आरबीआई ने ब्‍याज दरों में 0.35% की कटौती की

भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्‍याज दरों में 0.35% की कटौती की है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्‍याज दरों में 0.35% की कटौती की है। जी हां आरबीआई ने रेपो रेट 0.35 प्रतिशत घटाकर 5.40 प्रतिशत कर दिया है। तो वहीं रिवर्स रेपो रेट 5.15 प्रतिशत किया गया है।आपको बता दें कि 5.40 प्रतिशत बेसिस प्‍वाइंट नौ साल का निम्‍नतम स्‍तर है। साथ ही रिजर्व बैंक ने वित्‍त वर्ष 2019 के लिए जीडीपी ग्रोथ लक्ष्‍य भी घटाया है। आपको बता दें कि यह कयास लगाया जा रहा था कि आरबीआई रेपो रेट में कटौती करेगा और यह बात सेंट्रल बैंक ने सच कर दी है। यह ग्राहकों के लिए एक अच्‍छी खबर है क्‍योंकि कर्ज लेना भी अब सस्‍ता पड़ेगा। आपको बता दें कि ये दरें लगातार चौथी बार घटी हैं।

ये हैं मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी के सदस्य

ये हैं मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी के सदस्य

आज हुई मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में सभी सदस्य शामिल रहे।

  • शक्तिकांत दास,
  • भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर
  • माइकल पात्रा
  • चेतन घाटे, प्रोफेसर, भारतीय सांख्यिकी संस्थान
  • प्रोफेसर पामी दुआ, निदेशक, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स
  • डॉ. रवींद्र एच ढोलकिया, प्रोफेसर, भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद
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    मोदी सरकार में रेपो रेट का इतिहास

    मोदी सरकार में रेपो रेट का इतिहास

    मोदी सरकार में रेपो रेट की हिस्ट्री काफी रोचक है। पूरे मोदी सरकार के कार्यकाल में यह दर कभी उतना नहीं रही जितनी दर ठीक मोदी सरकार के शपथ के ठीक पहले थी। जब मोदी सरकार ने कार्यकाल संभाला तो रेपो रेट की दर 8 फीसदी थी, जो फिर कभी उतनी नहीं हुई है।

    ये है रेपो रेट का सफर

    ये है रेपो रेट का सफर

    -06th June 19 को 5.75 फीसदी
    -04th April 19 को 6.00 फीसदी
    -07th Feb 19 को 6.25 फीसदी
    -05th Dec 18 को 6.50 फीसदी
    -05th Oct 18 को 6.50 फीसदी
    -01st Aug 18 को 6.50 फीसदी
    -06th Jun 18 को 6.25 फीसदी
    -05th Apr 18 को 6.00 फीसदी
    -07th Feb 18 को 6.00 फीसदी
    -06th Dec 17 को 6.00 फीसदी
    -04th Oct 17 को 6.00 फीसदी
    -02nd Aug 17 को 6.00 फीसदी
    -08th Jun 17 को 6.25 फीसदी
    -06th Apr 17 को 6.25 फीसदी
    -08th Feb 17 को 6.25 फीसदी
    -07th Dec 16 को 6.25 फीसदी
    -04th Oct 16 को 6.25 फीसदी
    -05th Apr 16 को 6.50 फीसदी
    -29th Sep 15 को 6.75 फीसदी
    -02nd Jun 15 को 7.25 फीसदी
    -04th Mar 15 को 7.50 फीसदी
    -15th Jan 15 को 7.75 फीसदी
    -28th Jan 14 को 8.00 फीसदी

    मॉनिटरी पॉलिसी में इस्तेमाल होने वाले शब्दों का मतलब

    मॉनिटरी पॉलिसी में इस्तेमाल होने वाले शब्दों का मतलब

    रेपो रेट (Repo rate)
    रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंकों को आरबीआई कर्ज देता है। बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने से मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे, जैसे कि होम लोन, व्हीकल लोन वगैरह।

    रिवर्स रेपो रेट
    जैसा इसके नाम से ही साफ है, यह रेपो रेट से उलट होता है। यह वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है। बाजार में जब भी बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दे।

    सीआरआर
    देश में लागू बैंकिंग नियमों के तहत हरेक बैंक को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है। इसे ही कैश रिजर्व रेश्यो या नकद आरक्षित अनुपात कहते हैं।

    एसएलआर
    जिस दर पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते है, उसे एसएलआर कहते हैं। नकदी की तरलता को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। कमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है। आरबीआई जब ब्याज दरों में बदलाव किए बगैर नकदी की तरलता कम करना चाहता है तो वह सीआरआर बढ़ा देता है, इससे बैंकों के पास लोन देने के लिए कम रकम बचती है।

     

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