Jan Dhan Account : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के हर आम आदमी से लेकर खास आदमी की पहुंच बैंक तक सुनिश्चित करने के लिए 2014 में 'पीएम जन-धन योजना' की शुरुआत की थी। 28 अगस्त 2014 को शुरु हुई इस योजना के तहत अब तक 56 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं।

इस संबंध में हाल ही केंद्र सरकार ने लोकसभा में पूरा विवरण साझा की थी। इस आंकड़े को देखकर बेशक देश में आम लोगों की पहुंच बैंकों तक सुनिश्चित होने का अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन इस आंकड़े के पीछे भी एक ऐसी सच्चाई है जिसे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे। तो चलिए डिटेल में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है...
अब तक 56 करोड़ से अधिक खुले जनधन खाते
प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के 11 साल के अंतराल में अब तक 56 करोड़ से ज़्यादा जन-धन खाते खोले गए हैं, जिनमें कुल जमा राशि 2.68 लाख करोड़ रुपये है। 38 करोड़ से ज़्यादा निःशुल्क रुपे कार्ड जारी किए गए हैं, जिससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिला है।
सरकार ने बताया है कि 13 अगस्त 2025 तक देश में पीएमजेडीवाई खातों की कुल संख्या 56.16 करोड़ तक पहुंच गई है। इसमें 55.7 प्रतिशत (31.31 करोड़) जन-धन खाताधारक महिलाएं हैं और 66.7 प्रतिशत (37.48 करोड़) जन-धन खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं।

वहीं सरकार ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) खातों में कुल जमा राशि 2,67,756 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। जहां खातों की संख्या तीन गुना बढ़ी है, वहीं कुल जमा राशि में लगभग 12 गुना वृद्धि हुई है।

हर खाते में कितनी है औसत जमा राशि
सरकार ने बताया है कि 13 अगस्त 2025 तक प्रति खाता औसत जमा राशि 4,768 रुपये है। अगस्त 2015 की तुलना में प्रति खाता औसत जमा राशि में 3.7 गुना वृद्धि हुई है। औसत जमा राशि में वृद्धि खातों के बढ़ते उपयोग और खाताधारकों में बचत की आदत के विकास का एक और संकेत है।

कितने खाताधारकों को जारी किए गए रुपे डेबिट कार्ड
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पीएमजेडीवाई के अंतर्गत 38.68 करोड़ से अधिक रुपे डेबिट कार्ड जारी किए गए हैं। सरकार ने बताया कि रुपे कार्ड, 1.11 करोड़ पीओएस/एमपीओएस मशीनों की स्थापना और यूपीआई जैसी मोबाइल आधारित पेमेंट सिस्टम की शुरुआत के साथ, डिजिटल लेनदेन की कुल संख्या वित्त वर्ष 2018-19 में 2,338 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 22,198 करोड़ हो गई है।
यूपीआई वित्तीय लेनदेन की कुल संख्या वित्त वर्ष 2018-19 में 535 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 18,587 करोड़ हो गई है। इसी प्रकार, पीओएस और ई-कॉमर्स पर रुपे कार्ड लेनदेन की कुल संख्या वित्त वर्ष 2017-18 में 67 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 93.85 करोड़ हो गई है।

पीएमजेडीवाई खातों की विशेषताएं
सरकार ने कहा है कि दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल के रूप में पीएमजेडीवाई लाखों वंचित नागरिकों के लिए बैंकिंग तक पहुंच को नए सिरे से परिभाषित कर रही है।
पूरी तरह से केवाईसी अनुपालन वाले पीएमजेडीवाई खातों में शेष राशि या लेनदेन की राशि की कोई सीमा नहीं है। यह एक बीएसबीडी खाता है। पीएमजेडीवाई खाताधारकों को निम्न निःशुल्क सुविधाएं प्रदान की जाती हैं...
- बैंक शाखा के साथ-साथ एटीएम/सीडीएम में नकदी जमा करना।
- किसी भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से या केंद्र/राज्य सरकार की एजेंसियों और विभागों द्वारा जारी किए गए चेक जमा/संग्रह के माध्यम से धन की प्राप्ति/जमा।
- एक महीने में जमा की जाने वाली राशि और राशि की कोई सीमा नहीं है।
- एक महीने में कम से कम चार बार नि:शुल्क निकासी की अनुमति है, जिसमें मेट्रो एटीएम सहित किसी भी एटीएम से निकासी शामिल है। इसके बाद की निकासी पर बैंक शुल्क ले सकते हैं।
- 2 लाख रुपये के अंतर्निहित दुर्घटना बीमा कवरेज के साथ नि:शुल्क रुपे डेबिट कार्ड।
13 करोड़ से अधिक जनधन खाते निष्क्रिय
अब सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि देश में खुले 56 करोड़ जनधन खातों में से 13 करोड़ से अधिक खाते निष्क्रिय हैं। यानी इसमें किसी तरह का कोई लेनदेन नहीं हो रहा है।
लोकसभा में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 31 जुलाई 2025 तक लगभग 56.03 करोड़ जनधन खाते थे और उनमें से लगभग 13.04 करोड़ खाते यानी करीब 23 प्रतिशत निष्क्रिय (Inoperative) थे।
वहीं, अप्रैल 2025 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने लगभग 15 लाख (1.5 million) ऐसे जनधन खाते बंद किए, जो निष्क्रिय शून्य-बैलेंस वाले थे।
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