नयी दिल्ली। पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं मे पैसा लगाने वालों के लिए अच्छी खबर है। एक और तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के लिए सरकार ने छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ), नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनसीएस) आदि जैसी योजनाओं पर दिसंबर 2020 में समाप्त होने वाली तिमाही के लिए मौजूदा ब्याज दरें लागू रहेंगी। पिछली तिमाही (जुलाई-सितंबर 2020) में भी पोस्ट ऑफिस की इन योजनाओं पर ब्याज दर नहीं घटायी गयी थी। आइए जानते हैं कितना मिलता रहेगा फायदा।
कितनी ही मौजूदा ब्याज दरें
वित्त मंत्रालय ने 30 सितंबर 2020 को एक सर्कुलर के माध्यम से पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं में कोई बदलाव न किये जाने की जानकारी दी है। सर्कुलर के अनुसार पीपीएफ पर पहले की तरह 7.10 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) पर 7.40 ब्याज दर मिलती रहेगी। इसी तरह पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट पर 5.5 प्रतिशत से 6.7 प्रतिशत तक का ब्याज मिलता रहेगा।
अब कब बदलेंगी ब्याज दरें
पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट स्कीमों पर ब्याज दरों की समीक्षा दिसंबर 2020 के अंत में होगी। तब 2021 की जनवरी-मार्च तिमाही के लिए ब्याज दरों पर फैसला होगा। वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) की विभिन्न छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों पर एक नज़र डालते हैं।
जानिए अलग-अलग योजना पर मिलने वाला ब्याज
बचत जमा पर 4 फीसदी, 1 वर्षीय टाइम डिपॉजिट पर 5.5 फीसदी, 2 वर्षीय टाइम डिपॉजिट पर 5.5 फीसदी, 3 वर्षीय टाइम डिपॉजिट पर 5.5 फीसदी, 5 वर्षीय टाइम डिपॉजिट पर 6.7 फीसदी, 5 वर्षीय रेकरिंग डिपॉजिट पर 5.8 फीसदी, 5 वर्षीय सीनियर सिटिजेन सेविंग स्कीम पर 7.4 फीसदी, 5 वर्षीय मासिक आय खाता पर 6.6 फीसदी, 5 वर्षीय नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट पर 6.8 फीसदी, पीपीएफ पर 7.1 फीसदी, किसान विकास पत्र पर 6.9 फीसदी (124 महीनो में मैच्योर होगा) और सुकन्या समृद्धि योजना पर 7.6 फीसदी ब्याज मिलता रहेगा।
आखिरी बार कब घटा था ब्याज
बता दें कि आखिरी बार अप्रैल-जून 2020 में सरकार की तरफ से छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती की गयी थी। तब 70-140 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई थी। बता दें कि अगर सरकार दूसरी या तीसरी तिमाही में भी इसी तरह से ब्याज दरें घटाती तो पीपीएफ जैसे निवेश उपकरण की ब्याज दर 7 प्रतिशत से नीचे चली जाती, जो 46 सालों में सबसे कम होती।
कैसे तय होता है ब्याज
सरकार हर तीन महीनों में इन छोटी बचत योजनाओं पर दी जाने वाली ब्याज दरों की समीक्षा करती है। छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों को तय करने का फॉर्मूला श्यामला कमेटी ने दिया था। कमेटी ने यह सुझाव दिया था कि विभिन्न योजनाओं पर ब्याज दर समान परिपक्वता अवधि वाले सरकार के बॉन्ड्स के यील्ड से 0.25 फीसदी से लेकर 1 फीसदी अधिक होना चाहिए।
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