पूरा देश इस समय कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है। ऐसे में कई कंपनियों ने अपने यहां छंटनी शुरू कर दी है। इसी तरह कोरोना महामारी के बीच देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सैलरी में कटौती की
नई दिल्ली: पूरा देश इस समय कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है। ऐसे में कई कंपनियों ने अपने यहां छंटनी शुरू कर दी है। इसी तरह कोरोना महामारी के बीच देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सैलरी में कटौती की घोषणा की है। जी हां देश की तमाम कंपनियों में सैलरी कट के फैसले के बाद अब भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूह रिलायंस ने भी कर्मचारियों के वेतन में कटौती का फैसला लिया है। देश की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) ने अपने हाइड्रोकार्बन डिवीजन में कुछ कर्मचारियों की सैलरी में 10 प्रतिशत की कटौती करने का फैसला किया है। इसके साथ ही कंपनी के बोर्ड के डाइरेक्टरों के साथ टॉप मैनेजमेंट की सैलरी में ज्यादा कटौती होगी।

30 से 50 फीसदी तक के सैलरी कट का फैसला
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड समूह ने कहा कि कंपनी के पूरे बोर्ड और सीनियर अधिकारियों ने 30 से 50 फीसदी तक के सैलरी कट का फैसला लिया है। कोरोना वायरस के संकट के चलते पैदा हुई आर्थिक तंगी से निपटने के लिए कंपनी ने लागत में कमी करने का यह फैसला लिया है। मिली जानकारी में ये भी पता चला है कि कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी अपनी पूरी सेलरी छोड़ सकते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कॉम्पेंसेशन नहीं लेने का फैसला किया है। एशिया के सबसे धनवान उद्योगपति मुकेश अंबानी वैसे भी कम सेलरी लेते हैं और कई सालों से उनकी सेलरी में कोई इजाफा नहीं हुआ है। सेलरी में इस कटौती के पत्र पर कंपनी के ईडी हितल आर मेसवानी ने साइन किया है।
इस विभाग के कर्मचारियों की कटेगी सैलरी
जानकारी के मुताबिक सैलरी में कटौती हाइड्रोकार्बन विभाग के उन सभी कर्मचारियों पर लागू होगी जिनकी सैलरी सालाना 15 लाख रुपए से ज्यादा होगी। जिन कर्मचारियों की सैलरी उससे कम होगी, उन पर इस फैसले का कोई असर नहीं होगा।
कोविड-19 की वजह से हाइड्रोकार्बन बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस प्रोडक्ट की मांग पर काफी असर देखा गया है। सालाना कैश बोनस और प्रदर्शन से जुड़े इंसेंटिव पर भी इस फैसले का असर होगा। आमतौर पर बोनस और अन्य इंसेंटिव पहली तिमाही में दिए जाते हैं। पर अब इसे कुछ समय के लिए टाला जा सकता है या फिर कट किया जा सकता है। पत्र के मुताबिक आर्थिक और बिजनेस गतिविधियों पर करीब से नजर रखी जा रही है और स्थितियों का पुनर्मूल्यांकन हो रहा है।
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