How Union Budget 2024 Is Prepared: अक्सर हम बजट के बारे में तो सुनते हैं, पर इसे रेडी कैसे किया जाता है, इसकी जानकारी हमें नहीं होती है। आज हम आपको इसी प्रक्रिया के बारे में बताने जा रहे हैं कि बजट को कैसे रेडी किया जाता है, ताकि आपको इससे जुड़ी हुई बाकी चीज भी आसानी से समझ में आ जाएं। इतने बड़े देश का बजट बनाना कोई बच्चों का खेल नहीं है कि यह काम दो-चार दिन के अंदर कर लिया जाएगा। बजट बनाने के लिए पूरा कैलकुलेशन लगाना पड़ता है और उसके बाद जो भी सबसे ज्यादा जरूरी पहलू होते हैं, उनके लिए सबसे ज्यादा पैसा पास किया जाता है। यह केंद्र सरकार का सबसे बड़ा फाइनेंशियल दस्तावेज होता है। जब भी बजट रेडी होता है तो लगभग सभी मंत्रालय से उनके खर्च और उनके आवंटित किए गए पैसों की जानकारी मांगी जाती है। इसके बाद उसका बारीकी से विश्लेषण किया जाता है और इन सब के बाद वित्त मंत्रालय के अधिकारी द्वारा उसे मंजूर किया जाता है। इन्हीं सब करणों की वजह से यह प्रक्रिया काफी लंबी हो जाती है।
आपको बताते चलें कि इस बार का बजट पूर्ण बजट नहीं होगा, क्योंकि इसके 2 महीने बाद लोकसभा चुनाव होने हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात की घोषणा काफी पहले ही कर दी थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बात कही है कि इस अंतिम बजट में कोई भी बड़ी योजना की घोषणा नहीं की जाएगी। अब जो भी सरकार सत्ता में आएगी वह जुलाई के महीने में पूर्ण बजट ले आएगी। इसके पहले साल 2019 में भी केंद्र सरकार द्वारा अंतिम बजट पेश किया गया था, क्योंकि उस बजट के आने के बाद भी लोकसभा चुनाव होने थे। इसके बाद भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2019 में 5 जुलाई को ही नया और पूर्ण बजट पेश किया था।

बजट का वित्त वर्ष 1 अप्रैल से लेकर 31 मार्च तक का होता है। इस दौरान सरकार अपनी आय और खर्च का अनुमान संसद में पेश करती है। हालांकि यह काम देखने में काफी आसान लगता है पर होता उतना ही मुश्किल है। आपको बता दें कि कई सारे डिपार्टमेंट के साथ आपस में कोऑर्डिनेट करके सही डाटा निकालने में सरकार को महीना लग जाते हैं, यही कारण है कि बजट पेश करने के 5 महीने पहले से उसकी तैयारी शुरू कर दी जाती हैं।
बजट बनने से पहले फाइनेंस मिनिस्ट्री द्वारा दूसरे सभी मंत्रालय से अगले 1 साल के लिए खर्च का प्रस्ताव मंगाया जाता है। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेशों को भी उनके डिमांड के बारे में पूछा जाता है। इसके बाद आगे आने वाली परियोजना और खर्च को देखते हुए सभी मंत्रालय अपना अपना 1 साल का खर्च बताते हैं, इसके बाद वित्त मंत्रालय जरूरत के हिसाब से सबको फंड आवंटित करता है।
आपको बता दें कि रेवेन्यू सेक्रेटरी को सभी मिनिस्ट्री राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रपोजल भेजे जाते हैं। इन सभी प्रस्तावों पर फाइनेंस मिनिस्ट्री के टॉप लेवल ऑफिसर विचार करते हैं। डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर और नीति आयोग भी इन सभी प्रस्तावों का विश्लेषण करते हैं। इसके बाद वित्तीय राजस्व और तमाम चीजों का अंदाजा लगाया जाता है और बजट डेफिसिट का अंदाजा लगाने के बाद ही पैसे आवंटित किए जाते हैं।
बजट पेश होने से पहले संसद में हलवा सेरेमनी होती है। इसमें बजट बनाने वाली टीम के सभी सदस्यों में हलवा बांटा जाता है। गौरतलब है कि वित्त मंत्री भी इस समारोह में शामिल होते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बजट बनाने वाले लोगों का संपर्क बाहर से एकदम कट जाता है। उन्हें किसी को फोन करने या फोन रिसीव करने की भी इजाजत नहीं होती है। इसके अलावा लगातार इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट के ऑफिसर भी उन सभी लोगों पर नजर रखते हैं।
क्योंकि बजट किसी भी देश का इतना महत्वपूर्ण मामला होता है, जिसकी जानकारी लीक नहीं होनी चाहिए इसलिए इतनी सुरक्षा भी लगाई जाती है।
बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी लेना भी अनिवार्य होता है। उसके बाद कैबिनेट को इस बजट की जानकारी दी जाती है। यह सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बजट के कुछ जरूरी कागजात हमेशा एक लाल कलर के बैग में बांध कर ले आए जाते हैं, जिसे फिर 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाता है। संसद में बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री का उसे पर भाषण भी होता है। इसमें वह लगभग हर पहलू को कवर करते हैं इसलिए कम से कम यह भाषण एक से डेढ़ घंटे का तो होता ही है।
इस पूरी प्रक्रिया के बाद सरकार के द्वारा बजट पेश किया जाता है जिसमें हर मंत्रालय को आवंटित किए गए फंड की जानकारी दी जाती है। इसके अलावा सरकार द्वारा लाई जा रही नई योजनाओं की जानकारी भी लोगों को दी जाती है। अगर टैक्स स्लैब में या फिर ईपीएफओ में कोई बदलाव होता है तो इसके बारे में भी लोगों को बताया जाता है।
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