आज 5 जून को सुबह 10 बजे RBI अपनी मॉनेटरी पॉलिसी (MPC) के नतीजों का ऐलान करेगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे गवर्नर संजय मल्होत्रा मीडिया को संबोधित करेंगे। बाजार को उम्मीद है कि इस बार भी रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रहेगा और पॉलिसी के रुख में कोई बदलाव नहीं होगा। इस फैसले का सीधा असर आपकी EMI, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रुपये की चाल और रेट-सेंसिटिव शेयरों पर पड़ेगा।
इससे पहले अप्रैल की समीक्षा में भी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया था। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और रुपये में उतार-चढ़ाव के बीच 3 से 5 जून तक यह बैठक चली। अप्रैल में RBI ने महंगाई दर 4.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 के लिए विकास दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए फिलहाल केंद्रीय बैंक 'वेट एंड वॉच' की नीति अपना सकता है।

RBI MPC फैसला: EMI, 5.25% रेपो रेट और कर्जदारों के लिए जरूरी बातें
अगर ब्याज दरें स्थिर रहती हैं, तो एक्सटर्नल बेंचमार्क वाले लोन की EMI में तुरंत कोई बदलाव नहीं होगा। अपने लोन की 'रीसेट डेट' और बैंक के स्प्रेड (Spread) पर नजर रखें। अगर आपके पास अतिरिक्त फंड है, तो थोड़ा प्री-पेमेंट करने की सोचें; इससे लंबे समय में ब्याज का बोझ कम होता है। जब तक रेट कट का समय साफ न हो जाए, तब तक फिक्स्ड के बजाय फ्लोटिंग होम लोन को प्राथमिकता देना बेहतर है।
RBI MPC फैसला: FD, छोटी बचत योजनाएं और मार्केट पर क्या होगा असर?
जब तक बैंकिंग सिस्टम में नकदी (Liquidity) नहीं बढ़ती, तब तक FD की दरें ऊंची बनी रह सकती हैं। छोटी बचत योजनाओं की दरें सरकारी बॉन्ड यील्ड के आधार पर हर तिमाही तय होती हैं, इसलिए आज इनमें किसी बड़े बदलाव की उम्मीद कम है। बाजार की नजर लिक्विडिटी और ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) पर रहेगी। अक्सर हेडलाइन रेट्स से ज्यादा गवर्नर के संकेतों से रुपये और बॉन्ड मार्केट में हलचल होती है।
| सुबह 10 बजे इन पर रखें नजर | निवेशकों के लिए संकेत |
|---|---|
| लिक्विडिटी और ओपन मार्केट ऑपरेशंस | FD की दरों और बॉन्ड यील्ड का भविष्य। |
| महंगाई और ग्रोथ का अनुमान | ब्याज दरों में कटौती की टाइमलाइन और सेक्टर लीडरशिप के संकेत। |
| दोपहर 12 बजे गवर्नर का संबोधन | रुपये के मैनेजमेंट और लिक्विडिटी को लेकर RBI का रुख। |
निवेश या ट्रेडिंग में जल्दबाजी न करें। पहले सुबह 10 बजे के फैसले को समझें और फिर दोपहर 12 बजे की ब्रीफिंग के बाद अपनी रणनीति तय करें। कर्जदार अपनी रीसेट डेट चेक करें और मुमकिन हो तो प्री-पेमेंट करें। वहीं, बचत करने वाले लोग अपनी FD को अलग-अलग अवधि (Laddering) में बांट सकते हैं और छोटी बचत योजनाओं पर सरकारी नोटिफिकेशन का इंतजार करें। दोपहर तक स्थिति साफ होने के बाद ही बाजार और रुपये में असली एक्शन देखने को मिलेगा।


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