Gold Reserve: यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, सोने ने US Treasuries को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़ी रिजर्व संपत्ति का दर्जा हासिल कर लिया है। यह वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में एक बड़े बदलाव का संकेत है, क्योंकि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच सेंट्रल बैंक इस कीमती धातु का अपना भंडार लगातार बढ़ा रहे हैं।

ECB ने अपनी जून 2026 की रिपोर्ट, जिसका शीर्षक 'The International Role of the Euro' है, में बताया कि कुल आधिकारिक रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी 2025 के अंत तक बढ़कर 27% हो गई, जिसमें विदेशी मुद्रा और सोने का भंडार दोनों शामिल हैं। इस बढ़त ने सोने को US Treasuries से आगे कर दिया। US Treasuries की हिस्सेदारी आधिकारिक रिजर्व में 22% थी, जबकि यूरो की हिस्सेदारी 15% रही।
भारत के लिए क्यों है यह बड़ी खबर?
भारत के लिए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी पिछले कुछ वर्षों से लगातार अपने सोने के भंडार में बढ़ोतरी कर रहा है। वैश्विक स्तर पर सोने की बढ़ती अहमियत भारत की रणनीति को मजबूत करती है, क्योंकि सोना विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और वैश्विक आर्थिक झटकों से सुरक्षा देने वाला एक भरोसेमंद साधन माना जाता है। इसके अलावा, भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में से एक है, जहां सोना सिर्फ निवेश का माध्यम नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व भी रखता है।
भारत क्यों है फायदे की स्थिति में?
दुनिया में सोने की बढ़ती अहमियत भारत के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकती है। पहला, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पिछले कुछ वर्षों से लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहा है। ऐसे में जब सोने की कीमतें और वैश्विक महत्व बढ़ता है, तो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) की मजबूती भी बढ़ती है।
दूसरा, भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। भारतीय परिवारों, मंदिरों और संस्थानों के पास हजारों टन सोना मौजूद है। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी से इस संपत्ति का मूल्य भी बढ़ता है, जिससे घरेलू संपत्ति (Household Wealth) में इजाफा होता है।
तीसरा, अगर दुनिया धीरे-धीरे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करती है और सोने को अधिक महत्व देती है, तो भारत जैसे देश, जिन्होंने पहले से अपने स्वर्ण भंडार को मजबूत किया है, अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकते हैं। इससे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और मुद्रा जोखिमों से सुरक्षा मिलती है।
चौथा, भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्ध और वैश्विक वित्तीय अस्थिरता के दौर में सोना एक "सेफ हेवन" एसेट माना जाता है। इसलिए RBI के बढ़ते गोल्ड रिजर्व भारत को बाहरी आर्थिक झटकों से बचाने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, एक चुनौती भी है। भारत अपनी सोने की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए सोने की कीमतें बहुत अधिक बढ़ने पर आयात बिल और चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) बढ़ सकता है। इसके बावजूद, रिजर्व और संपत्ति के नजरिए से देखा जाए तो सोने का वैश्विक महत्व बढ़ना भारत के लिए कुल मिलाकर एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।


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