भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 5 जून को रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद उन निवेशकों के लिए ब्याज दरें स्थिर बनी हुई हैं, जो सुरक्षित रिटर्न की तलाश में रहते हैं। अब निवेशक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) की तुलना बाजार के अन्य विकल्पों से कर रहे हैं। ऐसे में डेट फंड या सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में से सही विकल्प चुनना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए सही प्लानिंग और रणनीति की जरूरत है।
फिलहाल फिक्स्ड डिपॉजिट पर काफी आकर्षक ब्याज मिल रहा है, जो कई मामलों में 7.5 से 8.0 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ये उन लोगों के लिए सबसे अच्छे हैं जो अपनी पूंजी की सुरक्षा और गारंटीड इनकम चाहते हैं। दूसरी ओर, डेट फंड्स में प्रोफेशनल मैनेजमेंट के साथ-साथ बैंक डिपॉजिट के मुकाबले बेहतर लिक्विडिटी (पैसे निकालने की सुविधा) मिलती है। हालांकि इक्विटी SIP में जोखिम थोड़ा ज्यादा होता है, लेकिन लंबी अवधि में ये अक्सर दूसरे विकल्पों के मुकाबले कहीं ज्यादा रिटर्न देते हैं। लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए ये काफी फायदेमंद साबित होते हैं।

RBI पॉलिसी के बाद FD vs RD vs SIP vs डेट फंड्स की तुलना
| निवेश का प्रकार | संभावित रिटर्न | जोखिम | टैक्स नियम |
|---|---|---|---|
| फिक्स्ड डिपॉजिट | 7.0% - 8.0% | कम | इनकम स्लैब के अनुसार |
| डेट फंड्स | 7.5% - 8.5% | मध्यम | इनकम स्लैब के अनुसार |
| इक्विटी SIP | 12% - 15% | ज्यादा | LTCG/STCG |
अगर आप एक साल जैसे कम समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो बैंक डिपॉजिट अब भी सबसे सुरक्षित दांव हैं। जो लोग हर महीने बचत करना चाहते हैं, उनके लिए RD एक अच्छा जरिया है ताकि वे मौजूदा ऊंची ब्याज दरों का फायदा उठा सकें। वहीं, अगर आपका नजरिया तीन साल का है, तो डेट फंड्स आपको लचीलापन और बेहतर ग्रोथ दे सकते हैं। डिपॉजिट से हटकर मार्केट-लिंक्ड म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से पहले अपनी रिस्क लेने की क्षमता जरूर जांच लें। ज्यादातर छोटे निवेशकों के लिए सुरक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।
FD vs RD vs SIP vs डेट फंड्स: निवेश के लिए बेस्ट ऑप्शन
आपके हाथ में आने वाले असल मुनाफे में टैक्स की बड़ी भूमिका होती है। बैंक डिपॉजिट से मिलने वाले ब्याज पर आपके रेगुलर इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। हालिया नियमों के बाद अब डेट फंड्स पर भी आपकी इनकम के हिसाब से ही टैक्स देना होगा। ज्यादा कमाई वाले निवेशक अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस करने के लिए अब भी डेट फंड्स को पसंद कर सकते हैं। कोई भी आखिरी फैसला लेने से पहले 'यील्ड टू मैच्योरिटी' (YTM) पर गौर जरूर करें।
आरबीआई के इस रुख से संकेत मिलता है कि ऊंची ब्याज दरों का यह दौर हमेशा नहीं रहेगा। इसलिए, भविष्य में होने वाली संभावित कटौती से बचने के लिए अभी मौजूदा FD दरों को लॉक करना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है। एक स्मार्ट निवेशक को वेल्थ क्रिएशन के लिए सुरक्षित डिपॉजिट और इक्विटी SIP का मिला-जुला पोर्टफोलियो रखना चाहिए। यह रणनीति महंगाई से लड़ने के साथ-साथ आपके मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने में मदद करती है। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भी आपका फाइनेंशियल पोर्टफोलियो मजबूत बना रहता है।


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