किस्मत : बैंक खाते में अचानक दिखे 18,357.7 करोड़ रु, जानिए फिर क्या हुआ

नयी दिल्ली। कहा जाता है कि जो किस्मत में होता है वही मिलता है। अक्सर किस्मत का लिखा हुआ कुछ इस तरह मिलता है जिस पर यकीन करना मुश्किल हो। मगर आने वाली चीज उसी तरह जा भी सकती है जैसे वो आई हो। एक ऐसा ही वाकया सामने आया है अमेरिका का, जहां एक व्यक्ति के खाते में अचानक से 1 या 2 बल्कि पूरे 245 करोड़ डॉलर (करीब 18,357.7 करोड़ रु) आ गए। आइए जानते हैं आगे क्या हुआ।

बैंक ऑफ अमेरिका का है मामला

बैंक ऑफ अमेरिका का है मामला

ये मामला बैंक ऑफ अमेरिका का है। अमेरिकी राज्य मैसाचुसेट्स में इस बैंक के एक ग्राहक को खाते में 245 करोड़ डॉलर की राशि दिखी। मगर ये राशि न तो उसकी थी और न ही उसे किसी ने भेजी थी। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार ये पैसा उन्हें अपने खाते में चेक करने पर दिखा। मगर ये पैसा ट्रांसफर नहीं किया गया था। बैंक के प्रवक्ता ने बाद में इस बात की पुष्टि की कि यह एक 'डिस्प्ले एरर' थी और कोई पैसा ट्रांसफर नहीं किया गया है। प्रवक्ता ने बताया कि ये सिर्फ एक डिस्प्ले थी और इससे ज्यादा कुछ नहीं।

बैंक ग्राहक को क्या लगा

बैंक ग्राहक को क्या लगा

जिस बैंक ग्राहक के खाते में ये पैसा आया उन्हें लगा कि बैंक खुद इस गलती को ढूंढ लेगा। मगर उन्हें अपने रिलेशनशिप मैनेजर से खुद संपर्क करना पड़ा। उन्होंने इस रहस्यमय पैसे के बारे में पूछा जो उनके खाते में ऑनलाइन और मोबाइल ऐप दोनों जगह दिखा रहा था। ये पहली बार नही है जब बैंक की तरफ अरबों डॉलर की गड़बड़ी सामने आई है। इस महीने की शुरुआत में बैंक सामने एक अस्थायी समस्या आई थी जिसके कारण कुछ ग्राहकों का ऑनलाइन और मोबाइल-बैंकिंग पर गलत बैलेंस देखने को मिला था। यह गलती इसी 245 करोड़ डॉलर वाले मामले की तरह थी। मगर इस मामले में ग्राहकों के खाते में जीरो बैलेंस दिख रहा था।

सिटी ग्रुप की तरफ से भी हुई है गड़बड़

सिटी ग्रुप की तरफ से भी हुई है गड़बड़

गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका के तीसरे सबसे बड़े बैंक सिटी ग्रुप ने रेवलॉन नाम की कंपनी की तरफ से इसके लेनदारों को 90 करोड़ डॉलर भेज दिए थे। ये मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। कुछ ने स्वेच्छा से पैसा वापस कर दिया है, मगर कुछ ने पैसा लौटाने से इंकार कर दिया है, जिसमें ब्रिगेड कैपिटल मैनेजमेंट और हायर इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स शामिल हैं। इन दोनों फर्म्स के वकीलों का कहना है कि फर्मों ने स्वीकार नहीं किया कि ट्रांसफर गलती से हुआ है। सिटीग्रुप की तरफ से इस गड़बड़ी को क्लरिकल एरर करार कहा गया था। गौरतलब है कि रेवलॉन एक कॉस्मैटिक कंपनी है, जो संकट में है।

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