RBI MPC Meeting Highlights: सेंट्रल बैंक यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) मौद्रिक समीक्षा कमिटी की मीटिंग आज 9 अक्टूबर को खत्म हुई, जोकि 7 अक्टूबर से जारी थी. 6 सदस्यों वाली इस कमिटी में ब्याज दरों को लगातार 10वीं बार स्थिर रखा गया है. मौजूदा रेपो रेट 6.50% है. रिजर्व बैंक ने अक्टूबर पॉलिसी में रुख न्यूट्रल किया है, जिस पर सभी सदस्यों ने सहमति जताई है. बताते चलें कि RBI ने आखिरी बार फरवरी 2023 में दरें 0.25% बढ़ाकर 6.5% की थीं
GDP ग्रोथ के लिए RBI ने बदला अनुमान
गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि FY13 के बाद पहली बार निवेश में GDP का हिस्सा रिकॉर्ड स्तर पर है. FY25 के लिए GDP 7.2 फीसदी रहने का अनुमान है. वहीं, FY26 की पहली तमाही के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7.3 फीसदी किया, जोकि पहली 7.2 फीसदी था.
Q2FY25 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान भी 7.2 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी किया. Q3FY25 के लिए ग्रोथ अनुमान को बढ़ाया है. Q4FY25 के लिए आर्थिक ग्रोथ अनुमान भी 7.2 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी किया. शक्तिकांत दास ने कहा कि सरकारी खपत में इजाफा हुआ है. साथ ही कैपेक्स में सुधार आया है.
RBI क्यों घटता या बढ़ता है रेपो रेट?
बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन के चलते दुनियाभर के सेंट्रल बैंक ने महंगाई पर काबू पाने के लिए दरों में इजाफा किया. इसमें भारत का केंद्रीय बैंक यानी RBI भी शामिल है. सेंट्रल बैंक के पास रेपो रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक मजबूत हथियार है. ऐसे में जब भी महंगाई काबू से बाहर निकल जाती है या फिर निकलने लगती है तब RBI रेपो रेट में बदलाव करता है.
इससे अर्थव्यस्था में लिक्विडिटी फ्लो को कम करने की कोशिश की जाती है. यानी रेपो रेट हाई होगा तो बैंकों को RBI से मिलने वाला लोन महंगा मिलेगा. इसके चलते बैंक ग्राहकों को ज्यादा ब्याज दरों पर लोन बांटेंगे. नतीजनत, इकोनॉमी में लिक्विटी का फ्लो गिर जाएगा. और जब मनी फ्लो गिरेगा तो महंगाई घट जाएगी.

इसके ठीक उलट जब इकोनॉमी में लिक्विडिटी का फ्लो बढ़ाना होता है तब रिजर्व बैंक रेपो रेट को कम कर देती है. रेपो रेट कम होने से बैंकों को कम ब्याज पर RBI से लोन मिलता है. इससे ग्राहकों को भी लोन ब्याज दरों पर सस्ते में मिलता है. नतीजनत, इकोनॉमी की रफ्तार को जोश मिलता है. इसे उदाहरण से समझते हैं....कोरोना महामारी के समय आर्थिक संकट में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट घटाकर आर्थिक ग्रोथ में जोश भरने का काम किया.
रिवर्स रेपो रेट में बदलाव से कितना पड़ता है असर?
MPC पॉलिसी में रेपो रेट के साथ रिवर्स रेपो रेट का भी ऐलान किया जाता है. रिवर्स रेपो रेट उसे कहते है जिस रेट पर रिजर्व बैंक बैंकों को पैसा रखने पर ब्याज देता है. रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी कर RBI बाजार में नकदी को कम करता है. वहीं, बैंक RBI के पास अपनी होल्डिंग के लिए ब्याज लेकर इसका फायदा उठाते हैं. सेंट्रल बैंक इकोनॉमी में महंगाई बढ़ने के दौरान रिवर्स रेपो रेट बढ़ाता है, जिससे बैंकों के पास ग्राहकों को लोन देने के लिए फंड कम हो जाता है.


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