आदित्य बिड़ला समूह शेल से स्प्रंग एनर्जी का अधिग्रहण करने वाला है, जिससे ABR की नवीकरणीय क्षमता लगभग 9.4 GW तक बढ़ जाएगी और भारत के 2030 के हरित ऊर्जा लक्ष्यों का समर्थन होगा। यह सौदा, नियामक मंजूरी के अधीन, ABR की हरित परियोजनाओं और रणनीतिक अधिग्रहण के माध्यम से तीन वर्षों के भीतर 20 GW तक पहुंचने की योजना में एक बड़ा कदम है।
आदित्य बिड़ला ग्रुप ने भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अपनी अब तक की सबसे बड़ी डील्स में से एक करते हुए शेल समर्थित स्प्रंग एनर्जी (Sprng Energy) का अधिग्रहण किया है। इस सौदे की कुल कीमत 1.8 अरब डॉलर (करीब ₹17,200 करोड़) है, जिसमें कर्ज भी शामिल है। यह अधिग्रहण समूह की स्वच्छ ऊर्जा विस्तार रणनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है और इससे भारत के तेजी से बढ़ते ग्रीन एनर्जी बाजार में उसकी स्थिति और मजबूत होगी।

यह अधिग्रहण ग्रासिम इंडस्ट्रीज की रिन्यूएबल एनर्जी शाखा आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स लिमिटेड (ABRen) के माध्यम से किया जाएगा। हालांकि, इस सौदे को पूरा करने के लिए नियामकीय मंजूरियां और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जानी बाकी हैं।
स्प्रंग एनर्जी के अधिग्रहण के बाद आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स की कुल रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता बढ़कर करीब 9.4 गीगावॉट (GW) हो जाएगी, जो मौजूदा क्षमता की तुलना में लगभग दोगुनी है। स्प्रंग एनर्जी के पास देश के कई राज्यों में फैली सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं का बड़ा पोर्टफोलियो है, जिसमें चालू परियोजनाओं के साथ-साथ निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं।
इस अधिग्रहण से समूह औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों की बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा मांग को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेगा और देश के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में उसकी हिस्सेदारी भी मजबूत होगी।
अगले तीन वर्षों में 20 GW क्षमता का लक्ष्य
स्प्रंग एनर्जी का अधिग्रहण आदित्य बिड़ला ग्रुप की दीर्घकालिक ग्रीन एनर्जी रणनीति का अहम हिस्सा है। कंपनी ने अगले तीन वर्षों में 20 गीगावॉट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है और यह सौदा उस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
करीब 10 GW के स्तर तक पहुंचने के बाद समूह ग्रीनफील्ड परियोजनाओं और रणनीतिक अधिग्रहणों के जरिए अपनी क्षमता का लगातार विस्तार करने की योजना पर काम करेगा। इसका उद्देश्य भारत के सबसे बड़े एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा प्लेटफॉर्म्स में से एक का निर्माण करना है।
कुमार मंगलम बिड़ला ने बताया परिवर्तनकारी कदम
आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने इस अधिग्रहण को कंपनी की रिन्यूएबल एनर्जी यात्रा में एक परिवर्तनकारी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह सौदा भारत की ऊर्जा परिवर्तन प्रक्रिया के अनुरूप है और समूह के दीर्घकालिक विजन को आगे बढ़ाता है।
उन्होंने कहा कि यह अधिग्रहण समूह की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है जिसके तहत वह ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने वाले क्षेत्रों में निवेश कर रहा है।
शेल ने रणनीतिक बदलाव के तहत बेची हिस्सेदारी
शेल के लिए स्प्रंग एनर्जी की बिक्री उसकी वैश्विक कारोबारी रणनीति का हिस्सा है। कंपनी अपने पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने और उन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है जहां लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना है। शेल ने वर्ष 2022 में स्प्रंग एनर्जी का अधिग्रहण किया था और अब अपनी वैश्विक रणनीति के तहत इसे बेचने का फैसला लिया है।
भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन को मिलेगा बल
यह अधिग्रहण ऐसे समय हुआ है जब भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े अधिग्रहण देश में रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, परियोजनाओं के तेजी से विकास और स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद आदित्य बिड़ला ग्रुप देश की अग्रणी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल हो जाएगा। यह सौदा न केवल समूह की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को नई ऊंचाई देगा, बल्कि भारत के हरित विकास, ऊर्जा सुरक्षा और टिकाऊ भविष्य के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगा।


Click it and Unblock the Notifications