
UP: यूपी के वाराणसी में 17 करोड़ रु की लागत से ईको फ्रेंडली घाट बन रहा है। गंगा तट पर जैन तीर्थंकर को समर्पित यह घाट पर्यटन का हब बनेगा। मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार अब जैन धर्म के 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभुजी के चार कल्याणकों (च्यवन, जन्म, दीक्षा और केवल्यज्ञान) के स्थान का कायाकल्प करने में जुटी है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब चंद्रप्रभु जी की जन्म भूमि चंद्रावती गांव में पक्के गंगा घाट का निर्माण कराया जाएगा। इस घाट की लंबाई की बात करें, तो फिर इसकी लंबाई 200 मीटर से अधिक होगी। इसके साथ ही यहां पर पर्यटन के हब भी विकसित होंगे।
अगर हम इसकी दूरी की बात करें तो फिट यह दूरी वाराणसी मुख्यालय से लगभग 23 किमी दूर होगी। यह वाराणसी से गाजीपुर हाइवे पर चंद्रावती गांव में बन रहा है। यह पर ही गंगा के किनारे 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभुजी की जन्मस्थली है।
यह चंद्रप्रभुजी का श्वेताम्बर और दिगंबर जैन मंदिर है। साइनेजेस, पार्किंग, टॉयलेट ब्लॉक, पोर्टेबल चेंजिंग रूम, हेरिटेज लाइट, बैठने के लिए पत्थर के बने बेंच होंगे। जालीनुमा खूबसूरत रेलिंग लगाई जाएगी। वर्ष 2024 इस घाट का निर्माण तक हो जाएगा।
पर्यटन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राजेंद्र कुमार रावत की तरफ से बताया गया है कि जैन धर्म को मानने वाले लाखों श्रद्धालु हर वर्ष यह आते हैं। घाट के पुनरुद्धार और सुविधा के बढ़ने से आने वाले वक्त में यह स्थान तीर्थ यात्रा का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
आगामी वक्त में इस घाट को पानी के रास्ते भी जोड़ने की योजना है। जिसे बोट से पर्यटन का प्रसार इस घाट तक हो सके। पर्यटन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर राजेंद्र कुमार रावत की तरफ से बताया गया है कि आने वाले वक्त में पर्यटन के नए केंद्र के रूप में ये जगह विकसित होगी, जिसका लाभ पर्यटन उद्योग को भी मिलेगा।
उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कारपोरेशन लिमिटेड के अधिकारी की तरफ से बताया गया है कि भगवान चंद्रप्रभुजी की जन्मस्थली के पास करीब 200 मीटर लंबे पक्के घाट का निर्माण कराया जा रहा है।
इसके साथ ही यह 3 प्लेटफार्म बनाएं जा रहे है ताकि तीर्थयात्रियों की सुविधा हो और घाट देखने में सुंदर लगे। इसके साथ ही घाट में नीचे उतरने के लिए सीढ़ियां भी होगी। इसके साथ ही पूरे घाट का हेरिटेज लुक होगा।
इसके साथ गाबियन और रेटेशन वाल से घाट तैयार किया जा रहा है, जिससे यह हो घाट है देखने में पुराने घर की तरह होगा और यह घाट बाढ़ में सुरक्षित होगा। पूरी तरह से यह निर्माण ईको फ्रेंडली होगा।


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