भारत के जुलाई महीने के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) यानी खुदरा महंगाई के आंकड़े आज शाम 5:30 बजे जारी होने वाले हैं। ये आंकड़े आपके लोन और सेविंग्स से जुड़े फैसलों पर सीधा असर डालेंगे। बाजार की नजर इस बात पर होगी कि महंगाई कम हो रही है या अभी भी बनी हुई है, और इससे RBI की पॉलिसी को लेकर क्या संकेत मिलते हैं। होम लोन लेने वालों, बैंक में पैसे जमा करने वालों और नए निवेशकों को अभी से अपनी तैयारी कर लेनी चाहिए। हम शाम 5:35 बजे तक आधिकारिक आंकड़े यहां अपडेट कर देंगे।
सबसे पहले हेडलाइन CPI (मुख्य महंगाई दर) पर नजर डालें, फिर उतार-चढ़ाव को समझने के लिए फूड और फ्यूल (खाद्य और ईंधन) के आंकड़ों को देखें। कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation), जिसका जिक्र अक्सर एक्सपर्ट्स करते हैं, उसमें फूड और फ्यूल शामिल नहीं होते हैं। ध्यान रहे कि यह NSO का कोई आधिकारिक पैमाना नहीं है। महंगाई का दायरा समझने के लिए ग्रामीण और शहरी आंकड़ों की तुलना करें। अगर कोर इन्फ्लेशन और खाने-पीने की चीजों के दाम कम होते हैं, तो आने वाले समय में लोन की ब्याज दरों में राहत मिल सकती है।

लोन लेने वालों को किन बातों पर रखनी होगी नजर
फ्लोटिंग-रेट वाले होम लोन में बदलाव होने पर आमतौर पर पहले लोन की अवधि (tenure) बढ़ती है, और लिमिट पार होने पर ही EMI बढ़ती है। अपने लोन स्टेटमेंट या ऐप पर जाकर रेट रीसेट होने की तारीख जरूर चेक करें। अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं, तो लोन की अवधि को बढ़ने से रोकने के लिए पार्ट-पेमेंट (आंशिक भुगतान) करने या लोन स्विच करने पर विचार करें। फिक्स्ड-रेट वाले ग्राहकों को आज कुछ करने की जरूरत नहीं है, लेकिन वे रीफाइनांस के विकल्पों पर नजर डाल सकते हैं
FD रेट्स और स्मॉल सेविंग्स स्कीम का आउटलुक
अगर महंगाई दर में गिरावट आती है, तो बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी (नकदी) सुधरने के साथ ही कुछ समय बाद एफडी (FD) की ब्याज दरें भी कम हो सकती हैं। स्मॉल सेविंग्स (छोटी बचत योजनाओं) की ब्याज दरों की समीक्षा हर तिमाही होती है, इसलिए इनमें बदलाव धीरे-धीरे दिखता है। बेहतर रिटर्न पाने और रीइन्वेस्टमेंट के जोखिम से बचने के लिए अलग-अलग मैच्योरिटी पीरियड वाली एफडी में पैसा लगाएं (FD लैडरिंग करें)। नीचे दी गई तालिका में एक लाख रुपये पर सालाना कंपाउंडिंग के आधार पर होने वाले फायदे को समझाया गया है।
| ब्याज दर | 5 साल | 10 साल | 15 साल |
|---|---|---|---|
| 6% | ₹1,33,823 | ₹1,79,085 | ₹2,39,656 |
| 7% | ₹1,40,255 | ₹1,96,715 | ₹2,75,911 |
| 8% | ₹1,46,933 | ₹2,15,893 | ₹3,17,217 |
डेट फंड्स और शेयर बाजार का रिएक्शन-
अगर महंगाई दर उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो बॉन्ड यील्ड बढ़ सकती है, जिससे लॉन्ग-ड्यूरेशन वाले डेट फंड्स की NAV पर बुरा असर पड़ सकता है। नए निवेशक इस उतार-चढ़ाव के दौरान अपना पैसा पार्क करने के लिए लिक्विड या अल्ट्रा-शॉर्ट टर्म फंड्स को चुन सकते हैं। महंगाई दर कम होने से ड्यूरेशन फंड्स को फायदा हो सकता है, लेकिन ऐसे बड़े इवेंट्स के आस-पास एकमुश्त (lump sum) निवेश करने से बचें। शेयर बाजार की बात करें, तो बॉन्ड यील्ड और रुपये की चाल पर नजर रखें और बाजार के शुरुआती उतार-चढ़ाव में जल्दबाजी में कोई फैसला न लें।
कहां चेक करें CPI के आंकड़े-
शाम 5:30 बजे नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) की आधिकारिक वेबसाइट और प्रेस नोट पर जाकर आंकड़े देख सकते हैं। तुरंत जानकारी के लिए इस टेबल और अपने लोन रेट वाले पेज को सेव कर लें। आज रात ही अपने लोन के रीसेट साइकल को चेक करें, जरूरत लगे तो छोटा सा पार्ट-पेमेंट करें और अपनी एफडी को सही तरीके से प्लान करें। जब तक बाजार की स्थिति पूरी तरह साफ न हो जाए, तब तक कोई भी बड़ा फैसला लेने में जल्दबाजी न करें।
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