Middle East War Impact: कल्पना कीजिए... आपने सालों की कमाई लगाकर एक फ्लैट बुक किया। बिल्डर ने कहा कि 2026 में चाबी मिल जाएगी। परिवार नए घर में शिफ्ट होने के सपने देख रहा है। लेकिन अचानक दुनिया के दूसरे कोने में चल रही जंग आपके घर के सपने पर ब्रेक लगा दे! सुनने में अजीब लगता है, लेकिन फिलहाल कुछ ऐसा ही खतरा भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर मंडरा रहा है। पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर अब भारतीय हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर भी दिखाई देने लगा है।

आखिर मामला क्या है-
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी ANAROCK की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारत के 7 बड़े शहरों में रिकॉर्ड 5.4 लाख से ज्यादा घरों की डिलीवरी होने वाली है। यह पिछले एक दशक का सबसे बड़ा हाउसिंग डिलीवरी ईयर माना जा रहा है। लेकिन चिंता की बात यह है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इन घरों की डिलीवरी में देरी हो सकती है।
अब सवाल है कि जंग और आपके घर का क्या कनेक्शन? बहुत से लोगों के मन में सवाल होगा कि मिडिल ईस्ट में युद्ध हो रहा है, तो भारत में मकानों पर असर क्यों पड़ेगा? इसका जवाब सप्लाई चेन और निर्माण लागत में छिपा है।
जब युद्ध होता है तो:
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं
शिपिंग और ट्रांसपोर्ट महंगे हो जाते हैं
माल की सप्लाई प्रभावित होती है
इंश्योरेंस और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ जाती है
स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर और इलेक्ट्रिकल उपकरण महंगे हो जाते हैं
इन सभी चीजों का सीधा असर बिल्डिंग निर्माण पर पड़ता है।
बिल्डर्स की सबसे बड़ी टेंशन क्या है-
कोरोना के समय मजदूरों की कमी बड़ी समस्या थी। लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। अभी मजदूर उपलब्ध हैं और निर्माण कार्य पूरी तरह रुका नहीं है। परेशानी यह है कि निर्माण सामग्री लगातार महंगी होती जा रही है और समय पर मिल भी नहीं रही है इसलिए बिल्डर्स के लिए अभी ये सबसे बड़ा सर दर्द बना हुआ है क्योकि
अगर लागत बढ़ती रही तो:
प्रोजेक्ट पूरा करने का खर्च बढ़ेगा
बिल्डर्स के मार्जिन पर दबाव आएगा
काम की रफ्तार धीमी हो सकती है
पजेशन डेट आगे बढ़ सकती है
किन शहरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है? 2026 में जिन शहरों में सबसे ज्यादा घरों की डिलीवरी तय है, उनमें शामिल हैं:
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) - करीब 2.07 लाख यूनिट
पुणे - करीब 1 लाख यूनिट
बेंगलुरु - करीब 69 हजार यूनिट
हैदराबाद - करीब 63,700 यूनिट
NCR - करीब 39 हजार यूनिट
चेन्नई - करीब 35,600 यूनिट
कोलकाता - करीब 22,500 यूनिट
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे बड़े बाजार लागत बढ़ने की स्थिति में सबसे ज्यादा दबाव महसूस कर सकते हैं। क्या घर खरीदने वालों को ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं, जब बिल्डर्स की लागत बढ़ती है तो उसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंच सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में निर्माण सामग्री की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का जिक्र किया गया है। कई डेवलपर्स पहले ही महंगे कच्चे माल और बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत को लेकर चिंता जता चुके हैं। ऐसे में नए प्रोजेक्ट महंगे लॉन्च हो सकते हैं कुछ प्रोजेक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है खरीदारों का बजट प्रभावित हो सकता है
पिछले कुछ सालों में क्या हुआ? दिलचस्प बात यह है कि कोरोना के बाद भारत के रियल एस्टेट सेक्टर ने शानदार रिकवरी दिखाई। 2020 में लगभग 2.14 लाख घरों की डिलीवरी हुई थी। इसके बाद हर साल संख्या बढ़ती गई और 2025 में यह करीब 5.19 लाख यूनिट तक पहुंच गई। अब 2026 में रिकॉर्ड 5.4 लाख यूनिट डिलीवरी का लक्ष्य रखा गया है। यानी बिक्री तो अच्छी हुई, लेकिन अब असली परीक्षा इन घरों को समय पर पूरा करके खरीदारों को सौंपने की है।
आम खरीदार को क्या करना चाहिए? अगर आपने घर बुक किया हुआ है तो घबराने की जरूरत नहीं है बस कुछ जरुरी चीज़ो का ध्यान रखें और सावधानी बरते ताकि आपको आपका घर मिलने में किसी तरीक़े की परेशानी का सामना न करना पड़े
ध्यान देने वाली बातें :
बिल्डर से प्रोजेक्ट की प्रगति की नियमित जानकारी लेते रहें
RERA पोर्टल पर प्रोजेक्ट स्टेटस चेक करते रहें
पजेशन टाइमलाइन से जुड़े अपडेट्स पर ध्यान दें
किसी भी देरी की स्थिति में लिखित सूचना मांगें
अतिरिक्त भुगतान या कीमत बढ़ने से जुड़े क्लॉज समझ लें
मिडिल ईस्ट की जंग हजारों किलोमीटर दूर हो सकती है, लेकिन आज की ग्लोबल अर्थव्यवस्था में उसका असर भारत के घर खरीदार तक पहुंच सकता है। 2026 भारत के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सिर्फ बिक्री का नहीं, बल्कि डिलीवरी का साल होगा। अगर वैश्विक हालात और नहीं बिगड़े तो लाखों लोगों को अपने सपनों का घर समय पर मिल सकता है। लेकिन अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो बढ़ती लागत और सप्लाई चेन की मुश्किलें लाखों घरों की चाबी मिलने में देरी कर सकती
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