शुक्रवार, 5 जून 2026 की सुबह 10 बजे RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) अपना फैसला सुनाएगी। अप्रैल से ही रेपो रेट 5.25 फीसदी पर स्थिर बना हुआ है। आरबीआई के इस फैसले का सीधा असर आपकी EMI, रुपये की चाल, बॉन्ड यील्ड और रेट-सेंसिटिव शेयरों पर पड़ेगा। निवेशक इस बार आरबीआई के रुख (stance) और लिक्विडिटी को लेकर मिलने वाले संकेतों को बारीकी से समझेंगे। यह पॉलिसी स्टेटमेंट ऐसे समय में आ रहा है जब कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और रुपया भी थोड़ा कमजोर नजर आ रहा है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बार भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा (pause), लेकिन सबकी नजर आरबीआई की कमेंट्री पर रहेगी। अगर दरों में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी होती है, तो यह बाजार के लिए चौंकाने वाला फैसला होगा, जो महंगाई या रुपये को लेकर बढ़ती चिंता का संकेत देगा। 3 जून से शुरू हुई इस बैठक के बाद गवर्नर दोपहर 12 बजे मीडिया को संबोधित करेंगे। बाजार पहले सुबह 10 बजे आने वाले बयान और फिर दोपहर की प्रेस ब्रीफिंग पर अपनी प्रतिक्रिया देगा।

RBI MPC Decision: आपकी EMI पर क्या होगा असर?
रेपो रेट से जुड़े लोन पर दरों में बदलाव का असर तुरंत दिखता है, जबकि पुराने MCLR आधारित लोन में यह बदलाव थोड़ा रुककर आता है। इसे समझने के लिए, मान लेते हैं कि आपने 9.25% ब्याज दर पर 20 साल के लिए ₹50 लाख का होम लोन लिया है। साथ ही, 10.5% की दर पर 5 साल के लिए ₹10 लाख का ऑटो लोन लिया है। आपकी वास्तविक EMI बैंक और रीसेट साइकिल के आधार पर अलग हो सकती है।
| स्थिति | होम लोन EMI (₹50 लाख, 20 साल) | ऑटो लोन EMI (₹10 लाख, 5 साल) |
|---|---|---|
| कोई बदलाव नहीं | ₹45,793 | ₹21,494 |
| +25 bps की बढ़ोतरी | ₹46,607 | ₹21,618 |
RBI MPC Decision: बाजार की किन बातों पर रहेगी नजर
बॉन्ड ट्रेडर्स की नजर लिक्विडिटी और ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) को लेकर मिलने वाले संकेतों पर रहेगी। अगर दरें स्थिर रहती हैं और आरबीआई अपना रुख न्यूट्रल रखता है, तो इससे बॉन्ड यील्ड को स्थिरता मिलेगी और बैंकों के वैल्युएशन को सपोर्ट मिलेगा। वहीं, दरों में अचानक बढ़ोतरी से यील्ड बढ़ सकती है, जिससे NBFCs पर दबाव बढ़ेगा, हालांकि इससे रुपये को शॉर्ट टर्म में मजबूती मिल सकती है। जानकारों का यह भी मानना है कि 10 साल के बॉन्ड की ट्रेडिंग एक सीमित दायरे में रह सकती है।
सुबह 10:00 बजे और दोपहर 12:00 बजे इन चार मुख्य बातों को ट्रैक करें। पहला, महंगाई का रास्ता और ग्रोथ का अनुमान, जो भविष्य की दरों का रुख तय करेंगे। दूसरा, लिक्विडिटी मैनेजमेंट के तरीके (जैसे VRRR और OMO), जिनसे फंड की लागत का संकेत मिलेगा। तीसरा, रुपये की स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार पर आरबीआई की टिप्पणी। आप अपनी लोन प्लानिंग या प्री-पेमेंट के फैसले के लिए ऊपर दी गई टेबल की मदद ले सकते हैं।
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