नई दिल्ली, जुलाई 26। कोरोना महामारी के समय रेल मंत्रालय ने बुजुर्गों को रेल किराए में मिलने वाली छूट को बंद कर दिया था। रेलवे बुजुर्गों को मिलने वाली इस छूट को अब पूरी तरह से खत्म करने की बात कह रही है। भारत के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि सीनियर सीटिजन को टिकट किराए में दी जाने वाले छूट की वजह से रेलवे को नुकसान हो रहा है, जिसके कारण इस सुविधा को फिलहाल बंद ही रखा जाएगा।
बुजुर्गों को किराए में मिलती है छूट
आपको बता दें कि कोरोना से पहले रेलवे 55 साल से उपर की महिलाओं को किराए में 50 फीसदी और 60 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को टिकट किराए में 40 फीसदी की छूट देती थी। कोरोना के के समय इसे बंद कर दिया गया था, लोग लगातार इसे फिर से लागू करने की मांग कर रहे है, लेकिन अब रेल मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि इसे फिर से लागू नहीं किया जा सकता है। रेलवे के इस फैसले के बाद लोगों में नाराजगी है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि अगर बुजुर्गों को रेल किराए में छूट देने से रेलवे को नुकसान हो रहा है तो फिर सांसदों और उनके परिवारों को फ्री रेल यात्रा क्यों दी जाती है।
सांसदो को मिलती है फ्री रेल सुविधा
भारतीय रेलवे मौजूदा और पूर्व सांसदो को ट्रेनों में फ्री यात्रा की सुविधा देती है। रेलवे के मुताबिक सांसद और उनकी पत्नी को ट्रेन के प्रथम श्रेणी या एग्जीक्यूटिव क्लास में फ्री सफर की सुविधा उपलब्ध होती है। आकड़ो के अनुसार पांच सालों में रेलवे ने सांसदों और पूर्व सांसदों के सफर पर 62 करोड़ रुपए खर्च किए है।
64 हजार करोड़ रुपए का होता है नुकसान
रेलवे के आकड़ो के अनुसार रेल किराए में सीनियर सीटिजंस को रियायत देने से रेलवे को 64 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। रेलवे ने बताया की साल 2019-20 में रेलवे को इतना नुकसान झेलना पड़ा था। रेलवे ने दावा किया कि वो लागत से कम पर लोगों को ट्रेन सा सफर उपलब्ध करवा रही है। रेलवे को अन्य सोशल कारणों से भी नुकसान होता है।


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