नयी दिल्ली। हाल ही में सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने दूरसंचार विभाग (डीओटी) को कहा था कि वे बीएसएनएल और एमटीएनएल को अपना बकाया भुगतान करने का निर्देश दे। अब बीएसएनएल के सामने एक और परेशानी आ गई है, जिसका खामियाजा इसके ग्राहकों को भुगतना पड़ेगा। दरअसल बीएसएनएल पर और भी बकाया है, जिसे न चुकाने पर इसकी सेवाओं में अड़चन आ सकती है, जिसकी सीधा कंपनी के ग्राहकों पर पड़ेगा। टावर एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (टीएआईपीए) ने बताया है कि यदि बीएसएनएल पीयूसी को बरकरार रखना चाहती है तो उसे कई चीजों का बिल क्लियर करना होगा, जिनमें बिजली, डीजल और बैटरी आदि शामिल हैं। इसके अलावा टीएआईपीए ने इनका भुगतान न करने के कारण बीएसएनएल की बिल मोबाइल सेवाओं को पहले ही कुछ जगह रोक दिया है।
काफी गंभीर हो चुकी है स्थिति
टीएआईपीए के महानिदेशक टीआर दुआ ने बीएसएनएल को लिखे पत्र में कहा कि बीएसएनएल की कुल बकाया राशि के लगभग 1,500 करोड़ रुपये, जो लंबे समय से लंबित है, पर पहुंच गई है, जिससे स्थिति अत्यधिक गंभीर हो गई है। पहले से ही दूरसंचार इंडस्ट्री वित्तीय संकट से गुजर रही है और बीएसएनएल का यह बकाया दूरसंचार के वित्तीय संकट का एक फालतू कारण है। टीएआईपीए, जिसने डीओटी के हस्तक्षेप की मांग की है, ने बीएसएनएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पीके पुरवार को पत्र लिखा है।
बीएसएनएल ग्राहकों को हो सकती है दिक्कत
यदि बीएसएनएल समय पर इस बकाया का भुगतान नहीं करती तो इसका सीधा असर कंपनी के ग्राहकों की सर्विस पर पड़ेगा। क्योंकि जैसा कि ऊपर बताया गया है कि कुछ जगहों पर बीएसएनएल के नेटवर्क को बाधित किया गया है, इसमें और बढ़ोतरी की जा सकती है। यानी और भी जगह बीएसएनएल के नेटवर्क में दिक्कत आ सकती है। इससे ग्राहकों को परेशानी होगी। मौजूदा लॉकडाउन के समय ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि इस समय टेलीकॉम सर्विस जारी रहना बेहद जरूरी है।
इन कंपनियों का है बकाया
बीएसएनएल के बकाया मामले में टीएआईपीए ने इंडस टावर्स लिमिटेड, एटीसी टेलिकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, भारती इंफ्राटेल लिमिटेड, टावर विजन लिमिटेड, स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, स्पेस टेलिलिंक लिमिटेड, अप्लाइड सोलर टेक्नोलॉजीज और कॉसलाइट इंडिया लिमिटेड से फौरन हस्तक्षेप करने को कहा है। जानकारी के लिए बता दें कि बीएसएनएल पर मोबाइल टावर कंपनी एटीसी का 606.4 करोड़ रुपये, ब्रॉडबैंड टेक्नोलाजी का 488 करोड़ रुपये, इंडस टावर्स का 127 करोड़ रुपये, टावर विजन का 118.2 करोड़ रुपये और भारती इंफ्राटेल का 100 करोड़ रुपये बकाया है।
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