Gold Silver Investment Strategy: Buy करें या Wait? 2026 की पूरी Investment Strategy | Adib Noorani

Gold Silver Fall: सोना और चांदी पिछले कुछ महीनों में निवेशकों के पसंदीदा एसेट्स रहे हैं। लेकिन हालिया गिरावट ने कई निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। MCX पर सोना अपने ऑल टाइम हाई से करीब 10-12% तक टूट चुका है, जबकि चांदी में 30-50% तक का करेक्शन देखने को मिला है।

Gold Silver

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या अब Gold और Silver से दूरी बना लेनी चाहिए या यह खरीदारी का सुनहरा मौका है? एक्सपर्ट Adib Noorani का मानना है कि मौजूदा गिरावट से घबराने की बजाय निवेशकों को रणनीतिक तरीके से निवेश करना चाहिए।

Gold और Silver का रोल अब अलग हो चुका है

Adib Noorani के मुताबिक ज्यादातर भारतीय आज भी सोना और चांदी को सिर्फ बचत और सुरक्षा के नजरिए से देखते हैं। हालांकि अब दोनों धातुओं की भूमिका अलग हो चुकी है। सोना आज भी एक Safe Haven Asset है, जिसे सरकारें, केंद्रीय बैंक और निवेशक सुरक्षा के लिए खरीदते हैं। वहीं चांदी अब केवल कीमती धातु नहीं रही, बल्कि यह एक Industrial Metal बन चुकी है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई हाई-टेक इंडस्ट्रीज में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। यही वजह है कि लंबी अवधि में चांदी की मांग मजबूत बनी हुई है।

Gold Silver Fall: इतनी बड़ी गिरावट क्यों?

एक्सपर्ट के अनुसार किसी भी एसेट में जब तेज रैली आती है तो उसके बाद करेक्शन होना सामान्य प्रक्रिया है। पिछले सालों में Gold और Silver में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। इस दौरान संस्थागत निवेशकों ने बड़ा मुनाफा कमाया। इसके बाद डॉलर इंडेक्स की मजबूती, फेडरल रिजर्व की सख्त नीति और प्रॉफिट बुकिंग के कारण दोनों धातुओं में दबाव देखने को मिला। हालिया जियोपॉलिटिकल तनाव के दौरान भी सोना-चांदी में बड़ी तेजी नहीं आई क्योंकि बड़े निवेशकों ने फंड्स को अन्य एसेट्स और हेजिंग पोजिशन में शिफ्ट किया।

क्या अभी और गिरेंगे Gold-Silver?

नूरानी का कहना है कि जब तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व आक्रामक तरीके से ब्याज दरों में कटौती नहीं करता और डॉलर इंडेक्स कमजोर नहीं पड़ता, तब तक Gold और Silver में बहुत बड़ी तेजी की संभावना सीमित है। हालांकि उनका मानना है कि लंबी अवधि का ट्रेंड अभी भी बुलिश है। शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन बड़े स्तर पर बाजार कमजोर नहीं हुआ है।

निवेशकों के लिए सलाह: Breakout नहीं, Buy on Dips

एक्सपर्ट का मानना है कि निवेशकों को ऊंचे स्तर पर भागकर खरीदारी करने से बचना चाहिए।

उनके मुताबिक:

* Breakout देखकर खरीदारी न करें
* हर गिरावट में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाएं
* SIP और Staggered Investment Strategy अपनाएं
* तेजी आने पर आंशिक मुनाफावसूली करें
* फिर गिरावट आने पर दोबारा खरीदारी करें

इस रणनीति से निवेशकों का औसत खरीद मूल्य बेहतर रहेगा और जोखिम भी कम होगा।

Gold या Silver, किसमें ज्यादा अवसर?

दिलचस्प बात यह है कि अदीप नूरानी फिलहाल Silver को Gold से ज्यादा आकर्षक मानते हैं।

उनका तर्क है कि:

* Silver की Industrial Demand लगातार बढ़ रही है
* Supply बहुत ज्यादा नहीं है
* ETF निवेशकों की रुचि बनी हुई है
* लंबी अवधि में Silver, Gold से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है

हालांकि Silver में उतार-चढ़ाव Gold की तुलना में कहीं ज्यादा रहता है, इसलिए निवेशकों को धैर्य रखना होगा।

Gold ₹2 लाख और Silver ₹4 लाख कब पहुंचेगा?

पिछले कुछ महीनों में कई ग्लोबल संस्थानों ने Gold के लिए ₹2 लाख और Silver के लिए ₹4 लाख तक के लक्ष्य दिए थे।

लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि फिलहाल ऐसे लक्ष्य जल्द पूरे होते नहीं दिख रहे हैं। पहले Gold को अपने पुराने ऑल टाइम हाई को दोबारा हासिल करना होगा और उसके ऊपर टिकना होगा। उसके बाद ही नए रिकॉर्ड स्तरों की चर्चा की जा सकती है।

Portfolio में कितना Gold-Silver?

अदीप नूरानी के अनुसार निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का 20% से 25% हिस्सा बुलियन यानी Gold और Silver में रखना चाहिए।

Aggressive Investors

15% Silver
10% Gold

Conservative Investors

15-20% Gold
10% Silver

SIP करने वालों के लिए क्या है सही तरीका?

एक्सपर्ट का मानना है कि SIP की कोई निश्चित राशि नहीं होती। यह व्यक्ति की आय और बचत क्षमता पर निर्भर करता है। हालांकि वे सलाह देते हैं कि कुल आय का कम से कम 20% निवेश के लिए अलग रखना चाहिए। इसमें से 25-30% हिस्सा Gold और Silver जैसे बुलियन एसेट्स में लगाया जा सकता है।

Gold और Silver में आई हालिया गिरावट ने निवेशकों को जरूर परेशान किया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे घबराने की नहीं बल्कि रणनीतिक निवेश की स्थिति मानते हैं। Gold अभी भी सुरक्षा का मजबूत माध्यम है, जबकि Silver की औद्योगिक मांग इसे लंबी अवधि का आकर्षक निवेश विकल्प बना सकती है।

अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो मौजूदा करेक्शन को अवसर के रूप में देख सकते हैं। हालांकि निवेश हमेशा अपने जोखिम प्रोफाइल और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

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