RBI Monetary Policy News Today: रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की आज नए साल की पहली और चालू वित्तीय वर्ष की अंतिम बैठक के बाद गर्वनर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट को स्थिर रखने का ऐलान किया है। इस प्रकार से रेपो रेट 6.50 फीसदी पर बनी रहेगी। वहीं आरबीआई ने देश की जीडीपी में तेज बढ़त का अनुमान जताया है।
आरबीआई के रेपो रेट को स्थिर रखने से लोन लेने वालों को राहत मिलेगी, क्यों कि माना जाता है कि अगर रेपो स्थिर है तो बैंक लोन महंगा नहीं करेंगे। हालांकि इससे इस बात की भी अशंका रहती है कि एफडी की ब्याज दरें नहीं बढ़ेंगी, बल्कि यह कम भी हो सकती हैं। हालांकि यह तुरंत नहीं कुछ दिन बाद नजर आएगा।

रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि एमपीसी ने रेपो रेट को लेकर फैसला 1 के मुकाबले 5 वोटों से किया है। सभी सदस्य इस बात पर सहमत हैं कि मुद्रास्फीति तय टारगेट के आसपास बनी रहेगी। गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि एमपीसी खाद्य मूल्य दबावों पर नजर रखेगी, क्योंकि ऐसा न किया तो मुद्रास्फीति की गाड़ी पटरी से उतर सकती है। उन्होंने बताया कि मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत के लक्ष्य पर लाने के लिए मौद्रिक नीति को सक्रिय रूप लागू किया जाएगा।
मुद्रास्फीति पूर्वानुमान का तिमाही आधार पर
- जनवरी-मार्च 2024 सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान 5.2 प्रतिशत से घटाकर 5.0 प्रतिशत कर दिया गया।
- अप्रैल-जून 2024 सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान 5.2 प्रतिशत से घटाकर 5.0 प्रतिशत कर दिया गया।
- जुलाई-सितंबर 2024 सीपीआई मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान 4.0 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया।
- अक्टूबर-दिसंबर 2024 सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान 4.7 प्रतिशत से घटाकर 4.6 प्रतिशत कर दिया गया।
- जनवरी-मार्च 2025 सीपीआई मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान 4.7 प्रतिशत आंका गया।
FY25 में जीडीपी वृद्धि 7 प्रतिशत रहने का अनुमान
आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि वित्त वर्ष 2025 में जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी रहने का अनुमान है।
- अप्रैल-जून 2024 जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत किया गया।
- जुलाई-सितंबर 2024 जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत किया गया।
- अक्टूबर-दिसंबर 2024 जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत किया गया।
- जनवरी-मार्च 2025 जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.9 प्रतिशत आंका गया।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि सरकारी नकदी शेष के साथ समायोजन के बाद बैंकिंग प्रणाली में तरलता अधिशेष में थी। साढ़े चार साल के अंतराल के बाद सितंबर 2023 में तरलता घाटे में बदली थी, लेकिन सरकारी नकदी शेष के समायोजन के बाद, बैंकिंग प्रणाली में संभावित तरलता अभी भी अधिशेष में है।
एमपीसी के 6 सदस्य कौन
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास, डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा के अलावा 4 नॉमित सदस्य हैं। इनके नाम हैं आशिमा गोयल, राजीव रंजन, जयन्त आर. वर्मा और शशांक भिडे।
