15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ट्रैवल के पीक सीजन को देखते हुए, एयरपोर्ट के बोर्डिंग गेट से ज्यादा भीड़ लाउंज में नजर आ सकती है। दरअसल, अब कई भारतीय क्रेडिट कार्ड हालिया खर्च के आधार पर ही लाउंज एंट्री का एक्सेस देते हैं। यह स्पेंडिंग विंडो आमतौर पर हर महीने या तिमाही की होती है। ऐसे में घर से निकलने से पहले एक बार अपनी एलिजिबिलिटी जरूर चेक कर लें, ताकि लाउंज काउंटर पर कार्ड डिक्लाइन होने की झिझक से बचा जा सके।
एलिजिबिलिटी इस बात पर निर्भर करती है कि कार्ड जारी करने वाला बैंक आपके किन खर्चों को 'रिटेल स्पेंड' मानता है। पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) और ज्यादातर ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन इसमें गिने जाते हैं। वहीं, वॉलेट रीलोड, गिफ्ट कार्ड, फ्यूल, अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के जरिए रेंट पेमेंट, कैश एडवांस और बैंक फीस जैसे खर्चों को इसमें शामिल नहीं किया जाता। पैसे रिफंड होने पर भी वह स्पेंड काउंट नहीं होता। आपका खर्च तय विंडो के अंदर 'पोस्ट' (प्रोसेस) होना चाहिए, सिर्फ कार्ड स्वाइप करना काफी नहीं है। ऐड-ऑन कार्ड्स भी इसी लिमिट को शेयर करते हैं।

कार्ड का लाउंज एक्सेस और स्पेंड क्राइटेरिया कैसे चेक करें
अपने बैंक ऐप को खोलें और क्रेडिट कार्ड सेक्शन में जाएं। वहां 'Lounge Access', 'Benefits' या 'Rewards' नाम का ऑप्शन देखें। ज्यादातर ऐप में बची हुई लाउंज विजिट और एलिजिबिलिटी की आखिरी तारीख दिखाई दे जाती है। अगर यह ऑप्शन न दिखे, तो कार्ड डिटेल्स के अंदर 'Terms' या 'Offers' में चेक करें। HDFC, Axis, ICICI और SBI के ऐप में यह जानकारी आसानी से मिल जाती है।
लाउंज एक्सेस पाने के त्वरित उपाय और बैकअप प्लान
क्या आप स्पेंड लिमिट के काफी करीब हैं? तो आज ही कोई छोटा-मोटा शॉपिंग ट्रांजैक्शन कर लें—लेकिन ध्यान रखें, यह वॉलेट रीलोड न हो। ग्रॉसरी, फार्मेसी या यूटिलिटी बिल पेमेंट जैसे ट्रांजैक्शन आमतौर पर जल्दी सेटल हो जाते हैं। अगर कार्ड से एंट्री न मिले, तो ज्यादातर लाउंज में पैसे देकर भी प्रवेश लिया जा सकता है। मेट्रो शहरों में पेड एंट्री का चार्ज आमतौर पर 1,200 रुपये से 2,500 रुपये के बीच होता है।
यूपीआई (UPI) पर रूपे (RuPay) क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कुछ बैंकों द्वारा रिटेल स्पेंड माना जाता है, जबकि अन्य इसे लाउंज एलिजिबिलिटी से बाहर रखते हैं। वॉलेट टॉप-अप शायद ही कभी काम आते हैं। ऐड-ऑन कार्ड भी आमतौर पर प्राइमरी कार्ड की विजिट लिमिट और स्पेंड पूलिंग का ही इस्तेमाल करते हैं। अगर कोई संशय हो, तो लाउंज स्टाफ से पहले ही एक 'जीरो-वैल्यू एलिजिबिलिटी चेक' करने के लिए कहें।
अगर आप लाउंज एंट्री या हवाई टिकट का भुगतान कर रहे हैं और उसे आसान ईएमआई (EMI) में बदलने की सोच रहे हैं, तो इससे खर्च तो बंट जाएगा लेकिन जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बैंक इसके लिए प्रोसेसिंग फीस, ब्याज और जीएसटी (GST) वसूलते हैं। चेकआउट के दौरान या ऐप में 'Convert to EMI' विकल्प चुनने से पहले इस हिसाब-किताब को समझ लें:
| रकम | अवधि | मासिक दर | प्रोसेसिंग फीस | ईएमआई | अतिरिक्त खर्च |
|---|---|---|---|---|---|
| ₹15,000 | 3 महीने | 1.25% | ₹150 | ₹5,134 | ~₹551 (फीस सहित) |
| ₹15,000 | 6 महीने | 1.25% | ₹150 | ₹2,645 | ~₹1,022 (फीस सहित) |
15 अगस्त को सफर पर निकलने से पहले बस दो मिनट निकालकर अपने बैंक ऐप में चेक कर लें कि स्पेंड्स पोस्ट हुए हैं या नहीं, एलिजिबिलिटी डेट क्या है और कितनी विजिट्स बची हैं। साथ ही एक बैकअप प्लान भी रखें—जैसे कोई दूसरा कार्ड, पेड एंट्री के लिए बजट या डे पास। थोड़ी सी पूर्व-तैयारी पीक आवर्स के दौरान लाउंज में किसी भी तरह के झंझट और गैर-जरूरी खर्च से आपको बचा सकती है।


Click it and Unblock the Notifications
