अब 30 हजार रुपए के लेन-देन पर भी दिखाना पड़ेगा पैन कार्ड

सरकार बिना पैन के नकदी लेनदेन की सीमा 50 हजार से घटाकर 30 हजार कर सकती है इसके साथ ही इनकम टैक्स रिटर्न के लिए भी आधार को जरूरी किया जा सकता है।

नोटबंदी के बाद सरकार कैश पर कसे शिकंजे को ढीला करना नहीं चाहती है। इसके लिए सरकार आपके लेनदेन और खर्च पर नजर रखने के लिए पैन और आधार का दायरा बढ़ा करने की योजना बना रही है।

हर लेन-देन पर सरकार की नजर

हर लेन-देन पर सरकार की नजर

बैंक से कैश निकालना हो या डालना हो, कोई खरीदारी करनी हो सरकार आपके हर लेनदेन पर पूरी नजर रखने के लिए सिस्टम तैयार कर रही है। कितना कारगर होगा सरकार का ये कदम और इससे आपके लिए क्या किसी तरह की परेशानी बढ़ सकती है।

30 हजार के लेन-देन पर देना होगा पैन विवरण

30 हजार के लेन-देन पर देना होगा पैन विवरण

बता दें कि सरकार बिना पैन के नकदी लेनदेन की सीमा 50 हजार से घटाकर 30 हजार कर सकती है इसके साथ ही इनकम टैक्स रिटर्न के लिए भी आधार को जरूरी किया जा सकता है।

कारोबारियों के लिए भी घट सकती है सीमा

कारोबारियों के लिए भी घट सकती है सीमा

कारोबारियों के लिए भी बगैर पैन के पेमेंट लेने या देने की सीमा घटाई जा सकती है। फिलहाल 2 लाख रुपए से ज्यादा के पेमेंट लेने या देने पर पैन जरूरी होता है।

बजट में हो सकती है घोषणा

बजट में हो सकती है घोषणा

मनी कंट्रोल न्यूज पोर्लट ने सूत्रों के हवाले से ये खबर प्रकाशिक करते हुए लिखा है कि, बजट की तैयारियों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय और वित्त मंत्रालय के बीच हुई बैठक में इस विषय पर सहमति बनी है। रतन पी वातल कमेटी ने इसकी सिफारिश की थी।

आधार नंबर से भी कर सकेंगे लेन-देन

आधार नंबर से भी कर सकेंगे लेन-देन

इसके अलावा दूसरे वित्तीय लेनदेन के लिए भी आधार नंबर के इस्तेमाल का फैसला लिया जा सकता है। पैन नहीं होने पर बड़े वित्तीय लेनदेन में आधार देने की छूट मिल सकती है।

फॉर्म-60 में जुड़ सकता है आधार नंबर का विकल्प

फॉर्म-60 में जुड़ सकता है आधार नंबर का विकल्प

सूत्रों के हवाले से मिली खबरों के मुताबिक फॉर्म 60 की जगह आधार नंबर जरूरी किया जा सकता है। फिलहाल पैन नहीं होने पर वित्तिय लेनदेन के लिए फॉर्म 60 जरूरी होता है। अब जहां पैन नहीं है वहां आधार बेस्ड ई-केवाईसी की शुरुआत की जा सकती है और ई-केवाईसी में आधार नंबर देना काफी माना जा सकता है।

आयकर अधिनियम में हो सकता है परिवर्तन

आयकर अधिनियम में हो सकता है परिवर्तन

आधार नंबर के जरिये छोटे से छोटे वित्तीय लेनदेन पर नजर रखना मुमकिन हो सकेगा। इसके लिए इनकम टैक्स नियम-1962 के सेक्शन 114बी में संशोधन किया जा सकता है।

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