शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 तक, EPFO ब्याज क्रेडिट को लेकर हलचल काफी बढ़ गई है और कई मेंबर्स अपनी पासबुक बार-बार चेक कर रहे हैं। यहां यह समझना जरूरी है कि ब्याज का पैसा किस्तों (batches) में क्यों आता है और पासबुक में दिखने में देरी क्यों होती है। दरअसल, पब्लिक पासबुक में दिखने से पहले बैकएंड लेजर (backend ledgers) अपडेट हो जाते हैं। इस अंतर को समझकर आप बिना घबराए आसानी से अपनी एंट्रीज चेक कर सकते हैं
EPFO वैसे तो फाइनेंशियल ईयर खत्म होने के बाद सालाना आधार पर ब्याज क्रेडिट करता है, लेकिन इसकी एंट्रीज अलग-अलग फेज में की जाती हैं। सिस्टम बैंक डिपॉजिट की तारीख के बजाय सैलरी वाले महीने (wage-month) के योगदान का मिलान करता है। इसलिए, प्रोसेसिंग पूरी होने के बाद एंट्रीज महीने के हिसाब से अपडेट हो सकती हैं। पासबुक में पोस्टिंग की तारीख दिखती है, लेकिन ब्याज हर महीने के रनिंग बैलेंस पर जुड़ता है। ऐसे में, कैलकुलेशन पूरा होने के बाद भी पासबुक में इसे दिखने में थोड़ा समय लग सकता है।

EPFO interest credit: how to check status today
उमंग (UMANG) ऐप पर स्टेटस देखने के लिए 'All Services' पर जाएं, 'EPFO' चुनें, फिर 'Employee Centric Services' पर जाकर 'View Passbook' पर क्लिक करें। अगर आप EPFO की वेबसाइट पर हैं, तो 'Services' में जाएं, 'For Employees' चुनें, फिर 'Member Passbook' पर क्लिक करके अपने UAN क्रेडेंशियल्स के साथ लॉग इन करें। इसके बाद आखिरी बार अपडेट हुई तारीख और ब्याज वाली रो (row) का मिलान करें। अगर लेजर में एंट्री पहले हो गई है, तो पासबुक में यह थोड़ी देर से अपडेट हो सकती है। ध्यान रखें, अपना ओटीपी (OTP) या पासवर्ड कभी किसी के साथ शेयर न करें।
अगर फिर भी एंट्रीज नहीं दिख रही हैं, तो EPFiGMS पोर्टल पर जाकर शिकायत दर्ज (raise a ticket) कराएं। इसके लिए आपको कैटेगरी, UAN और स्क्रीनशॉट अपलोड करने होंगे। साथ ही, प्रभावित हुए सैलरी वाले महीनों (wage-months) और एम्प्लॉयर की जानकारी भी दें। एक ही शिकायत बार-बार दर्ज करने से बचें; पावती (acknowledgement) और रेफरेंस नंबर मिलने का इंतजार करें। अक्सर देरी की वजह अनपेड ECR, पेंडिंग KYC या ट्रांसफर हो सकती है। अपने एम्प्लॉयर से ECR वैलिडेट करने को कहें। अपनी KYC अपडेट रखें और बैंक सीडिंग की जांच जरूर कर लें।
इस साल टैक्स के नियमों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। अगर कर्मचारी का योगदान ढाई लाख रुपये से ज्यादा है, तो उस पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आएगा। वहीं, जिन मामलों में एम्प्लॉयर का कोई योगदान नहीं है, वहां यह सीमा पांच लाख रुपये है। आपको अपने टैक्स रिटर्न में इस टैक्सेबल ब्याज की जानकारी देनी होगी। आमतौर पर टीडीएस (TDS) समय से पहले पैसे निकालने (early withdrawals) पर कटता है, सालाना क्रेडिट पर नहीं। स्टेटमेंट उपलब्ध होते ही उसे डाउनलोड करें और अपनी पे-स्लिप (payslips) से उसका मिलान जरूर कर लें।
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