Kenya Airport Upgrade: Adani की डील रद्द होने के बाद चीन को मिला 2.9 बिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट, क्या केन्या को होगा बड़ा नुकसान? Kenya के सबसे बड़े और सबसे व्यस्त एयरपोर्ट जॉमो केन्याता इंटरनेशनल एयरपोर्ट (JKIA) का बड़ा अपग्रेड अब शुरू होने जा रहा है। लेकिन इस प्रोजेक्ट को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। वजह यह है कि जिस प्रोजेक्ट के लिए पहले भारत के Adani ग्रुप का प्रस्ताव था, अब वही काम चीन की सरकारी कंपनी China Communications Construction Company (CCCC) को दे दिया गया है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि चीन को दिया गया नया कॉन्ट्रैक्ट पहले के प्रस्ताव से लगभग 900 मिलियन डॉलर (करीब 7,500 करोड़ रुपये) महंगा बताया जा रहा है।
क्या है नया Kenya का JKIA प्रोजेक्ट?

Kenya Government ने China की सरकारी कंपनी CCCC को लगभग 2.9 बिलियन डॉलर (करीब 24,000 करोड़ रुपये) का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। यह एक EPC (Engineering, Procurement and Construction) कॉन्ट्रैक्ट है, जिसके तहत कंपनी एयरपोर्ट के विस्तार और आधुनिकीकरण का काम करेगी। इस प्रोजेक्ट को National Infrastructure Fund (NIF) के जरिए फंड किया जाएगा और काम जून 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2045 तक JKIA एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाकर 12 मिलियन यात्रियों प्रति वर्ष तक पहुंचाई जाए।
Adani का प्रस्ताव क्या था?
करीब दो साल पहले इसी प्रोजेक्ट के लिए भारत के Adani Group ने लगभग 2 बिलियन डॉलर का प्रस्ताव दिया था। यह प्रस्ताव PPP (Public Private Partnership) मॉडल पर आधारित था। इसके तहत निजी निवेश का इस्तेमाल किया जाना था, जिससे केन्या सरकार और वहां के टैक्सपेयर्स पर कम वित्तीय बोझ पड़ता। Adani प्रस्ताव में लगभग 30 साल का कंसेशन मॉडल शामिल था और एयरपोर्ट के विस्तार के लिए निजी फंडिंग का इस्तेमाल होना था।
चीन की डील क्यों चर्चा में है?
अब जो नया कॉन्ट्रैक्ट चीन की कंपनी CCCC को दिया गया है, उसकी लागत करीब 2.9 बिलियन डॉलर है। यानी यह पहले के अदानी प्रस्ताव से लगभग 900 मिलियन डॉलर ज्यादा है। इसी वजह से कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर पहले कम लागत वाला प्रस्ताव मौजूद था, तो अब केन्या को ज्यादा पैसा क्यों खर्च करना पड़ रहा है। हालांकि, सरकार का कहना है कि नए मॉडल में एयरपोर्ट का स्वामित्व Kenya Airports Authority के पास ही रहेगा।
कैसे रद्द हुई Adani Deal?

- 2022 से 2024: अदानी ग्रुप और केन्या सरकार के बीच JKIA एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत चल रही थी। लगभग 2 बिलियन डॉलर के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी।
- जुलाई 2024: फ्रांस में रहने वाले केन्याई एक्टिविस्ट और इन्फ्लुएंसर नेल्सन अमेन्या ने सोशल मीडिया पर कुछ दस्तावेज साझा किए। इसके बाद इस डील को लेकर विवाद बढ़ने लगा।
- 2024 के मध्य में: केन्या में विरोध प्रदर्शन हुए। एयरपोर्ट कर्मचारियों ने हड़ताल की। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर बड़ी बहस देखने को मिली। भारत में भी विपक्षी नेताओं ने इस मामले को उठाया।
- नवंबर 2024: केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने अदानी ग्रुप से जुड़ी एयरपोर्ट डील को रद्द कर दिया।
- 2025: फ्रांस में कई कथित नकली चीनी न्यूज वेबसाइटों की पहचान की गई। इन पर AI की मदद से चीन समर्थक कंटेंट फैलाने के आरोप लगे।
- मई 2026: अमेरिका में अदानी समूह से जुड़े मामले को लेकर नई चर्चा शुरू हुई जब अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने एक महत्वपूर्ण केस को आगे नहीं बढ़ाया।
- 11 जून 2026: केन्या सरकार ने आधिकारिक तौर पर चीन की कंपनी CCCC को 2.9 बिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दे दिया।
क्या विरोध अभियान की वजह से बदला फैसला?
कुछ लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया पर चलाए गए विरोध अभियान और लगातार उठाए गए आरोपों की वजह से अदानी ग्रुप की डील रद्द हुई। वहीं दूसरी तरफ विरोध करने वाले लोगों का कहना था कि इस डील में पारदर्शिता, टैक्स छूट और राष्ट्रीय हित से जुड़े सवाल थे, जिनका जवाब मिलना जरूरी था। इसी वजह से यह मुद्दा आज भी बहस का विषय बना हुआ है।
अफ्रीका में भारत और चीन की बढ़ती प्रतिस्पर्धा
JKIA प्रोजेक्ट को सिर्फ एक एयरपोर्ट प्रोजेक्ट नहीं माना जा रहा है। कई विशेषज्ञ इसे अफ्रीका में भारत और चीन के बीच बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा मानते हैं। चीन लंबे समय से अफ्रीका में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम करता रहा है। वहीं भारत की कंपनियां भी अब वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। ऐसे में केन्या का यह फैसला दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
JKIA एयरपोर्ट का अपग्रेड केन्या के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। लेकिन अदानी ग्रुप की डील रद्द होने और बाद में चीन को ज्यादा कीमत पर कॉन्ट्रैक्ट मिलने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केन्या ने एक सस्ता विकल्प खो दिया या फिर उसने अपने हितों को ध्यान में रखते हुए बेहतर फैसला लिया? इसका जवाब आने वाले वर्षों में मिलेगा, जब एयरपोर्ट प्रोजेक्ट पूरा होगा और उसकी वास्तविक लागत और लाभ सामने आएंगे।
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