Jio, Airtel और Vodafone Idea क्यों हुए TRAI के खिलाफ, मिलेंगे महंगे Tariff Plan?

TRAI ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन रेगुलेशन्स में बदलाव का सुझाव दिया है। तो क्या देश के करोड़ों फीचर फोन और बुजुर्ग मोबाइल यूजर्स को सस्ते मोबाइल प्लान मिलने वाले हैं? या फिर टेलीकॉम कंपनियां इस रास्ते को बंद कर देंगी? दरअसल, TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एक नए प्रस्ताव को लेकर टेलीकॉम इंडस्ट्री और कंज्यूमर ग्रुप्स आमने-सामने आ गए हैं।

TRAI चाहती है कि मोबाइल कंपनियां ऐसे स्टैंडअलोन प्लान अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं जिनमें सिर्फ Voice Calling और SMS की सुविधा हो, लेकिन Data न हो। इन प्लान्स की कीमत कम हो और वैलिडिटी भी छोटी रखी जाए ताकि केवल कॉल और मैसेज इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को राहत मिल सके, लेकिन Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea ने इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया है।

TRAI का प्रस्ताव क्या है?

TRAI

TRAI ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन रेगुलेशन्स में बदलाव का सुझाव दिया है। इसके तहत टेलीकॉम कंपनियों को Voice + SMS Only प्लान्स उपलब्ध कराने होंगे। ऐसे प्लान खास तौर पर उन लोगों के लिए होंगे जो इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते या बहुत कम करते हैं। TRAI का मानना है कि लाखों यूजर्स केवल कॉल और OTP जैसे SMS के लिए मोबाइल रखते हैं, ऐसे में उन्हें डेटा के लिए अतिरिक्त भुगतान नहीं करना चाहिए।

Jio ने क्यों किया विरोध?

Reliance Jio का कहना है कि आज के 4G और 5G नेटवर्क पूरी तरह IP आधारित हैं। यानी Voice Calling भी Data Network के जरिए ही संचालित होती है। ऐसे में Voice और Data को पूरी तरह अलग करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। Jio का यह भी कहना है कि सस्ते और कम वैलिडिटी वाले प्लान्स से फ्रॉड और स्पैम कॉल्स बढ़ सकती हैं क्योंकि स्कैमर्स ऐसे सस्ते कनेक्शन्स का दुरुपयोग कर सकते हैं। कंपनी के अनुसार उसके एंट्री लेवल ग्राहकों में लगभग 88% यूजर्स डेटा का इस्तेमाल करते हैं। वहीं मौजूदा Voice Only प्लान्स को बहुत कम ग्राहक चुन रहे हैं।

Vodafone Idea की चिंता क्या है?

Vodafone Idea का तर्क है कि अगर डेटा को पूरी तरह हटा दिया गया तो कई यूजर्स को अनजाने में नुकसान हो सकता है। आज स्मार्टफोन में बैकग्राउंड में कई सर्विसेज चलती रहती हैं। ऐप अपडेट्स, ऑटो सिंक, OTP वेरिफिकेशन और अन्य सिस्टम सर्विसेज थोड़ी-बहुत डेटा खपत करती हैं। ऐसे में यदि किसी प्लान में डेटा शामिल नहीं होगा तो ग्राहकों को Pay-As-You-Go दरों पर महंगा भुगतान करना पड़ सकता है। कंपनी का कहना है कि इससे "Bill Shock" की स्थिति पैदा हो सकती है।

Airtel ने क्या कहा?

Bharti Airtel का कहना है कि भारत का पूरा Digital Public Infrastructure अब Mobile First मॉडल पर काम कर रहा है। चाहे UPI हो, आधार आधारित सेवाएं हों, सरकारी ऐप्स हों या डिजिटल भुगतान, हर जगह डेटा की जरूरत पड़ती है। Airtel का मानना है कि Voice Only प्लान्स एक ऐसा वर्ग तैयार कर सकते हैं जो डिजिटल सेवाओं से बाहर रह जाएगा। कंपनी के अनुसार यह सरकार की डिजिटल इंडिया नीति की भावना के भी विपरीत है।

कंज्यूमर ग्रुप्स क्या कह रहे हैं?

कंज्यूमर एडवोकेट्स और कई NGOs का कहना है कि देश में आज भी 30 से 35 करोड़ फीचर फोन यूजर्स मौजूद हैं। इनमें से लगभग 10 से 15 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते, लेकिन उन्हें डेटा वाले प्लान खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। Consumer Protection Association, गुजरात के अनुसार ऐसे यूजर्स हर साल करीब 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों, आदिवासी इलाकों, पहाड़ी क्षेत्रों और बुजुर्ग आबादी के बीच बड़ी संख्या में ऐसे ग्राहक हैं जिन्हें केवल कॉल और SMS की जरूरत होती है। कंज्यूमर ग्रुप्स का यह भी दावा है कि एंट्री लेवल रिचार्ज प्लान्स में डेटा की प्रभावी कीमत 94 से 99 रुपये प्रति GB तक पहुंच जाती है, जो बड़े प्लान्स की तुलना में काफी महंगी है।

अब आगे क्या होगा?

यह पूरा मुद्दा TRAI द्वारा आयोजित Open House Discussion में उठाया गया। फिलहाल सभी बड़ी टेलीकॉम कंपनियां मौजूदा व्यवस्था यानी Status Quo बनाए रखने की मांग कर रही हैं। अगर TRAI अपने प्रस्ताव को आगे बढ़ाती है तो भविष्य में सस्ते Voice और SMS Only प्लान्स बाजार में आ सकते हैं। हालांकि टेलीकॉम कंपनियों के कड़े विरोध को देखते हुए फिलहाल ऐसा होना आसान नहीं दिख रहा।

मोबाइल यूजर्स के लिए क्या मायने?

अगर आप फीचर फोन इस्तेमाल करते हैं या बहुत कम डेटा उपयोग करते हैं, तो अभी भी आपको ज्यादातर मामलों में डेटा बंडल वाले प्लान खरीदने पड़ रहे हैं, ऐसे यूजर्स को सलाह है कि उपलब्ध Voice Only या Minimum Data प्लान्स की तुलना करें और स्मार्टफोन में Auto Update, Auto Sync और Background Data जैसी सुविधाएं बंद रखें ताकि अनावश्यक खर्च से बचा जा सके।

एक तरफ टेलीकॉम कंपनियां तकनीकी, सुरक्षा और डिजिटल इन्क्लूजन का हवाला देकर Voice Only प्लान्स का विरोध कर रही हैं। दूसरी तरफ कंज्यूमर ग्रुप्स का कहना है कि करोड़ों गरीब, ग्रामीण और फीचर फोन यूजर्स को ऐसी सेवाओं के लिए भुगतान करना पड़ रहा है जिनका वे इस्तेमाल ही नहीं करते। अब निगाहें TRAI के अगले फैसले पर हैं। क्योंकि यह फैसला तय करेगा कि मोबाइल सेवाएं और सस्ती होंगी या मौजूदा व्यवस्था ही जारी रहेगी।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+