नयी दिल्ली। कोरोना संकट आने से भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी झटका लगा। इसीलिए सरकार राजस्व बढ़ाने के रास्ते तलाश रही है। इसी कड़ी में उम्मीद है कि सरकार देश की सबसे बड़ी और सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी में हिस्सेदारी बेच सकती है। एलआईसी में 15 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया जा सकता है। 2 दिन बाद केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा और इसी में एलआईसी में सरकार हिस्सेदारी कम करने का ऐलान कर सकती है। इससे सरकार को अच्छा खासा पैसा मिलेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले बजट में सरकार ने एलआईसी का आईपीओ लाकर इसमें अपनी हिस्सेदारी कम करने की बात कही थी। इसकी तैयारियां भी चल रही हैं। मगर कोरोना संकट के कारण पिछले साल आईपीओ में काफी देरी हुई। सरकार का एलआईसी में हिस्सा बेचने का प्लान कोरोना संकट से पहले का है।
इन बैंकों का भी लग सकता है नंबर
एलआईसी के अलावा कुछ बैंकों में भी सरकार हिस्सेदारी कम कर सकती है। इन बैंकों में आईडीबीआई बैंक, सेंट्रल बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल हैं। पिछले साल एलआईसी का आईपीओ लाने में कोरोना के अलावा जिन कारणों से देरी हुई, उनमें कानूनी दिक्कत और शेयर बाजार में अस्थिरता शामिल है। इन्हीं वजहों से एलआईसी के आईपीओ लाने की प्रोसेस काफी धीमी रही।
अगले वित्त वर्ष में एलआईसी का आईपीओ संभव
अभी ये तय नहीं है कि सरकार एलआईसी में अपनी कितनी हिस्सेदारी बेचने का प्लान बना रही है। मगर अनुमान है कि ये 15 फीसदी तक हो सकता है। बता दें कि अगले वित्त वर्ष, जो कि 1 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है, में एलआईसी का आईपीओ लाया जा सकता है। पिछले साल अनुमान लगाया जा रहा था कि सरकार एलआईसी की 10 फीसदी हिस्सेदारी बेच कर 90000 करोड़ रु जुटा सकती है।
संसद की मंजूरी लेनी होगी
एलआईसी के आईपीओ में कानूनी दिक्कतें हैं। इसलिए सरकार को संसद की मंजूरी चाहिए होगी। सरकार पर एक तरफ से दबाव भी है। चल रहे वित्त वर्ष में एयर इंडिया और भारत पेट्रोलियम में विनिवेश न कर पाने का दबाव। इसलिए सरकार वित्त वर्ष 2021-22 में एलआइसी का आइपीओ लाने का भरपूर प्रयास करेगी। वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार ने 2.1 लाख करोड़ रु का विनिवेश लक्ष्य रखा था। मगर इसमें से केवल सात फीसदी लक्ष्य ही पूरा हो पाया है।
एलआईसी के आईपीओ का विरोध
बता दें कि एलएआईसी के विनिवेश का विरोध भी हुआ। पिछले साल अखिल भारतीय एलआईसी कर्मचारी महासंघ ने इसका विरोध किया था। इस संगठन ने पीएम मोदी को पत्र लिखा था और एलआईसी को बचाने की बात कही थी। संगठन ने कहा था कि एलआईसी में विनिवेश 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के खिलाफ है। प्रस्तावित आईपीओ प्रोसेस को लेकर बीमा निगम के कर्मचारियों के चिंतित होने की भी बात कही गयी थी।
कुछ बैंक हो सकते हैं प्राइवेट
सरकार के रेवेन्यू स्रोत दबाव में हैं। इसलिए सरकार बजट में विनिवेश पर अधिक ध्यान दे सकती है। संभावना ये भी है कि कुछ सरकारी बैंकों को प्राइवेट करने का ऐलान किया जा सकता है। कई क्षेत्रों को अभी भी महामारी से होने वाले नुकसान से उबरने के लिए सरकार से निरंतर समर्थन की जरूरत है।
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