Tips & Tricks : इन बातों का न रखा ध्यान, तो पोर्टफोलियो में आएगी गिरावट

Investment : एक सफल इन्वेस्टर जो हैं। उसको अपनी इंवेस्टमेंट का ख्याल रखना चाहिए। पोर्टफोलियो को समय-समय पर चेक करते रहना चाहिए और जो परिस्थिति हैं। उसके मुताबिक सही फैसला लेना चाहिए। बहुत बार पोर्टफोलियो में कमी होने पर हम ध्यान नहीं देते हैं। जिस वजह से हम नुकसान में चले जाते हैं, तो फिर चलिए जानते हैं। कुछ बातों को जिनको ध्यान में रखना बहुत जरूरी हैं। नहीं तो आपका बना बनाया अच्छा खासा मुनाफा जा सकता हैं।

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क्यों पैसे महंगे इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करना

पापुलर इन्वेस्टमेंट ऑप्शन के साथ जो लगाते आ रही हैं। उसकी अवहेलना नहीं करें। जो ट्रेडिशनल इंश्योरेंस प्लान्स होते हैं। वो भी अधिक लागत के साथ आते हैं। यह शुरूआती सालों में आपके प्रीमियम का जो एक हिस्सा हैं। उसको खा जाती हैं। पहले साल में प्रीमियम की जो लागत हैं 70 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक हो सकती हैं और जब हर रिन्यूअल पर 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत खा जाती हैं। साथ ही यह जो प्लांस होते हैं। भारी सरेंडर प्लान के साथ आते हैं, जो आपके लिए समय से पहले जो निकासी हैं। उसको महंगा कर देती हैं। इसकी तुलना में जो यूलिप का प्लान हैं वो कम समय और एंबेडेड लागत के साथ आते हैं।

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जो लिक्विडिटी हैं उसका ध्यान रखें

जब भी किसी जो इंवेस्टमेंट पोर्टफोलियो हैं। उसमें ध्यान देते हैं, तो फिर उसमें जो लिक्विडिटी हैं। उसमें तो खास तौर पर ध्यान देना चाहिए। रिटर्न और सुरक्षा को लेकर इन्वेस्टर बेहद जागरूक रहते हैं। मगर जब लिक्विडिटी की बारी आती हैं वो उसको भूल जाते हैं। जो आपका पोर्टफोलियो हैं। उसमें किसी भी वक्त पर्याप्त लिक्विडिटी होना चाहिए। आप नहीं जानते हैं कि आपको कब कोई फाइनेंशियल इमरजेंसी आ जाएं।

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सोच समझकर रिस्क लें

यदि आप अपना जो पोर्टफोलियो हैं। उसमें अधिक वक्त से ध्यान नहीं दे रहे हैं, तो फिर आप खुद को रिस्क में डाल रहे हैं। जो निवेश की रिस्क प्रोफाइल हैं वो समय के साथ बदलती रहती हैं। अगर हम म्यूचुअल फंड को देखते हैं, तो फिर वो मेंडेट्स बदलते रहते हैं और दूसरी प्रोफाइल में जाते हैं। वो खुद को जो ओरिजनल रिस्क प्रोफाइल हैं। उससे बांधकर नही रखते हैं। इसी वजह से आपके निवेश की जो रिस्क प्रोफाइल हैं उसमें कोई भी बदलाव होता हैं, तो फिर उसको आपको ध्यान देना चाहिए साथ ही सही कदम को उठाना चाहिए।

आपके रिटर्न को अधिक टैक्स कम कर देगा

जो इंवेस्टमेंट इनकम हैं। उसमें ज्यादा टैक्स देनदारी एक ऐसी गलती हैं जो अक्सर बहुत से लोगों के पोर्टफोलियो में देखने को मिल जाती हैं। बहुत से लोग निवेश के ऑप्शन के चयन के समय टैक्स देनदारी पर ध्यान नहीं देते हैं जो बाद में अधिक टैक्स देने की वजह से जो रिटर्न होता हैं। वो कम रह जाता हैं। इसी वजह से आप जब भी इन्वेस्टमेंट का विकल्प का चयन करें। इस बात का जरूर ध्यान दे कि इंवेस्टमेंट, ब्याज या मैच्युरिटी की जो राशि हैं। उस पर क्या टैक्स की जो देनदारी हैं वो क्या बन रही हैं।

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