कोरोना का कहर : अगर लॉकडाउन बढ़ा तो इन 4 राज्यों की हालत हो जाएगी पतली

नयी दिल्ली। वित्त वर्ष 2020-21 के बजट के आधार पर चार राज्यों, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश, के निकट भविष्य में दबाव का सामना करने की संभावना है। दरअसल अगर लॉकडाउन 3 मई के बाद आगे बढ़ा तो इन चारों राज्यों के लिए भुगतान करना मुश्किल हो सकता है। भले ही इन राज्यों को मदद मिले मगर इनकी हालत पतली हो सकती है। इस बात का खुलासा रिसर्च फर्म इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने किया है। इंडिया रेटिंग्स ने 18 राज्यों के मासिक खर्च की गणना की है। इंडिया रेटिंग्स का इन राज्यों के बारे में अनुमान कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड (सीएसएफ), गारंटी रिडेम्पशन फंड (जीआरएफ), ऑक्शन ट्रेजरी बिल्स (एटीबी) और सरकारी सिक्योरिटीज, वित्त वर्ष 2020-21 का मार्केट लोन और बढ़े हुए वेज एंड मीन्स एडवांसेज (डब्लूएमए) में मौजूद लिक्विडिटी पर आधारित है। इंडिया रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों के अपने स्रोतों से महत्वपूर्ण राजस्व सूख गया है और यदि लॉकडाउन जारी रहता है तो कई और राज्यों को भुगतान करना मुश्किल होगा।

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कई राज्य काट चुके कर्मचारियों का वेतन
कई राज्यों ने पहले ही राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर दी है। ऐसी स्थिति में इंडिया रेटिंग्स का मानना है कि केंद्र सरकार को पैसे जुटाने का भारी काम करना होगा और इसे खर्च के लिए राज्य को देना होगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 17 अप्रैल को राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए डब्ल्यूएमए सीमा बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी है ताकि वे कर्ज लेने की बेहतर योजना बना सकें। रिपोर्ट में कहा गया है कि डब्ल्यूएमए राहत मदद करने के लिए बहुत कम है, क्योंकि इसका मतलब सिर्फ 19,335 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लिक्विडिटी है।

आरबीआई राज्यों को देता है खास सुविधा
आरबीआई सीएसएफ, जीआरएफ, एटीबी और सरकारी प्रतिभूतियों को गिरवी रखने पर राज्य सरकारों को विशेष लोन सुविधा देता है। इस सुविधा पर ली जाने वाली ब्याज दर रेपो दर से 200 बेसिस पॉइंट कम होती है। 29 फरवरी 2020 तक सभी राज्यों की मिलकर सीएसएफ में 12.88 लाख करोड़ रुपये, जीआरएफ में 7,407 करोड़ रुपये, सरकारी प्रतिभूतियों में 662 करोड़ रुपये और एटीबी में 48,102 करोड़ रुपये यानी कुल मिलाकर 18.5 लाख करोड़ रुपये थे।

ऐसे होती है राज्यों की कमाई
राज्य सरकारें एसओटीआर (जिसमें बिक्री कर, राज्य उत्पाद शुल्क, एसजीएसटी, भूमि राजस्व, टिकट और पंजीकरण आदि), केंद्रीय टैक्स में हिस्सा और केंद्र सरकार से प्राप्त अनुदान के माध्यम से अपना राजस्व कमाती हैं। मगर लॉकडाउन अवधि के दौरान एसओटीआर में काफी गिरावट आई है। इससे राज्यों को झटका लगा है।

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