भारत में आज यानी 3 जून से मॉनेटरी पॉलिसी वाले हफ्ते की शुरुआत हो रही है। रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 3 से 5 जून तक चलेगी और 5 जून को इसके नतीजों का ऐलान होगा। अप्रैल में दरों को स्थिर रखने के बाद फिलहाल रेपो रेट 5.25 फीसदी पर बरकरार है। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बार भी यथास्थिति बनी रह सकती है। इसका मतलब है कि जून में आपकी EMI कम होने के आसार कम ही हैं, हालांकि रिफाइनेंस के विकल्प जल्द खुल सकते हैं।
आखिर तुरंत राहत क्यों नहीं मिलेगी? दरअसल, एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े बैंक लोन की दरें सिर्फ तय 'रीसेट डेट' पर ही बदलती हैं। RBI के नियमों के मुताबिक, ऐसे लोन के लिए कम से कम हर तिमाही में रीसेट होना जरूरी है। यानी ब्याज दरों में बदलाव का फायदा आपको पॉलिसी वाले दिन नहीं, बल्कि आपकी रीसेट डेट पर मिलेगा। इसके अलावा, बैंक किसी खास वजह के बिना अगले तीन साल तक मौजूदा ग्राहकों के लिए 'स्प्रेड' में बदलाव नहीं कर सकते।

RBI पॉलिसी: अगर नहीं बदलीं दरें, तो आपकी EMI पर क्या होगा असर?
अगर MPC दरों में कोई बदलाव नहीं करती है, तो आपकी EMI तभी बदलेगी जब इस महीने आपकी रीसेट डेट होगी। पुराने MCLR लोन आमतौर पर साल में एक बार रीसेट होते हैं, जबकि रेपो-लिंक्ड लोन हर तीन महीने में। अपने सैंक्शन लेटर या बैंकिंग ऐप में जाकर अपना बेंचमार्क, रीसेट की फ्रीक्वेंसी और मौजूदा स्प्रेड जरूर चेक करें। किसी बेहतर बेंचमार्क पर स्विच करने से पहले यह भी देख लें कि क्या कोई कन्वर्जन फीस तो नहीं लग रही।
रिफाइनेंस और बैलेंस ट्रांसफर के लिए जरूरी चेकलिस्ट
क्या आप बैलेंस ट्रांसफर के बारे में सोच रहे हैं? फ्लोटिंग रेट वाले पर्सनल लोन को बिना किसी फोरक्लोजर पेनल्टी के बंद या प्रीपे किया जा सकता है। हालांकि, प्रोसेसिंग फीस, लीगल और वैल्यूएशन चार्ज, CERSAI और स्टैम्प ड्यूटी जैसे खर्चों का बजट जरूर बना लें। कई बार बैंक सीमित समय के लिए फीस माफी के ऑफर भी देते हैं। अलग-अलग बैंकों के बीच अपनी कुल बचत की तुलना करें और हमेशा लिखित और समय सीमा वाले ऑफर ही मांगें।
| ब्याज दर (फ्लोटिंग) | ₹50 लाख पर मंथली EMI (20 साल) | 8.25% के मुकाबले बदलाव |
|---|---|---|
| 8.25% | ₹42,550 | — |
| 8.00% | ₹41,800 | ₹750 कम |
| 7.75% | ₹41,040 | ₹1,510 कम |
प्रोसेसिंग फीस और रीसेट क्लॉज: इन बातों का रखें ध्यान
सिर्फ हेडलाइंस देखकर फैसला न लें, ऊपर दी गई टेबल से बचत का गणित समझें। आंकड़ों से साफ है कि ब्याज दर में मामूली अंतर भी लंबे समय में आपके काफी पैसे बचा सकता है। हमेशा फीस काटने के बाद मिलने वाले 'इफेक्टिव रेट' की तुलना करें। किसी भी दस्तावेज पर साइन करने से पहले बेंचमार्क, स्प्रेड, रीसेट की फ्रीक्वेंसी, कन्वर्जन फीस, प्रोसेसिंग और वैल्यूएशन चार्ज, CERSAI और सरकारी शुल्कों को अच्छी तरह जांच लें।
पॉलिसी के बाद बैंकों के इन कदमों पर रखें नजर
गुरुवार को होने वाले ऐलान के बाद इस बात पर गौर करें कि क्या बड़े बैंक नए ग्राहकों के लिए रेपो-लिंक्ड बेस रेट में बदलाव कर रहे हैं, प्रोसेसिंग फीस माफ कर रहे हैं या टॉप-अप लोन की दरों को आकर्षक बना रहे हैं। अगर दरें नहीं भी बदलतीं, तो बैंकों के बीच कॉम्पिटिशन का फायदा आपको मिल सकता है। 5 से 14 जून के बीच अपने ईमेल, ऐप अलर्ट और बैंक की वेबसाइट चेक करते रहें। इससे पहले कि बैंक अपनी शर्तें बदलें, सही मौका देखकर तुरंत कदम उठाएं।


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