Gold Silver Outlook 2026: पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड ने रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छुआ, जबकि सिल्वर ने भी कई सालों के उच्च स्तर देखे। हालांकि हालिया दिनों में दोनों धातुओं में तेज करेक्शन देखने को मिला है, जिससे निवेशकों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या बुल रन खत्म हो गया है या यह सिर्फ अगली बड़ी तेजी से पहले का ठहराव है?
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया का मानना है कि मौजूदा गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर साबित हो सकती है।
कैसा है Gold Silver बाज़ार का माहौल?

16 जून 2026 तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 4,330 से 4,365 डॉलर प्रति औंस के बीच कारोबार कर रहा है। हालिया रिकॉर्ड हाई से इसमें कुछ करेक्शन आया है, लेकिन कीमतों में हल्की रिकवरी भी दिखाई दे रही है। वहीं चांदी 70 से 71 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी हुई है। घरेलू बाजार की बात करें तो MCX पर सोना लगभग 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर और चांदी 2.50 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर कारोबार कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले गोल्ड ने 5,400 डॉलर प्रति औंस और सिल्वर ने 110 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक उच्च स्तर भी छुए थे, जिसके बाद मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते करेक्शन देखने को मिला।
Gold पर क्या है अजय केडिया की राय?
अजय केडिया के अनुसार सोने में फिलहाल दबाव बना रह सकता है। उनका मानना है कि घरेलू बाजार में सोना 1.40 लाख रुपये तक भी फिसल सकता है, जो एक मजबूत सपोर्ट जोन माना जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गोल्ड पर कुछ समय तक दबाव बने रहने की संभावना है। हालांकि लंबी अवधि का ट्रेंड अब भी मजबूत और सकारात्मक बना हुआ है। उनके मुताबिक मौजूदा गिरावट किसी बड़े बेयर मार्केट का संकेत नहीं बल्कि एक स्वस्थ करेक्शन हो सकती है।
Silver ज्यादा बुलिश?
केडिया का मानना है कि चांदी आने वाले समय में सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। उनके अनुसार घरेलू बाजार में सिल्वर का भाव 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक भी आ सकता है, लेकिन यह स्तर निवेशकों के लिए अवसर साबित हो सकता है। सिल्वर की सबसे बड़ी ताकत इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बढ़ती खपत भविष्य में चांदी की मांग को मजबूत बनाए रख सकती है।
Gold Silver में तेज़ी का पैटर्न:
Ajay Kedia का मानना है कि मौजूदा बाजार का पैटर्न पहले भी कई बार देखा जा चुका है।
2008 का उदाहरण: फरवरी 2008 में गोल्ड पहली बार $150 के ऊपर पहुंचा था। इसके बाद कीमतों में गिरावट आई, लेकिन कुछ समय बाद बाजार ने नई तेजी शुरू की और सोना लगातार नए रिकॉर्ड बनाता चला गया।
2022 रूस-यूक्रेन युद्ध: रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी गोल्ड $130 के ऊपर पहुंचा था। इसके बाद करेक्शन आया, लेकिन अंत में सोने ने नए हाई लेवल बनाए। केडिया का मानना है कि 2026 में भी कुछ ऐसा ही पैटर्न देखने को मिल सकता है।
Kedia के अनुसार वैश्विक तनाव, ईरान से जुड़ी अनिश्चितता और निवेशकों की पोजिशनिंग के कारण जुलाई और अगस्त तक बाजार में दबाव बना रह सकता है। हालांकि यदि हालात सामान्य रहते हैं तो अक्टूबर-नवंबर से एक नई तेजी की शुरुआत हो सकती है। उनका मानना है कि अगले तीन वर्षों में गोल्ड और सिल्वर दोनों अपनी मौजूदा कीमतों से दोगुने तक पहुंचने की क्षमता रखते हैं।
ईरान, हॉर्मुज़ और "नो डील" फैक्टर
बाजार फिलहाल "नो डील" वाले परिदृश्य को काफी हद तक कीमतों में शामिल कर चुका है। ईरान का यूरेनियम कार्यक्रम जारी रहने की संभावना है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ अस्थायी रूप से खुल भी सकता है, लेकिन मध्य-पूर्व से जुड़ी अनिश्चितता पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही। यही कारण है कि सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में गोल्ड की मांग बनी रह सकती है।
Gold Silver के लिए ज़रूरी लेवल
Gold
- अंतरराष्ट्रीय सपोर्ट: 4,000 डॉलर
- घरेलू सपोर्ट: 1.40 लाख - 1.42 लाख रुपये
- अंतरराष्ट्रीय रेजिस्टेंस: 4,650 डॉलर
- घरेलू रेजिस्टेंस: 1.56 लाख रुपये
Silver
- अंतरराष्ट्रीय सपोर्ट: 53 डॉलर
- घरेलू सपोर्ट: 2.00 लाख - 2.10 लाख रुपये
- अंतरराष्ट्रीय रेजिस्टेंस: 76 डॉलर
- घरेलू रेजिस्टेंस: 2.64 लाख रुपये
कौन से फैक्टर बनाए रख सकते हैं तेजी?
1. भू-राजनीतिक तनाव: मिडिल ईस्ट में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। किसी भी नई अनिश्चितता से गोल्ड को सपोर्ट मिल सकता है।
2. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: चीन सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिससे लंबी अवधि की मांग मजबूत बनी हुई है।
3. सिल्वर की इंडस्ट्रियल डिमांड: सोलर पैनल, EV और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बढ़ती मांग चांदी के लिए बड़ा पॉजिटिव फैक्टर है।
4. सप्लाई की चुनौती: सिल्वर मार्केट में सप्लाई डेफिसिट की स्थिति भी कीमतों को समर्थन दे सकती है।
किन जोखिमों पर रखें नजर?
- किसी बड़े युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा
- वैश्विक बाजारों में Risk-On माहौल
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति
- डॉलर इंडेक्स में मजबूती
- रिकॉर्ड तेजी के बाद मुनाफावसूली
- निवेशकों के लिए रणनीति
Ajay Kedia का मानना है कि शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि का ट्रेंड अभी भी सकारात्मक दिखाई देता है। जुलाई-अगस्त के दौरान आने वाली गिरावटों को चरणबद्ध निवेश के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। वहीं अक्टूबर-नवंबर से बाजार में फिर से मजबूत मोमेंटम बनने की संभावना जताई जा रही है। सिल्वर में इंडस्ट्रियल डिमांड और सप्लाई की स्थिति को देखते हुए आने वाले वर्षों में यह सोने से बेहतर प्रदर्शन भी कर सकता है।


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