिए सही है। कुछ बैंक इस समय नए ग्राहकों को लुभाने के लिए काफी प्रतिस्पर्धी दरों की पेशकश कर रहे हैं। हालांकि, बैंक बदलने से पहले प्रोसेसिंग फीस और छिपे हुए चार्जेस (hidden charges) की जांच जरूर कर लें। इन छोटे खर्चों को नजरअंदाज न करें, क्योंकि ये आपकी कुल बचत को प्रभावित करते हैं।
लंबे समय में ब्याज का बोझ कम करने के लिए 'प्रीपेमेंट' एक कारगर तरीका है। हर साल सिर्फ एक अतिरिक्त ईएमआई चुकाने से आपके लोन की अवधि काफी कम हो सकती है। आने वाले फेस्टिव सीजन में बड़े बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऑफर्स पर नजर रखें। साथ ही, अपना क्रेडिट प्रोफाइल दुरुस्त रखें ताकि आपको बैंक से सबसे अच्छी शर्तें मिल सकें।
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