मुंबई बारिश: गाड़ी डूबने पर न करें ये बड़ी गलती, वरना रिजेक्ट होगा इंश्योरेंस क्लेम

बारिश के पानी में डूबी गाड़ी को भूलकर भी स्टार्ट न करें; चाबी घुमाने या सेल्फ मारने से 'हाइड्रोलॉक' हो सकता है, और अगर आपके पास इंजन प्रोटेक्शन कवर नहीं है तो क्लेम खारिज हो जाएगा। सुरक्षित महसूस हो तो गाड़ी को तुरंत किसी ऊंची जगह पर पहुंचाएं। कार के अंदरूनी हिस्से, ओडोमीटर और पानी के निशान (वाटरलाइन) की तस्वीरें जरूर खींच लें। अपनी इंश्योरेंस कंपनी को फोन करके टोइंग की मांग करें और खुद से कोई मरम्मत न कराएं। जहां तक संभव हो, 24 घंटे के भीतर क्लेम की जानकारी दे दें। सर्वेयर की जांच होने तक खराब पार्ट्स को संभालकर रखें। ये शुरुआती कदम आपके क्लेम को जल्दी मंजूरी दिलाने में मदद करेंगे।

मोटर इंश्योरेंस क्लेम दो तरीकों से काम करता है। पहला कैशलेस, जिसमें नेटवर्क गैरेज की सुविधा मिलती है और आपको केवल अनिवार्य कटौती (डीडक्टिबल्स) ही देनी होती है। दूसरा रीइम्बर्समेंट, जिसमें पहले भुगतान आपको खुद करना पड़ता है और बाद में बिल जमा करने पर पैसे वापस मिलते हैं। अपनी पॉलिसी में इंजन प्रोटेक्ट, कंज्यूमेबल्स, रोडसाइड असिस्टेंस और जीरो डिप्रीशिएशन जैसे ऐड-ऑन जरूर चेक कर लें। अपना क्लेम नंबर सुरक्षित रखें। आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर: ICICI लोम्बार्ड 1800 2666; HDFC ERGO 022 6158 2020; SBI जनरल 1800 22 1111 और न्यू इंडिया 1800 209 1415।

Car Insurance Claim Guide 2026: How to Handle Flood Damage and Avoid Claim Rejection

मुंबई बारिश और इंश्योरेंस क्लेम: घर में पानी भरने, इलेक्ट्रॉनिक्स और दस्तावेजों से जुड़े नियम

भारत गृह रक्षा पर आधारित अधिकांश होम इंश्योरेंस पॉलिसियों में बाढ़ और पानी भरने से हुआ नुकसान कवर होता है। घर के हर कमरे में हुए नुकसान का ब्योरा बनाएं, सामान की रसीदें व सीरियल नंबर की फोटो खींचें और भीगे हुए इलेक्ट्रॉनिक सामान को ऑन न करें। मालिकाना हक के सबूतों के साथ इंश्योरेंस कंपनी के ऐप या नजदीकी ब्रांच से क्लेम फाइल करें। अगर घर के ढांचे (स्ट्रक्चर) को नुकसान पहुंचा है, तो सर्वेयर से पैनल में शामिल वेंडरों के जरिए कैशलेस रिपेयरिंग के बारे में पूछें।

मुंबई बारिश में पेमेंट के विकल्प: UPI Lite, IMPS और NEFT आएंगे काम

अगर मोबाइल नेटवर्क कमजोर हो, तो ऑफ लाइन पेमेंट के लिए 'UPI Lite टैप एंड पे' का इस्तेमाल करें, जिससे बिना इंटरनेट भी प्रति टैप ₹500 तक का भुगतान हो सकता है। जब इंटरनेट चल रहा हो, तभी वॉलेट रीलोड कर लें (ध्यान रखें, इसमें बैलेंस की एक तय सीमा होती है)। अगर UPI काम न करे, तो IMPS का इस्तेमाल करें; इसमें प्रति ट्रांजेक्शन ₹5 लाख की सीमा है। बैंक ट्रांसफर के लिए NEFT सुविधा 24x7 चालू रहती है। समय रहते एटीएम से पैसे निकाल लें और अपने पास छोटे नोट जरूर रखें।

मुंबई बारिश और बचत: 5, 10 और 15 साल की FD रिटर्न की तुलना

मुसीबत के वक्त EMI का विकल्प चुनने या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तोड़ने के बीच फैसला लेते समय लंबे समय में मिलने वाले कम्पाउंडिंग ब्याज का ध्यान जरूर रखें। नीचे दी गई टेबल से समझें कि सालाना कम्पाउंडिंग के हिसाब से ₹1,00,000 की FD पर अलग-अलग दरों से कितना रिटर्न मिलता है। इससे आपको यह तय करने में मदद मिलेगी कि क्रेडिट कार्ड की EMI बनवाना बेहतर है या अपनी FD बचाना।

सालाना FD ब्याज दर5 साल10 साल15 साल
6.5%₹1,37,000₹1,87,600₹2,57,100
7.5%₹1,43,600₹2,06,100₹2,95,700
8.0%₹1,46,900₹2,15,900₹3,17,200

अगर आपको तुरंत कैश की जरूरत है, तो म्यूचुअल फंड भुनाने (रिडीम करने) के बजाय 1 से 3 महीने के लिए अपनी SIP रोक (पॉज कर) सकते हैं। कुल लागत की तुलना करने के बाद ही क्रेडिट कार्ड के बड़े बिल को EMI में बदलें या ओवरड्राफ्ट सुविधा का लाभ उठाएं। KYC और क्लेम प्रक्रिया के लिए पैन (PAN) और आधार की डिजिटल कॉपी तुरंत हासिल की जा सकती है। इसके लिए Instant e-PAN और UIDAI e-Aadhaar का इस्तेमाल करें, और अपनी इंश्योरेंस पॉलिसियों को डिजिलॉकर (DigiLocker) या e-Insurance अकाउंट में सुरक्षित रखें। ऐसे संकट के समय में उठाए गए ये कदम आपके पैसों का संतुलन बनाए रखेंगे।

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