मोदी सरकार के कार्यकाल में रेपो रेट की हिस्ट्री
मोदी सरकार में रेपो रेट की हिस्ट्री काफी रोचक है। पूरे मोदी सरकार के कार्यकाल में यह दर कभी उतना नहीं रही जितनी दर ठीक मोदी सरकार के शपथ के ठीक पहले थी। जब मोदी सरकार ने कार्यकाल संभाला तो रेपो रेट की दर 8 फीसदी थी, जो फिर कभी उतनी नहीं हुई है।
ये है रेपो रेट का सफर
- 8 दिसंबर 23 को 6.50 फीसदी
- 6 अक्टूबर 23 को 6.50 फीसदी
- 10 अगस्त 23 को 6.50 फीसदी
- 8 जून 23 को 6.50 फीसदी
- 4 अप्रैल 23 को 6.50 फीसदी
- 8 फरवरी 23 को 6.50 फीसदी
- 7 दिसंबर 22 को 6.25 फीसदी
- 30 सितंबर 22 को 5.90 फीसदी
- 5 अगस्त 22 को 5.40 फीसदी
- 8 जून 22 को 4.90 फीसदी
- 4 मई 22 को 4.40 फीसदी
- 10 फरवरी 22 को 4 फीसदी
- 8 दिसंबर 21 को 4 फीसदी
- 8 अक्टूबर 21 को 4 फीसदी
- 6 अगस्त 21 को 4 फीसदी
- 4 जून 21 को 4 फीसदी
- 7 अप्रैल 21 को 4 फीसदी
- 5 फरवरी 21 को 4.00 फीसदी
- 4 दिसंबर 20 को 4.00 फीसदी
- 9 अक्टूबर 20 को 4.00 फीसदी
- 6 अगस्त 20 को 4.00 फीसदी
- 22 मई 2020 को 4.00 फीसदी
- 27 मार्च 2020 को 4.40 फीसदी
- 4 अक्टूबर 2019 को 5.15 फीसदी
- 7 अगस्त 2019 को 5.40 फीसदी
- 6 जून 19 को 5.75 फीसदी
- 04 अप्रैल 19 को 6.00 फीसदी
- 07 फरवरी 19 को 6.25 फीसदी
- 05 दिसंबर 18 को 6.50 फीसदी
- 05 अक्टूबर 18 को 6.50 फीसदी
- 01 अगस्त 18 को 6.50 फीसदी
- 06 जून 18 को 6.25 फीसदी
- 05 अप्रैल 18 को 6.00 फीसदी
- 07 फरवरी 18 को 6.00 फीसदी
- 06 दिसंबर 17 को 6.00 फीसदी
- 04 अक्टूबर 17 को 6.00 फीसदी
- 02 अगस्त 17 को 6.00 फीसदी
- 08 जून 17 को 6.25 फीसदी
- 06 अप्रैल 17 को 6.25 फीसदी
- 08 फरवरी 17 को 6.25 फीसदी
- 07 दिसंबर 16 को 6.25 फीसदी
- 04 अक्टूबर 16 को 6.25 फीसदी
- 05 अप्रैल 16 को 6.50 फीसदी
- 29 सितंबर 15 को 6.75 फीसदी
- 02 जनवरी 15 को 7.25 फीसदी
- 04 मार्च 15 को 7.50 फीसदी
- 15 जनवरी 15 को 7.75 फीसदी
मॉनिटरी पॉलिसी में इस्तेमाल होने वाले शब्दों का मतलब
क्या होती है रेपो रेट: रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को आरबीआई कर्ज देता है. बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने से मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे, जैसे कि होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह।
क्या होती है रिवर्स रेपो रेट: जैसा इसके नाम से ही साफ है, यह रेपो रेट से उलट होता है। यह वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है. बाजार में जब भी बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दे।
क्या होती है सीआरआर: देश में लागू बैंकिंग नियमों के तहत हरेक बैंक को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है। इसे ही कैश रिजर्व रेश्यो या नकद आरक्षित अनुपात कहते हैं।
क्या होती है एसएलआर: जिस दर पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते है, उसे एसएलआर कहते हैं। नकदी की तरलता को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है। आरबीआई जब ब्याज दरों में बदलाव किए बगैर नकदी की तरलता कम करना चाहता है तो वह सीआरआर बढ़ा देता है, इससे बैंकों के पास लोन देने के लिए कम रकम बचती है।


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