US Iran peace deal: ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने गुरुवार सुबह कहा कि शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत की योजना की अभी पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, AP के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। व्हाइट हाउस ने यह भी घोषणा की कि ट्रंप ने वर्साय में रहते हुए ईरान के साथ टकराव खत्म करने के मकसद से समझौते पर हस्ताक्षर किए, हालांकि हस्ताक्षर के समय कोई मीडिया कैमरा मौजूद नहीं था।

रॉयटर्स ने बघाई के हवाले से कहा, "शुक्रवार की बैठक की पुष्टि कुछ घंटे पहले तक थी, लेकिन जब यह तय हुआ कि दोनों पक्षों (ईरान और अमेरिका) के राष्ट्रपति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, तो फिलहाल शुक्रवार की बैठक पर विचार-विमर्श रोकने का फैसला किया गया।" ॉ
एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान दोनों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। पहले की रिपोर्टों में संकेत दिया गया था कि ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रविवार को दस्तावेज पर डिजिटल हस्ताक्षर किए थे और औपचारिक हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होगा। हालांकि, एपी ने गुमनाम रूप से बात कर रहे एक अधिकारी का हवाला देते हुए कहा कि ट्रंप ने बुधवार को वर्सेल्स में व्यक्तिगत रूप से समझौते पर हस्ताक्षर किए, और उसी दिन पेजेशकियान ने भी इस पर हस्ताक्षर किए।
आखिर अमेरिका-ईरान एग्रीमेंट में क्या-क्या है?
14-पॉइंट एग्रीमेंट (जिसे मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के नाम से जाना जाता है) कहता है कि ईरान के पास कभी भी न्यूक्लियर वेपन नहीं होगा, और देश के "रिकंस्ट्रक्शन और इकोनॉमिक डेवलपमेंट" के लिए 300 बिलियन डॉलर का फंड भी देता है। हालांकि US को कंट्रीब्यूट करने की जरूरत नहीं है। यह देशों और इजराइल के बीच लड़ाई शुरू होने के चार महीने बाद आया है। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को "परफॉर्मेंस-बेस्ड" (काम-काज पर आधारित) बताया है, जिसमें ईरान को तभी फायदा होगा जब वह अपने वादों को पूरा करेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
गुरुवार, 18 जून को शुरुआती ट्रेडिंग सेशन में तेल की कीमतों में गिरावट आई। यह गिरावट तब हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ। इस समझौते का मकसद विवाद को खत्म करना, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना और ईरानी तेल निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील देना है। उम्मीद है कि इस समझौते से हाल के इतिहास में ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में आई सबसे बड़ी रुकावट का समाधान हो जाएगा।


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