अगर आपने आज शेयर बाजार की स्क्रीन देखी होगी, तो एक सवाल जरूर आया होगा-आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि कुछ ही घंटों में बाजार की पूरी तस्वीर बदल गई? सुबह तक संभला हुआ दिख रहा भारतीय शेयर बाजार दोपहर बाद भारी बिकवाली की चपेट में आ गया। आखिरी 35 मिनट में रिकवरी की सारी कोशिशें नाकाम रहीं और अगले कारोबारी दिन भी वही दबाव जारी रहा।

दोपहर करीब 2:40 बजे तक सेंसेक्स करीब 1,735 अंक टूटकर 76,446 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी 530 अंकों से ज्यादा फिसलकर 23,867 के स्तर पर आ गया। इंट्राडे में सेंसेक्स लगभग 1,800 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी 23,845 तक लुढ़क गया। शुरुआती कारोबार में ही बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये घट गया और जैसे-जैसे ट्रेडिंग आगे बढ़ी, बिकवाली और तेज होती चली गई।
गिरावट की वजह क्या रही?
दरअसल, पश्चिमी एशिया में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हमलों के जवाब में अमेरिका ने ईरान पर नए सैन्य हमले किए। ईरानी सरकारी मीडिया ने बंदर अब्बास, सिरीक पोर्ट, केश्म द्वीप और खर्ग द्वीप पर बड़े विस्फोटों की जानकारी दी। इसके बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी IRGC ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर खत्म होने वाले बयान ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी, जिसका सीधा असर ग्लोबल और भारतीय बाजारों पर दिखाई दिया।
Brent Crude में गिरावट-
इस भू-राजनीतिक तनाव का असर कच्चे तेल पर भी साफ नजर आया। ब्रेंट क्रूड लगभग 78 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे आयातक देश के लिए चिंता बढ़ाती है, क्योंकि इससे महंगाई और कंपनियों की लागत दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। घबराहट का अंदाजा India VIX से भी लगाया जा सकता है, जो करीब 28% उछलकर 14.91 पर पहुंच गया। VIX में इतनी तेज बढ़त यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
सभी सेक्टर लाल निशान में-
सेक्टोरल फ्रंट पर सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग शेयरों में देखने को मिला। निफ्टी PSU बैंक ढाई फीसदी से ज्यादा टूटा, जबकि प्राइवेट बैंक, FMCG, ऑटो, मेटल, फार्मा और आईटी सेक्टर भी भारी बिकवाली की चपेट में रहे। कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, बढ़ती तेल कीमतें और निवेशकों की घबराहट ने भारतीय शेयर बाजार को जोरदार झटका दिया। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि पश्चिमी एशिया का यह संकट आगे कितना बढ़ता है, क्योंकि फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक इन्हीं घटनाक्रमों पर निर्भर दिखाई दे रही है।
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