FPI Sell-Off: विदेशी निवेशकों यानी FPIs (Foreign Portfolio Investors) ने भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में जमकर बिकवाली की, विदेशी निवेशकों ने जून में अब तक ₹63,450 करोड़ निकाले हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर वित्तीय, तेल-गैस और ऑटो सेक्टर पर देखने को मिला। आंकड़ों के मुताबिक, इन दो हफ्तों में FPIs ने वित्तीय सेवाओं (Financial Services) से जुड़े शेयरों में करीब ₹11,263 करोड़ की भारी बिकवाली की।

तेल और गैस (Oil & Gas) सेक्टर में ₹10,488 करोड़ और ऑटो सेक्टर (Auto Sector) में ₹9,044 करोड़ की निकासी दर्ज की गई। इस तरह साफ है कि बड़े विदेशी निवेशकों ने इन प्रमुख सेक्टर्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है, जिससे बाजार में हल्की कमजोरी और उतार-चढ़ाव देखने को मिला, क्योंकि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली का बाज़ार पर पड़ता है
तेल और गैस सेक्टर में बिकवाली-
तेल और गैस सेक्टर में बिकवाली की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में लगातार अस्थिरता रही। जब कच्चे तेल की कीमतें ऊपर-नीचे होती रहती हैं, तो इस सेक्टर की कंपनियों के मुनाफे को लेकर अनिश्चितता बढ़ जाती है, जिससे निवेशक सतर्क हो जाते हैं। वहीं, ऑटो सेक्टर पर भी इसका असर पड़ा, क्योंकि महंगा कच्चा तेल सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालता है। इससे गाड़ियों की मांग कम हो सकती है।
IT और FMCG सेक्टर में भी बिकवाली-
सिर्फ यही नहीं, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और FMCG सेक्टर में भी FPIs ने बिकवाली की। आईटी सेक्टर(IT Sector) में ₹6,733 करोड़ और एफएमसीजी में ₹5,063 करोड़ की निकासी हुई। इसका मतलब है कि विदेशी निवेशक फिलहाल कई सेक्टर्स में सतर्क रुख अपना रहे हैं और अपने निवेश को थोड़ा कम कर रहे हैं।
ग्लोबल कारणों से भी बिकवाली-
हालांकि, आम निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि FPIs की बिकवाली का मतलब यह नहीं है कि कंपनियों का प्रदर्शन खराब हो गया है। अक्सर विदेशी निवेशक ग्लोबल कारणों से पैसा निकालते हैं, जैसे अमेरिका में ब्याज दरों का बढ़ना या डॉलर का मजबूत होना। ऐसे समय में वे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों में निवेश करते हैं। इसलिए शेयर की कीमतों में गिरावट कई बार सिर्फ अस्थायी होती है।
भारतीय बाजार में भरोसा खत्म नहीं-
एक दिलचस्प बात यह भी है कि बिकवाली के बावजूद एफपीआई का भारतीय बाजार में भरोसा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उनके पोर्टफोलियो में अभी भी वित्तीय सेक्टर का हिस्सा 30% से ज्यादा बना हुआ है। वहीं ऑटो और कैपिटल गुड्स सेक्टर में भी उनकी हिस्सेदारी करीब 7.5% के आसपास है। इससे साफ होता है कि वे पूरी तरह बाहर नहीं जा रहे, बल्कि सिर्फ अपनी होल्डिंग्स को थोड़ा संतुलित कर रहे हैं।
विदेशी निवेशक वापस आएंगे?
आने वाले समय में निवेशकों को कुछ अहम चीजों पर नजर रखनी चाहिए। सबसे पहले कच्चे तेल की कीमतें, क्योंकि यह सीधे कई सेक्टर्स को प्रभावित करती हैं। इसके अलावा मानसून की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इससे ग्रामीण मांग और एफएमसीजी सेक्टर पर असर पड़ता है। साथ ही, वैश्विक ब्याज दरों में बदलाव भी यह तय करेगा कि विदेशी निवेश भारत में वापस आएंगे या नहीं।
[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]


Click it and Unblock the Notifications